20/09/2022
सौजन्य :- श्री दीपक बिशनोई समेलिया धाम भीलवाडा ,राजस्थान
समेलिया धाम की सम्पूर्ण जानकारी
भीलवाड़ा जिले की मांडल तहसील के समेलिया गांव के पास मेजा बांध क्षेत्र में स्थापित यह बिशनोई मन्दिर श्री गुरु जम्भेस्वर भगवान् की अष्ट धामो में से एक हे ! वि.सं.1637 में निर्मित यह विशाल मन्दिर बिशनोई समाज की अमुल्य धरोहर यह हैं इस मंदिर का निर्माण महन्त अज्ञानदास जी ने करवाया था इस मन्दिर की नीव की गहराई उन्नीस गज हैं एव उंचाई इक्कीस गज हैं मन्दिर का घेरा पचास फुट लम्बा चोडा हैं चारों और की दिवार की चौड़ाई साढे तिन फुट हैं मन्दिर परिसर में श्री गुरु जम्भेस्वर भगवान का मंदिर नोबतखाना,रथवान,घुडसाल ,सूरज पोल दरवाजा बना हुआ हैं मन्दिर के चारो और दिवार का पर कोटा बना हुआ हैं मन्दिर में अति आकर्शक रंगीन चित्रकारी की हुई हैं यहाँ पर मन्दिर के नाम एक सौ छीयासी बिघा भूमी हैं चार सो वर्षो से भी अधिक पौरणिक यह मन्दिर बिशनोई समाज की एतिहासिक धरोहर होने के साथ बिशनोई समाज का आस्था स्थल हैं और मन्दिर के पास में जम्भ सरोवर हैं और जम्भ सरोवर का निर्माण गुरु जम्भेश्वर भगवान जी ने ये पवित्र सरोवर खुदवाया था जो जम्भ सरोवर के नाम से प्रसिद्ध हुआ जिसमे महाराणा सांगा की माता झाली रानी मेले में आयी थी और उन्होने जम्भ सरोवर की पैड़िया बनवायी जो आज भी मौजुद हैं यह जम्भ सरोवर उतना ही पवित्र हे जितनी गंगा नदी ।इस सरोवर में स्नान करने मात्र से आदमी को मौक्ष प्राप्ति होती हैं मन्दिर निर्माण के पशचात से यहा पर प्रतिवर्ष दो विशाल मेले भरते थे समय के साथ इस मंदिर की व्यवस्था डगमगाने लगी और मेजा बाँध के डूब जाने से क्षेत्र में आने के कारण मन्दिर को बहुत नुकसान हुआ ! मन्दिर में पूजा अर्चना बंद हो गई पानी में डूबने के कारण मन्दिर की धराशही होने की कगार पर पहुंच गया था लगभग 11 साल पूर्व ब्रहालीन स्वामी चंद्रप्रकाश जी के शिष्य महन्त स्वामी भगवान प्रकाश जी ने यहां आकर पूजा अर्चना व मन्दिर सरक्षण का कार्य अपने जिम्मे लिया । स्वामी जी के प्रयास से यहा एक ट्रस्ट की स्थापना की गई व जन सहयोग से मंदिर की जीणॉद्धार की योजना बनाई गई। परकोटे की दीवारो का पुनः मन्दिर व अन्य ईमारतो की मरमत तथा मन्दिर परिसर में मीट्टी का भराव करवाना आदि कार्य इस योजना में शामिल किये गये हैं।