17/07/2021
"आजकल युवाओं में एक नया दौर बड़ी तेजी से चला है..."
पहले नेताजी के साथ 35+ उम्र वाले लोग पूल, पुलिया, नाला, प्रधानी, बीडीसी व सदस्य आदि थाना में हनक के लिये घूमते थे, और अपना तथा आस-पड़ोस के लोगों का थोड़ा बहुत काम निकलवा दिया करते थे। उन्हें लोग सम्मान देते थे,,, तथा नेताजी कहकर संबोधित करते थे, 🙏🙏
लेकिन अब हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले नाबालिग बच्चे नेता जी के साथ घूमने वाले लोगो के पीछे हैं, और अंधकार में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
रेस्टोरेंट का नास्ता, स्कॉर्पियो की सीट और जगह जगह दुग्गी क्रिकेट का उद्दघाटन मैं बड़े नेताओं के साथ फोटो इन बच्चों को सपनो की रंगीन दुनिया मे पहुँचा दे रहा।
😇😇😇
ऊपर से चार ज़गह बैनर लगने और पेपर में छप जाने का सुख तो जैसे इनके लिए प्रसिद्धि का अंतिम पायदान है।🤓🤓
नेता जी के पीछे घूमने वाले लोग वो हैं जिनकी जिंदगी ऐसी स्थिति में आ चुकी है कि चाह कर भी वे न नेता से आगे निकल सकते हैं न ही कोई धंधा पानी रोजगार करके दो पैसा अपने एवं परिवार के लिए कमा सकते है।
लेकिन इन लोगो की देखा देखी कुछ क्षेत्रीय छत्रपो ने इन बच्चों की जो जिंदगी बिगाड़ी है वो कभी नही सुधर सकती।
जिस उम्र में इन नालायको को अपने कैरियर भविष्य पर ध्यान देना चाहिये, इन्हें समाजसेवा का परवाना चढ़ा है वो भी पिताजी के पैसे से....
अभिभावकों से निवेदन है कि इन बच्चों को समझाइये कि पढ़ लिखकर कुछ आय का अच्छा स्रोत बना लें फ़िर करेंगे तथाकथित समाजसेवा और नेतागिरी।
अगर अभिभावक आज नही रोक पाये इस ट्रेंड को तो कल को आपका खेत, मकान बेचकर, लोन कराकर यही लड़के जिंदगी जियेंगे, क्योंकि ये सब नेता तो किसी जन्म में न बन पाएंगे। ऐसा नहीं इनमें काबिलियत नहीं है🙏🙏🙏
कारण ये है कि ऊपर वाले नेताजी के लाइन में ये सबसे नीचे की कड़ियाँ हैं जिनका एकमात्र काम उपयोग होना है ।
समझाइये इन्हें कि ये समय फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायो, इकोनोमिक्स, हिस्ट्री, ज्योग्राफी, मैथ्स, हिंदी, इंग्लिश के शब्दों, थिअरिज,प्रैक्टिकल्स को अपने कानों में बैठाकर दिमाग मे घुसाने का है न कि अपने कानों को..भैया भैया भैया सुनने का अभ्यस्त बनाने का है।
भविष्य में यही लोग बोझ बनते हैं देश, समाज, परिवार पर।
नोट: पोस्ट केवल सामाजिक चिंतन कर युवाओं को जागरूक करने का एक माध्यम है।किसी को व्यक्तिगत छीटाकशी व नीचा दिखाने का उद्देश्य नहीं है।🙏🙏🙏