Professor Pappu Ram Koli

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Professor Pappu Ram Koli Principal Govt College Hindauncity,President Akhil Bhartiya Koli Samaj Rajasthan

23/09/2026
21/09/2026

प्रकृति की सुंदरता से सराबोर ग्राम- सास्ती तहसील- नैनवा जिला बूंदी को आज दिनांक 21/09/ 2026 को देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ ! ग्राम चारों तरफ़ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है जो बहुत ही खूबसूरत जगह को दर्शाता हैं ! श्री बरधो लाल गुर्जर के आवास पर उनके सुपुत्र श्री ओमप्रकाश गुर्जर द्वारा बीहड़ रास्तो से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर अपने ग्राम के दर्शन करने का सुअवसर प्राप्त हुआ ! कई बार मन में विचार आया कि कहीं ओम जी गिरा नहीं दे , लेकिन उनकी शानदार ड्रावरी के कारण मुक़ाम तक पहुँचा ! जीवन में एक अविस्मरणीय पल! सदैब याद रहेगा !

प्रकृति की सुंदरता से सराबोर ग्राम- सास्ती तहसील- नैनवा जिला बूंदी को आज दिनांक 21/09/ 2026 को देखने का सुअवसर प्राप्त ह...
21/09/2026

प्रकृति की सुंदरता से सराबोर ग्राम- सास्ती तहसील- नैनवा जिला बूंदी को आज दिनांक 21/09/ 2026 को देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ ! ग्राम चारों तरफ़ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है जो बहुत ही खूबसूरत जगह को दर्शाता हैं ! श्री बरधो लाल गुर्जर के आवास पर उनके सुपुत्र श्री ओमप्रकाश गुर्जर द्वारा बीहड़ रास्तो से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर अपने ग्राम के दर्शन करने का सुअवसर प्राप्त हुआ ! कई बार मन में विचार आया कि कहीं ओम जी गिरा नहीं दे , लेकिन उनकी शानदार ड्रावरी के कारण मुक़ाम तक पहुँचा ! जीवन में एक अविस्मरणीय पल! सदैब याद रहेगा !

20/09/2026

चार मित्र
एक गाँव में चार मित्र रहते थे। उनमें से तीन बहुत ही विद्वान थे। पर वे व्यावहारिक ज्ञान की दृटि से एकदम कोरे थे।
चौथा मित्र पढ़ा-लिखा तो कम था, पर वह व्यावहारिक ज्ञान में माहिर था।
एक बार चारों मित्र अपना-अपना भाग्य आजमाने राजधानी की ओर चल पड़े़। रास्ते में एक जंगल आया।
वहाँ उन्हें एक पेड़ के नीचे कुछ हड्डियाँ दिखाई दी। उनमें से एक व्यक्ति ने उन हड्डियों का निरक्षण करते हुए कहा, ये हड्डियाँ किसी शेर की हैं। इन हड्डियों को एकत्र कर मैं अपनी विद्या से मरे हुए शेर का कंकाल तैयार कर सकता हूँ।
दूसरे विद्वान ने कहा, मैं अपने ज्ञान के बल से उस कंकाल पर मांस चढ़ा कर एवं रक्त से भरकर उसे खाल से ढक सकता हूँ।
तीसरे विद्वान ने कहा, मैं अपनी विद्या से इस निर्जीव प्राणी को जीवित कर सकता हूँ।
व्यावहारिक ज्ञान में माहिर चौथे मित्र को अपने तीनों मित्रों की बातें सुनकर बड़ा आश्र्चय हुआ। उसने अपने विद्वान मित्रों को सावधान करते हुए कहा, मित्रो, शेर को जीवित करना खतरे से खाली नहीं होगा।
यह सुनकर पहले विद्वान ने कहा, अरे, यह तो मूर्ख है! इस बेवकूफ को हमारे ज्ञान से ईष्र्या हो रही है।
दोनो विद्वान मित्रों ने भी उसका समर्थन किया। यह देखकर वह समझदार व्यक्ति दौड़कर एक पेड़ पर चढ़ गया। तीनों विद्वान मित्रों ने अपने-अपने ज्ञान का प्रयोग करना शुरू कर दिया।
पहले विद्वान ने सारी हड्डियाँ एकत्र कर उसका कंकाल तैयार किया। दूसरे विद्वान ने कंकाल पर मांस चढ़ाकर वे रक्त से भरकर उसे खाल से ढ़क दिया।
तीसरे ने अपनी विद्या का प्रयोग कर उस निर्जीव शेर में जान डाल दी। जान आते ही शेर दहाड़ता हुआ खड़ा हो गया और तीनोंपर टूट पड़ा। तीनों विद्वान वहीं ढेर हो गए।
व्यावहारिक ज्ञान एवं सूझबझ के कारण चौथे मित्र की जान बच गई।

शिक्षा -ज्ञान का अव्यावहारिक उपयोग बड़ा

किताबो की परीक्षा सिर्फ कुछ दिनों की होती है , पर ज़िन्दगी की परीक्षा हर रोज़ होती है ! यहाँ पास होने के लिए अंक नहीं हि...
19/09/2026

किताबो की परीक्षा सिर्फ कुछ दिनों की होती है , पर ज़िन्दगी की परीक्षा हर रोज़ होती है ! यहाँ पास होने के लिए अंक नहीं हिम्मत चाहिए होती है !

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