Rajasthan State Pollution Control Board

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Rajasthan State Pollution Control Board Water (Prevention and Control of Pollution) Cess Act, 1977 has been enacted to make the State Board financially independent.

Official account of Rajasthan State Pollution Control Board, Rajasthan's implementation agency for various acts, rules & notifications for protection and conservation of environment within the jurisdiction of the State. The Rajasthan State Pollution Control Board was constituted under section 4 of the Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974 on 7th February 1975, with the objectives of prevention, and control of water pollution and maintaining or restoring of wholesomeness of water[j1] . Later, it was also entrusted with the responsibilities of prevention, control and abatement of Air Pollution under the provisions of Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981. Under this act the State Board has been given powers to collect Cess on the basis of water consumed by the industries etc. Enactment of the Environment (Protection) Act, 1986 has further widened the scope of the activities of the Board. This Act being umbrella legislation, different rules for addressing the problems of various sectors have been enacted under this Act. The State Board is engaged in implementation of the rules made under the Environment Protection Act, 1986.

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठोस अ...
26/09/2026

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों और राजस्थान में उनके क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

चार-धारा कचरा पृथक्करण, डिजिटल निगरानी, थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारी, पुनर्चक्रण एवं ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के माध्यम से कचरे को संसाधन में बदलने और स्वच्छ, टिकाऊ शहरों की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्शन प्लान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण ...
26/09/2026

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्शन प्लान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर एवं राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, क्षेत्रीय कार्यालय जैसलमेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक, प्लास्टिक स्ट्रॉ, डिस्पोजल ग्लास एवं बोतलों का उपयोग नहीं करने तथा पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। शिविर के समापन पर विद्यार्थियों को कपड़े के थैले भी वितरित किए गए।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठोस अ...
25/09/2026

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल में प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के सहयोग से आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों एवं राजस्थान में उनके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो के निदेशक श्री अनुभव बैरवा ने नियमों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मण्डल के मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री प्रेमालाल ने नियमों के क्रियान्वयन में आमजन, स्थानीय निकायों एवं थोक अपशिष्ट उत्पादकों की भूमिका बताई।

अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री भुवनेश माथुर ने स्रोत स्तर पर चार-धारा पृथक्करण गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी तथा विशेष/घरेलू खतरनाक कचरे की जानकारी दी। स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता श्री अरुण व्यास ने थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जिम्मेदारियों, डिजिटल निगरानी व्यवस्था तथा कचरा संग्रहण से अंतिम निस्तारण तक पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रकाश डाला।

नए नियमों में सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र, कम्पोस्टिंग, जैव-मीथेनीकरण, अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन, विरासत अपशिष्ट स्थलों के वैज्ञानिक उपचार और कार्बन क्रेडिट जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से कचरे को संसाधन में बदलने तथा भराव स्थलों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है। साथ ही ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल के विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया...
25/09/2026

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल के विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरणीय कानून, प्रदूषण नियंत्रण, निगरानी, अपशिष्ट प्रबंधन और उद्योगों के पर्यावरणीय अनुपालन की जानकारी प्राप्त की तथा अधिकारियों के साथ संवाद किया।

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल के प्रबंधन स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का...
24/09/2026

भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल के प्रबंधन स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों को मण्डल की कार्यप्रणाली, पर्यावरणीय विनियमन, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय निगरानी तथा उद्योगों के पर्यावरणीय अनुपालन की जानकारी दी गई। मण्डल के सदस्य सचिव श्री कपिल चन्द्रवाल ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के लिए कानून, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी का समन्वय आवश्यक है।

मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री विष्णु दत्त पुरोहित ने मण्डल की नियामकीय भूमिका एवं विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया। अतिरिक्त मुख्य पर्यावरण अभियंता श्री भुवनेश माथुर ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की पृष्ठभूमि एवं महत्व की जानकारी दी। वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता श्री विजय शर्मा ने पर्यावरणीय कानूनों, अनुपालन एवं उद्योगों की कानूनी जिम्मेदारियों पर संवाद किया।

विद्यार्थियों ने अधिकारियों के साथ औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय अनुपालन और वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों पर संवाद कर अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए।

यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण के कानूनी, वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक और सामाजिक पक्षों को समझने का अनुभवात्मक अवसर बना।

औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भीलवाड़ा टेक्सटाइल नगरी में प्रभावी बदलाव देखने को मिल रहा है।र...
21/09/2026

औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भीलवाड़ा टेक्सटाइल नगरी में प्रभावी बदलाव देखने को मिल रहा है।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की निगरानी में 28 प्रोसेस हाउसों में MEE एवं ZLD प्रणाली के बेहतर संचालन से पिछले दो वर्षों में साल्ट रिकवरी में 108% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे आरओ रिजेक्ट पानी के उचित उपचार, जल संरक्षण और औद्योगिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण को बढ़ावा मिला है।



वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अब फैसले केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों और वैज्ञानिक मॉडलिंग के आधार पर लि...
19/09/2026

वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अब फैसले केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों और वैज्ञानिक मॉडलिंग के आधार पर लिए जा सकेंगे।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल में IIT बॉम्बे की ओर से आयोजित कार्यशाला में ‘पवित्रा’ निर्णय सहायक मंच के माध्यम से विभिन्न प्रदूषण स्रोतों की पहचान और नियंत्रण उपायों के संभावित प्रभाव का आकलन समझाया गया।

कार्यशाला में ‘पवित्रा’ डैशबोर्ड का लाइव प्रदर्शन करते हुए बताया गया कि परिवहन, उद्योग, कृषि अवशेष जलाने और घरेलू ईंधन जैसे स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को आंकड़ों के आधार पर समझकर PM2.5 में संभावित बदलाव और विभिन्न नियंत्रण उपायों के प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।

इस तकनीक के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी उपायों को वैज्ञानिक आधार पर प्राथमिकता देने में सहायता मिलेगी।

भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी टे...
18/09/2026

भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सभी टेक्सटाइल प्रोसेसिंग इकाइयों में पैडल डायर स्थापित करना अनिवार्य किया गया है।

इस तकनीक से ईटीपी से निकलने वाले गीले स्लज की नमी समाप्त होने के साथ उसका आयतन 70–80 प्रतिशत तक कम होता है। सूखे स्लज का उपयोग सीमेंट उद्योग में वैकल्पिक ईंधन एवं कच्चे माल के रूप में किया जा सकेगा, जिससे औद्योगिक कचरे के सुरक्षित निस्तारण और पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) द्वारा जयपुर स्थित मंडल मुख्यालय में जागरूकता का...
17/09/2026

विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) द्वारा जयपुर स्थित मंडल मुख्यालय में जागरूकता कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में ओजोन परत के संरक्षण, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण अनुकूल एवं सतत शीतलन तकनीकों से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं और प्रतिभागियों के साथ विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर विश्व ओजोन दिवस 2026 की थीम “शीतल ग्रह के लिए वैश्विक कार्यवाही” के अनुरूप जागरूकता पोस्टर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, औद्योगिक प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

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