Upkar Sansthan Trust

Upkar Sansthan Trust ग्रामीण जनों का उत्थान और अनाथ ,दरीदर्जनों की सेवा में कटिबद्ध।

आपका अपना संस्थान विगत ७ वर्षो से मानव सेवा में लगा हुआ हे। फुटपाथ पर सोते हुए गरीबो को देखकर ,सर्दी में ठिठुरते बच्चो और वृध्दों को देखकर ,भूख से कहराते हुए असहायों को देखकर , विधवा और तलाकशुदा औरतो को औरो के घर में झाड़ू पोछा करते देखकर , रोड पर तीव्र गति से चलते हुए वाहनो के द्वारा कुत्तो को मरते देखकर , गावों में औरतो को कोसो पैदल चलकर सिर पर ३-३ मटके रखकर पानी लाता देखकर , अपंगो को लड़खड़ाते देख

कर ,वृध जनों को ठोकर मारकर घर से निकालते देखकर और वरदाश्रम में जाते देखकर और गायों दुर्दशा रोड पर भूखी फिरती देखकर, ऐसा लगता हे की हम पृथ्वी पर बोझ हे क्या ? क्या मै और आप मिलकर हम होकर इनकी सहायता नहीं कर सकते। ऐसे अनेको दृश्य हे जिनको देखकर दिल दुःख से द्रवित हो जाता हे

पुरुष का मौन क्यों पहाड़ सा खड़ा रहता है, उसके जन्म पर खुशियाँ मनाई जाती है, थाली बजाई जाती है, लड्डू बांटे जाते हैं क्य...
20/01/2025

पुरुष का मौन क्यों पहाड़ सा खड़ा रहता है, उसके जन्म पर खुशियाँ मनाई जाती है, थाली बजाई जाती है, लड्डू बांटे जाते हैं क्योंकि वो एक दुधारू गाय है, जिसे हर कोई दुहता है, उसके मन में सुख है या दुख इसकी थाह कोई नहीं पाता है....!

वह हर पल अपनों के लिए जीता है, जीवन का एक एक पल दूसरों के लिए समर्पित करता है, बचपन से जवानी तक माँ बाप के सपनों को साकार करने के लिए दिन रात संघर्ष करता है, तो कभी पितृहीन होकर परिवार की बागडोर मुखिया के रुप में संभालता है....!

कभी छोटे भाई बहनों के लिए अपने सपनों की बलि देता है तो कभी परिवार की परम्परा के लिए अपने प्यार की तिलांजलि देता है और परिवार की खुशी के लिए अनचाही शादी करता है....!

पत्नी कैसी भी हो उसे निभाता है, पत्नी सुन्दर सुशील हो तो अपनी किस्मत को सराहता है और बदसूरत...बददिमाग हो तो ताउम्र नरक की सजा भुगतता है, पिता बन कर संतानों की परवरिश करने में अपना तन मन धन सब कुछ समर्पित करता है....

अपनी हर लड़ाई में रहता है वह मौन, अपना संघर्ष किसी को नहीं बता पाता है, एक एक तिनका इकट्ठा करके अपने सपनों का आशियाना बनाने की कोशिश करता है, ताउम्र एक एक पैसे का हिसाब रखता है, जिम्मेदारियों के पहाड़ के नीचे दबा उफ तक नहीं कर पाता है....

इस सफर में आदमी जीतता है या हारता लेकिन अंतत: अपने मन में अपनी इच्छाओं की कब्र में
अकेला ही रहता है, हर कोई उससे मांगता ही मांगता है, उसे देने कोई नहीं आता है.....!

और एक दिन चुपचाप चल देता है अनजान सफर पर जहाँ जाकर कोई वापस आता नहीं...

आदमी का दर्द हमेशा मौन ही रहता है ...

इसलिये पुरुष स्त्री से प्रेम करे, और थोड़ा स्त्री हो जाए, दुःखदायी है एक पुरुष का, ताउम्र पुरुष रह जाना....

🗨एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी  से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से...
17/05/2024

🗨एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"

🙂पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

☺धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

😊एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

🤷🏻‍♂उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"

👱‍♀️पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।

पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"

😋पत्नी ने कहा,"नहीं जी"

🥲पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"

👉सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे 😀😀😀

संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट बैठक
01/04/2024

संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट बैठक

18/03/2024

कुछ ऐसी दवायें भी होती हैं , जिनके उपयोग से बीमारियाँ नहीं होती हैं,,,,,
1. कसरत भी एक दवाई है।
२ . सुबह शाम घूमना भी एक दवाई है।
३ . व्रत रखना भी एक दवाई है।
४ . परिवार के साथ भोजन करना भी एक दवाई है।
५ . हँसी मज़ाक़ करना भी एक दवाई है।
६ . गहरी नींद भी एक दवाई है।
७. अपनों के संग वक़्त बिताना भी एक दवाई है।
८. ख़ुश रहना भी एक दवाई है।
९. कुछ मामलों में चुप रहना भी एक दवाई है।
१०. लोगों का सहयोग करना भी एक दवाई है।
और ,,,,एक अच्छा दोस्त तो पूरी की पूरी दवाई की दुकान है।।
👉नोट —हम दवाई बताने की फ़ीस नहीं लेते , आपकी ख़ुशी ही हमारी फ़ीस है। 🙏

