Mritunjay Kumar

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Mritunjay Kumar राष्ट्रभक्ति हमारा मत नहीं, व्रत है।

मोहम्मद शकील देहरादून, उत्तराखंड में "पायल टेलर्स" नाम से एक दर्जी की दुकान चलाते हैं।एक महिला ने उनसे पूछा कि पायल कौन ...
03/10/2026

मोहम्मद शकील देहरादून, उत्तराखंड में "पायल टेलर्स" नाम से एक दर्जी की दुकान चलाते हैं।
एक महिला ने उनसे पूछा कि पायल कौन है। उन्होंने कहा कोई नहीं। फिर उसने पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाएं पायल पहनती हैं। उन्होंने कहा नहीं।
यानी एक मुस्लिम व्यक्ति अपने व्यवसाय के लिए एक हिंदू महिला का नाम—जो एक ऐसे आभूषण से जुड़ा है जिसे उसका अपना समुदाय नहीं पहनता—इस्तेमाल कर रहा है, और पूछे जाने पर जवाब सिर्फ यह है कि कोई पायल नहीं है।
यह कोई छोटी बात नहीं है। दुकानों, ब्रांडों और विज्ञापनों के लिए हिंदू नामों, प्रतीकों और त्योहारों को नियमित रूप से उधार लिया जाता है, जबकि इसके विपरीत (उल्टे) को एक अपमान के रूप में देखा जाता है।
यदि कोई हिंदू किसी इस्लामी हस्ती के नाम पर दुकान का नाम रखेगा, तो उसे कुछ ही घंटों के भीतर विरोध प्रदर्शनों, पुलिस शिकायतों और उसे बदलने की मांगों का सामना करना पड़ेगा।
यहाँ, मालिक खुद स्वीकार करता है कि इस नाम का उससे, उसके परिवार से या उसके समुदाय से कोई संबंध नहीं है, फिर भी दुकान पर यह नाम लिखा हुआ है।
हिंदू नाम कोई मुफ्त की जागीर (फ्री रियल एस्टेट) नहीं हैं। यदि नाम का मालिक, उसके धर्म, या उन ग्राहकों से कोई संबंध नहीं है जिनका वह प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, तो इसे बदला जाना चाहिए।

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहाँ लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छ...
03/10/2026

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहाँ लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।
लेबनान, सीरिया, ईराक़, जॉर्डन, मिस्र, लीबिया, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने हमारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे किंतु हम बच गये।

संयुक्त राष्ट्र ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। हमने उसको भी अपने खून से सींचा। हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सब कुछ था।

हम कुछ नहीं भूले, हम फिरऔन से बच गए। हम यूनान से बच गए। हम रोमन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब देशों से बच गए। हम सद्दाम से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए। अब हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्ला से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरूसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरूसलम को कभी नहीं भूले। वह हमारे हृदय में है, वह हमारे मस्तिष्क में है और जब तक हम रहेंगे, जेरूसलम हमारी आत्मा में रहेगा।

संसार ये याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिस्र, लेबनान, बेबीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गए हैं।

हम फिर भी बचे रहे।

हमें वे (इस्लामी) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारे रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारे उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारे पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिए गए, सोलोमन सुलेमान हो गए, डेविड दाऊद बना दिए गए, मोजेज मूसा कर दिए गए...

फिर एक दिन... उन्होंने कहा तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार नहीं किया। करते भी कैसे, उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा, स्वीकारो! कबूल लो! हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहरों को कब्जाया गया, हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम कत्ल हुए, भगा दिए गए...

मक्का के काबा में हम 2 लाख थे, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर कत्ल किया गया, फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे, मार दिए गए। ईराक़ में हम 2 लाख थे, तुर्की में चार लाख, हमें मारा जाता रहा, मारा जाता रहा। वे हमें मार रहे हैं, मारते जा रहे हैं। हमारे शहर, धन, दौलत, घर, पशु, मान-सम्मान सब कुछ कब्जाए जाते रहे फिर भी हम बचे रहे।

1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया फिर भी हम बचे रहे।

75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, जलील करते थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे रहे।

आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक, जैसी कई संस्थायें हमने इस दौर में बनाईं। आज हमारे चिकित्सक दवा बना रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहे हैं, ये सबके लिए हैं , यह मानवता के कल्याण के लिए है।

हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला। हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।

हम किसी के दुश्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की कसमें नहीं खाईं। हमें किसी को बर्बाद भी नहीं करना, हम साजिशें भी नहीं करते।

हम जीना चाहते हैं, सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।❤️🔥

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे, हम 3000 सालों से यरुशलम में ही थे। आज हम अपने पहले देश इजराइल में हैं। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा, येरूसलम हमसे है और हम येरूसलम से हैं।

- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू🫡

(इस तरह की ऐसी जिजीविषा हम हिंदुओं में भी पनपनी चाहिए। हमेशा स्मरण रखना कि मानसरोवर, काबुल, कंधार, पेशावर ,लाहौर, कराची , ढाका ,चटगांव अपनी संतानों की प्रतीक्षा में है)
75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।

03/10/2026

एक मुस्लिम आतंकी का खून मेरे कपड़े पर लगा है... ये बात इजरायली यात्री अपने प्रधानमंत्री ने बोला तो उन्होंने कहा 👉 योनिव, तुम एक सच्चे हीरो हो, इजराइल हम शेरों का देश हैं... ये बोल कर खून से सने इस जांबाज शेर यात्री को गले लगा लिए 🥰

 #गलत  #न्यूज़ है... "प्रभात खबर" ने स्पष्ट बोला 👉  लोगो और डिजाइन का इस्तेमाल कर भ्रामक पोस्ट वायरल कर दी गई  है। यह फर्...
02/10/2026

#गलत #न्यूज़ है... "प्रभात खबर" ने स्पष्ट बोला 👉 लोगो और डिजाइन का इस्तेमाल कर भ्रामक पोस्ट वायरल कर दी गई है।

यह फर्जी पोस्ट कार्ड "प्रभात खबर" के वास्तविक पोस्ट कार्ड को एडिट करके बनाया गया है। हिंदी के अखबार "प्रभात खबर" के वास्तविक पोस्ट में मोहन भागवत की तस्वीर के साथ संदेश यह था,
“यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं।”
मामले में दुखद विषय यह है कि इस फर्जी पोस्ट में उसी डिजाइन, रंग और तस्वीर का इस्तेमाल करके परशुराम से संबंधित कथित बयान डाल दिया गया है। संदर्भवश "प्रभात खबर" ने स्वयं स्पष्ट कर दिया है कि उसके लोगो और डिजाइन का इस्तेमाल करके मोहन भागवत के नाम से भ्रामक पोस्ट वायरल कर दी गई है।

एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि संघ के पूर्व दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख तथा सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने भी जाँचोपरांत दावा किया है कि यह एक फर्जी पोस्ट है।

हाँ, जमाना एआई का है।

01/10/2026
डिग्री धारको के कारण हीं है 👉 अवस्था - क्या जरूरत था, अब भुगतो 😂😂
30/09/2026

डिग्री धारको के कारण हीं है 👉 अवस्था - क्या जरूरत था, अब भुगतो 😂😂

30/09/2026

अन्तिम में ये पत्रकार क्यूँ बोला कि 👉 सावधान रहें, सतर्क रहें

जय श्रीराम 🚩🙏🚩
29/09/2026

जय श्रीराम 🚩🙏🚩

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