31/08/2026
शाखा में बचपन से इस गीत को गाते आ रहें है और आज इस छोटी सी पंक्ति का भाव बढ़ते उम्र के साथ गहराते जा रहा है।
बचपन में लगता था कि जो प्रातः उठकर शाखा नहीं जा रहा है उसको सुबह सुबह उठाकर शाखा लेकर जाना है, लेकिन जैसे जैसे उम्र के बढ़ता गया तो लगा अपनत्व के भाव को जगाना है फिर लगा राष्ट्रभाव का जगाना है और ये "जगाना" शब्द अनेक भवनात्मक शब्दों का समूह बनता चला गया... कर्तव्य, स्वाभिमान, चेतना, संस्कार, आत्मविश्वास। अर्थात ये एक "जगाना" शब्द अपने भीतर एक पूरे राष्ट्र के पुनर्जागरण की शक्ति समेटे हुए है। तो भाई अपने अन्दर गुणों को संजोइये तथा अपने राष्ट्र के प्रति संगठित रहिये 🙂