24/03/2026
संविधान SC आरक्षण सिर्फ हिन्दु, बौद्ध, सिक्ख को ही देता है
संविधान आदेश (अजा) 1950 में सिर्फ हिन्दु जातियों को ही अजा आरक्षण का प्रावधान किया था। हिन्दु जातियों की लिस्ट में खटीक जाति भी दर्ज थी। अत: भारतीय संविधान के अनुसार हिन्दु पंथ को मानने वाली खटीक जाति को sc का आरक्षण है।
संविधान में 1956 में संशोधन कर सिक्ख पंथ की मजहबी व रामदासी जातियों को भी जोड़कर अनुसूचित जाति का लाभ दिया गया।
1956 में बाबा साहेब अंबेडकर ने बौद्ध धर्म दीक्षा लेने के साथ अजा आरक्षण छोड़ दिया था। क्योंकि तब बौद्ध जातियों को अजा आरक्षण नहीं था। बाबा साहेब ने बौद्ध मतांतरित जातियों के लिए संघर्ष करने का संकल्प किया था।
1990 में गेर-कांग्रेसी वीपी सिंह सरकार ने बाबा साहेब को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए मतांतरित बौद्ध धर्म जातियों को भी अजा (sc) आरक्षण दिया गया।
1990 के बाद यह हो गया कि भारतीय पंथ जो जाति से प्रभावित रहे है, उन्हे ही अनुसूचित जाति (sc) का लाभ मिलता है। विदेश से आये पंथों में जाति की संकल्पना नहीं रही और ना ही जातिगत व्यवस्था को मान्यता है, अत: ईसाई, इस्लाम, यहुदी, पारसी को अजा आरक्षण नहीं मिल सकता।
बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने हिन्दू कोड बिल में भी हिन्दू की परिभाषा यही दी थी कि जो ईसाई, मुस्लिम, यहुदी, पारसी नहीं है, वे सब हिन्दु है।