02/07/2026
इतना तो स्पष्ट मानिए कि अयोध्याजी मंदिर में हुई चोरी की घटना ना मेरी और मेरे जैसे सामान्य हिन्दू गृहस्थों की आस्था को प्रभावित कर सकेगी, ना ही उस पुण्यक्षेत्र के प्रति हमारे समर्पण में रत्ती भर का अंतर आएगा। धर्म की थोड़ी भी समझ रखने वाला हिंदू जानता है कि कलियुग में कब किसकी मति भ्रष्ट हो जाएगी, यह कहा नहीं जा सकता। कल ईश्वर हमारी ही मति किस ओर फेर देंगे, इसका भी कोई दावा नहीं किया जा सकता। फिर मैं मंदिर के वेतनभोगी कर्मियों से सतयुगी निष्ठा की आशा कैसे कर सकता हूं? जो हुआ है वह पहले भी होता रहा है और आगे भी हो सकता है।
मानस में कलियुग का वर्णन करते बाबा कहते तो हैं, "सोई सयान जो पर धन हारी, जो कर दंभ सो बड़ अचारी। इस युग में वही सयाना है जो दूसरे का धन लूट लेता हो... ऐसे सयाने हर मोड़ पर मिलेंगे हमें, इनके कुकर्मों के कारण हमारी आस्था डिगने लगे फिर तो हो गया...
इस पूरे प्रकरण में मेरा दुख यह नहीं कि सनातनी समुदाय का दान किया हुआ धन कुछ चोरों के हाथ चला गया, मेरा दुख यह है कि इसी बहाने अधर्मियों, विधर्मियों, कुकर्मियों को धर्म और मंदिर के विरुद्ध बोलने का अवसर मिल गया। जो लोग सदैव मंदिर का विरोध करते रहे, जो स्वयं मंचों से चीख कर कहते रहे कि मेरा धर्म पर कोई भरोसा नहीं, वे भी भक्ति का पाखंड करते हुए बोल रहे हैं, यह दुखद है। लोकतंत्र के मंदिर का धन लूटने वाले मंदिर का धन लूटे जाने पर दुखी होने का पाखंड रच पा रहे, तो यह उन निष्ठाहीन सेवकों के कारण ही है। अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी तरह घसीट रहा व्यक्ति भी प्रश्न पूछे कि ईश्वर चोरी क्यों नहीं रोक सके, तो यह भी इन दुष्टों के कारण ही है। चोरी के अपराधियों को इसके लिए भी अतिरिक्त दण्ड मिलना चाहिए।
हिन्दू चिंतन ईश्वर से अपराधियों के लिए कानूनी दंड नहीं मांगता। कानून दूसरे तरह से दण्ड देता है, ईश्वर दूसरे तरह से... सोमनाथ का ध्वंस करने आए गजनवी को याद कीजिए, यहां उसने जितने स्थानीय लोगों, पुजारियों को मारा, वापसी के समय उसके लगभग उतने ही सैनिक, अधिकारी कच्छ के रन में बालू में दब कर मर गए... हमेशा अपराजेय रहने वाले महमूद ने इस घटना के बाद एक बार और भारत पर आक्रमण करने का प्रयास किया, पर उस बार जाटों ने उसे खदेड़ खदेड़ कर मारा। इतना मारा कि भागता महमूद लगभग अकेले ही गजनी पहुंच पाया और उसी चोट के कारण तड़पते तड़पते मरा... आस्था ईश्वर से ऐसे ही न्याय की मांग करती है और ईश्वर ऐसा ही करते हैं।
जो लोग इस अपराध में शामिल हैं, उन्हें कानून अपनी व्यवस्था से दण्डित करेगा और ईश्वर अपनी व्यवस्था से। कानून चूक भी जाय तो ईश्वर का न्याय हो कर ही रहेगा। और हमारी आशा उसी से है... ये चोर सड़ कर मरेंगे, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं।
कोई मिश्रा, कोई पाण्डेय, कोई श्रीवास्तव, कोई यादव... इनकी आने वाली पीढ़ियां भी इस अपराध का दण्ड भोगेंगी। समाज लंबे समय तक याद रखेगा कि इन्होंने मंदिर का धन लूटा था। उनके बच्चे भी सामाजिक तिरस्कार भोगेंगे।
यह एक अवसर है कि सरकार मंदिर की व्यवस्था संतों के हाथ में देने पर विचार कर ले। वहां के धन से गुरुकुलों, अनाथालयों आदि की व्यवस्था बने और धर्म प्रचार हो तो शुभ होगा। अन्यथा...
दिनेश कांवट
9829216746