04/01/2026
यह कहानी नहीं हकीकत है वो नारी थी स्वाभिमानी।
काया पलट कर गई समाज का कर अपनी मनमानी।।
दर्द सहा अपमान सहा पर रही अटल सी अडिग।
शोषण मुक्त समाज की रख गई अटूट सी नींव।।
अलख जगाई शिक्षा की खूब किया था प्रचार प्रसार।
स्कूल खोला अपने बल पढ़ सकें जो नर और नार।।
अबला नहीं तू सबला थी जब छाई थी महामारी।
जन सेवा में ऐसी जुट गई जैसे बन कर तू अवतारी।
सुकृत्य ऐसे ही कई किए कोई भी नहीं अनजान।
गिनती में ही आवै नहीं कब तक करूं मैं बखान।
गोरे और काले सब ही डरे देख कर के तेरी चतुराई।
भारत भाग्य विधाता बन करके जब तू दुनिया में आई।।
कोटि नमन निज चरणों में सुनले हे मेरी महामाई।
जन कल्याण हेतु जन्म लिया तू सावित्री फूले बाई।।
टूटे फूटे से इन शब्दों में छंद लिख दिया है बनवारी।
युग युग तक ना भूल सके तू ऐसी थी कामणगारी।।
🙏🙏🙏
Banwari Meena गुरु जी
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