22/07/2025
बेशक रसूलुल्लाह ﷺ की हिफाज़त अल्लाह ही फ़रमा रहा था, और हज़रत अबू तालिब इसके ज़ाहिरी ज़रिया बने। उनकी वजह से मक्का के काफ़िर रसूलुल्लाह ﷺ पर खुलकर ज़ुल्म नहीं कर पाते थे, क्योंकि वो अब भी उन्हें अपने ही ख़ेमे का समझते थे और उनसे बस भतीजे की शिकायत करके ख़ामोश हो जाते।
इसलिए मेरी पार्टी के नौनिहालों, जो तुम्हारे साथ नज़र न आ रहा हो, उसे फ़ौरन दुश्मन न समझो। हो सकता है अल्लाह उसी के ज़रिए तुम्हें किसी बड़ी मुश्किल से बचा रहा हो। और तुम्हारी पार्टी आज जो फल-फूल रही है, वो उसी हिकमत का नतीजा हो।
अबू लहब और अब्दुल्लाह बिन उबई से मगर हमेशा होशियार रहना है।