14/03/2024

*पारखी नज़र*

एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला- "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ।
राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा- "नस्ली नही हैं।"
राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा, उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी माँ मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है।
राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं है ?" उसने कहा- "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सिर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुँह में लेकर सिर उठा लेता हैं।
राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज, घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया।
कुछ दिनों बाद, राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा- "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।"
राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।"
राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?" उसने कहा- "रानी साहिबा का नौकरों के साथ सुलूक गँवारों से भी बुरा हैं। एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज, भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया।
कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया, और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा- "जान की सलामती हो तो कहूँ।" राजा ने वादा किया।
उसने कहा- "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।" राजा को बहुत गुस्सा आया,मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था,राजा सीधा अपनी माँ के महल पहुँचा।
माँ ने कहा- "ये सच है,तुम एक चरवाहे के बेटे हो,हमारी औलाद नहीं थी,तो तुम्हें गोद लेकर हम ने पाला।"
राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा- बता, "तुझे कैसे पता चला ?" उसने कहा- "जब राजा किसी को इनाम दिया करते हैं,तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं।लेकिन आप भेड़,बकरियां,खाने पीने की चीजें दिया करते हैं।ये रवैया राजाओं का नही,किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"
इंसान के पास कितनी धन दौलत,सुख समृद्धि,रुतबा,इल्म,बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा है।इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नीयत से होती है...
*जय श्री कृष्ण*🙏🙏

24/01/2023

Jai shree ram

उपकार संस्थान ट्रस्ट  द्वारा दिव्यांग को हैंडी केअर डिवाइस निःशुल्क भेंट की गई। ऐसे दिव्यांग या असहाय बंधु जो पांवों के ...
23/07/2022

उपकार संस्थान ट्रस्ट द्वारा दिव्यांग को हैंडी केअर डिवाइस निःशुल्क भेंट की गई।
ऐसे दिव्यांग या असहाय बंधु जो पांवों के बल घिसट -घिसटकर चलते हैं या शरीर का नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है । वे जन मोबाइल न.8824697008 पर संपर्क करें। उन्हें निःशुल्क डिवाइस दी जाएगी।

आज योगिनी एकादशी है। भगवान लक्ष्मी नारायण आप सब पर कृपा करें। आप सब अन्न धन और स्वास्थ्य वान हो।  समाजसेवा और परमार्थ के...
23/06/2022

आज योगिनी एकादशी है। भगवान लक्ष्मी नारायण आप सब पर कृपा करें। आप सब अन्न धन और स्वास्थ्य वान हो। समाजसेवा और परमार्थ के कार्यों के लिए भगवान विष्णु आप सभी को समर्थता दे। जय श्री राधे।

संस्थान की दैनिक सेवाओं के तहत उदयपुर के आस पास के क्षेत्रों में बेघर और लवारिश गो माताओं को हरा चारा खिलाया गया। जय गो ...
23/06/2022

संस्थान की दैनिक सेवाओं के तहत उदयपुर के आस पास के क्षेत्रों में बेघर और लवारिश गो माताओं को हरा चारा खिलाया गया। जय गो माता।

21/06/2022


धर्मार्थ काम में आगे आये नरेंद्र जी का आभार।
19/06/2022

धर्मार्थ काम में आगे आये नरेंद्र जी का आभार।

प्रेरक प्रसंग-एक सेठ-जी के पास एक ग्राहक कुछ समान लेने के लिए आया। उसने जितने का समान लिया उसमें 10 रूपये कम पड़ गए तो स...
06/06/2022

प्रेरक प्रसंग-
एक सेठ-जी के पास एक ग्राहक कुछ समान लेने के लिए आया। उसने जितने का समान लिया उसमें 10 रूपये कम पड़ गए तो सेठ-जी ने कहा कुछ समान कम कर देता हूँ, हम उधार नहीं देते। ग्राहक को सेठ-जी की बात बहुत ही बुरी लगी, बोला कि मेरे घर में तीन-दिन से खाना नहीं बना मेरा पूरा परिवार भूखा है और आपको रूपयों की पड़ी है। सेठ-जी ने कहा 5 मिनट रूको, घर से सेठानी को बोलकर भोजन की एक शानदार थाली लगवाकर ले आए और बोले पहले भोजन करो तथा जाते समय कुछ भोजन बच्चों के लिए भी ले जाना। उस व्यक्ति के जाने के बाद जब सेठ-जी के बच्चों ने पूछा पिता जी ये कैसा व्यवहार, 10 रूपये कम पड़ने पर तो आपने उनका समान कम कर दिया और बाद में भरपेट भोजन तो करवाया ही साथ में और भोजन भी बांध दिया। आखिर ऐसा क्यों.... सेठ भी ख़ानदानी था बोला बच्चों हमेशा ये सीख याद रखना....
#व्यापार_करते_समय_दया_मत_करो_और_सेवा_करते_समय_व्यापार__मत_करो"

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