सिविल डिफेंस झुंझुनूं (नागरिक सुरक्षा) जिले स्तर पर नागरिकों की सुरक्षा करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। ये संगठन आपदा पीड़ितों को राहत पहुचाने में मुख्य भूमिका निभाता है। 24 मई, 1968 को “नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968” लागू किया गया। नागरिक सुरक्षा योजना भारत सरकार की योजना है व इसके लिए भारत सरकार द्वारा नागरिक सुरक्षा नगरों को चिन्हित करके श्रेणीबद्ध किया जाता है। नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक
ों को अधिक उपयोगी एवं सक्रिय बनाने के दृष्टिकोण से कुछ कल्याणकारी एवं सामाजिक कार्य भी सौंपे गये हैं :- सफाई अभियान,पल्स पोलियो अभियान,प्रदूषण मुक्ति अभियान,वातावरण सुरक्षा प्रचार,आगजनी में सहायता,रक्तदान शिविर,गम्भीर दुर्घटनाओं/घटनाएं/आपदा-जैसे बाढ़,चक्रवात आदि। अन्य स्थानीय मामले जो स्थानीय स्तर के हों।भारत सरकार द्वारा वर्ष 1962 में चीन आक्रमण के बाद इसकी स्थापना देश तथा प्रदेश के सुभेद्य नगरों में की गई। राज्य सरकार ने सिविल डिफेंस डिपार्टमेंट को पुलिस विभाग से हटाकर उसका विलय आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग में कर दिया है। अब आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग के सचिव ही सिविल डिफेंस के पदेन डायरेक्टर जनरल होंगे। आपदा प्रबंधन विभाग को और अधिक प्रभावी बनाने की कड़ी में यह कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए नागरिक सुरक्षा एक्ट में आवश्यक संशोधन पहले कर दिया था। नागरिक सुरक्षा संशोधन अधिनियम–2009 की परिभाषा के अनुसार सिविल डिफेंस का मुख्य कार्य आपदा प्रबंधन कर दिया गया है। राज्य में आपदा प्रबंधन एवं सहायता की सभी गतिविधियों के लिए राहत सचिव उत्तरदायी है। इस वजह से सिविल डिफेंस के डायरेक्टर का जिम्मा राहत सचिव को दिया गया है। वहीं, अधिनियम के तहत सभी जिला मजिस्ट्रेट को अपने अपने जिले में सिविल डिफेंस कंट्रोलर घोषित किया गया है।