05/06/2026
पाटन के ग्राम दौनी में स्थापित बीआरसी यूनिट बनी प्राकृतिक खेती का 'आदर्श मॉडल'
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कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकासखंड पाटन के ग्राम दौनी में प्रगतिशील कृषक अभेंद्र सिंह चंदेल द्वारा स्थापित बीआरसी (बायो रिसोर्स सेंटर) यूनिट प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में 'आदर्श मॉडल' के रूप में उभरी है। कृषि विभाग के निर्देशन में तैयार यह यूनिट आधुनिक कृषि का एक उत्कृष्ट केंद्र बन गई है, जिससे प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने कृषक अभेंद्र सिंह चंदेल के फार्म पर पहुंचकर बीआरसी यूनिट का निरीक्षण किया। डॉ. त्रिपाठी ने यूनिट की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि करने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह यूनिट इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे कम लागत में वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीकों का समन्वय कर खेती को अधिक लाभप्रद बनाया जा सकता है।
कृषक अभेंद्र सिंह चंदेल ने बताया कि वह लंबे समय से पूर्णतः प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और उन्हें मध्य प्रदेश स्टेट ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी द्वारा आधिकारिक जैविक प्रमाणीकरण भी प्राप्त है। उनकी इस यूनिट की सबसे बड़ी विशेषता इसका इन-हाउस प्रोडक्शन मॉडल है, जिसके तहत वे वर्मीकम्पोस्ट, घन जीवामृत, तरल जीवामृत और फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक जैव रसायनों का वैज्ञानिक पद्धति से स्वयं उत्पादन करते हैं, जिससे खाद और कीटनाशकों के लिए उनकी बाजार पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसके अतिरिक्त, इस यूनिट के वैल्यू एडिशन मॉडल से कृषक न केवल जैविक गन्ने की खेती करते हैं, बल्कि यूनिट के भीतर ही उसका प्रसंस्करण कर शुद्ध 'जैविक गुड़' भी तैयार करते हैं, जो उनके उत्पादों को बाजार में अलग पहचान दिलाता है।
साप्ताहिक जैविक हाट तक उत्पादों को पहुंचाया -
कृषि विभाग द्वारा संचालित 'साप्ताहिक जैविक हाट' ने इस यूनिट के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां से कृषक अभेंद्र सिंह को अपने उत्पादों का सीधा और उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने यूनिट की व्यावसायिक पहुंच बढ़ाने के लिए सुझाव दिए। उन्होंने जैविक गुड़ के साथ-साथ वर्मीकम्पोस्ट एवं अन्य जैव रसायनों की 'स्मार्ट पैकेजिंग' करने की सलाह दी, ताकि छोटे पैकेट के माध्यम से शहरी उपभोक्ताओं और बागवानी के शौकीन लोगों तक इन उत्पादों की पहुंच सुलभ हो सके और ब्रांडिंग को और अधिक मजबूती मिल सके।
Department of Agriculture, Madhya Pradesh