19/05/2019
राष्ट्र्बाद
राष्ट्र के बाद का अर्थ है राष्ट्र के प्रति समर्पण:
यह समर्पण नागरिको के त्याग, वलिदान, विश्वाश, अखंडता, कर्तब्यो का पालन, अधिकारों की रक्षा, कर्मठता, विकाश, सद्भाव, शिक्षा, प्रतिभा, कौशल, योग्यता, आपसी शहिष्णुता, विवेक, संस्कार, निष्पक्षता, न्याय प्रियता आदि साधनों के संयुक्त बल का प्रतिफल होता है. राष्ट्रबाद के अंदर क्षेत्र्बाद के लिए स्थान नहीं. क्षेत्र सिर्फ एक जुट होकर राष्ट्र को मजबूत करें, यदि कहीं खंड्ता परिलक्षित होती है, तो उसका अंत आवश्यक है.
समर्पण: सीमा पर तैनात सैनिक खेतों में किशान अपने कार्य स्वाभाव के अनुरूप राष्ट्र के प्रति समर्पित होता है. ऐसा ही समर्पण राष्ट्र को अग्रसारित करता है.
भारतीय संविधान में, संवैधानिक उपकरण आंशिक तौर पर राष्ट्र्बाद के विरुद्ध है:
आरक्षण, अल्पसंख्यक निति, निर्पेक्षता और स टी/स सी
प्रिय मित्रों हमारा उद्देश्य राष्ट्र्बाद को अग्रसारित करना है, राष्ट्र्बाद के विरुद्ध दुष्ट शक्तियों के दमन के लिए सभी राष्ट्र्बादी नागरिको का साथ आवश्यक है.
अतः उन सभी राष्ट्र्बादी नागरिको के सहयोग की अपेक्षा करता हूँ...अध्यक्ष, जन विकाश पार्टी. [email protected] [email protected]