18/03/2014
2009 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में
भाजपा लड़ाई में नहीं थी . कुनबा बिखर
चुका था . प्रदेश इकाई में भयंकर
गुटबाजी थी . कल्याण सिंह ने मुलायम यादव
से हाथ मिला लिया था और
भाजपा को नेस्तोनाबूद करने की कसमें
खा रहे थे .
ऐसे माहौल में लोकसभा का चुनाव
हुआ . पूरब के 4-5 जिलों यथा बनारस गाजीपुर
मऊ बलिया में माफिया सरगना मुख्तार
अंसारी और उनके कुनबे
की तूती बोलती है ........वो यहाँ मुसलामानों के
एक छत्र नेता हैं ............
पूरे इलाके में
उनका खौफ है ......... ऐसे माहौल में चुनाव
हुआ ....बनारस से मुख्तार अंसारी लड़ रहे थे और
गाजीपुर से उनके बड़े भाई अफजाल
अंसारी .............उधर भाजपा से बनारस से
मुरली मनोहर जोशी थे और गाजीपुर से कोई
बेनाम बेदम सा प्रत्याशी था ......... चुनाव
अभियान शुरू हुआ तो धीरे धीरे गर्मी बढ़ी,
तना तनी बढ़ीं.......... कुर्ते की आस्तीनें चढ़ने
लगी .......... फिर एक लहर चली .....मुख्तार हराओ
अफजाल हराओ ........ मत दाता लामबंद होने
लगे ......... गाजीपुर में अफजाल को हराने
लायक एक ही उमीदवार था , सपा के राधे मोहन
सिंह और बनारस से लड़ाई बहुकोणीय
थी .............. आख़िरी दिन तक कांटे की लड़ाई
हुई ........... गाजीपुर में चूँकि तस्वीर साफ़
थी सो पूरा हिन्दू वोट राधेमोहन सिंह के साथ
लामबंद हो गया और वो आसानी से जीत
गए ........... बनारस में बात फंस गयी थी .........
फिर कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को अंत में
समझ आया की मुख्तार सीट निकाल ले
जायेंगे .............. वोटिंग वाले दिन सुबह 11
बजे उन्हें सद्बुद्धि आयी और उन्होंने खुले
आम मुरली मनोहर जोशी का समर्थन कर
दिया .............
तमाम हिन्दू वोट के ध्रुवीकरण
और अजय राय के समर्थन के बावजूद
बड़ी मुश्किल से जोशी जी कुल 16000 वोट से
जीत पाए .
हिन्दुस्तान का ( वेश्याओं से भी बदतर )
मीडिया पिछले एक हफ्ते से चिल्ला रहा है
की मोदी सेफ सीट ढूंढ रहे हैं .......... इन
वेश्याओं को ये नहीं मालूम की बनारस
मोदी के लिए इस देश की सबसे risky सीट है
जहां 4 लाख से ज़्यादा मुस्लिम वोट है .
केजरीवाल के आ जाने से 6 कोणीय
मुकाबला है ............ यदि मुलायम , मायावती ,
कांग्रेस और केजरीवाल आपसी सहमती बना लें
तो आसानी से मोदी को पटखनी दे सकते
हैं ............
मोदी को वाराणसी से लड़ाया जाए
या नहीं इसपे पिछले डेढ़ साल से भाजपा में
मंथन चल रहा है . रण नीतिकारों ने सारी उंच
नीच मोदी को समझा दी है .....सारे खतरे
बता दिए हैं ............ इन तमाम खतरों के बावजूद
मोदी बनारस से लड़ रहे हैं ...........क्योकि वो जानते हैं की उनके वहाँ से लड़ने से
पूरे पूर्वांचल में जिसमे UP और बिहार की 60
सीट आती हैं भाजपा को फायदा होगा ..........
मोदी को यदि सेफ सीट से
लड़ना होता तो गुजरात की किसी भी सीट से
सिर्फ पर्चा भरते और कई लाख वोट से जीतते .
वो अपना पूरा political career दाव पर लगा कर
बनारस से लड़ रहे हैं ......उन्होंने पार्टी के
लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर
दिया है ...........
जोशी अडवानी लालजी टंडन ....सब इस बात
को समझ रहे हैं .....मोदी सच्चे अर्थों में एक
जांबाज़ लीडर हैं ........ वो जान बूझ कर चक्र
व्यूह में घुस रहे हैं .......... अब देखना ये है
की वो इस चक्रव्यूह से विजयी हो कर बाहर आते
हैं या वीरगति को प्राप्त होते हैं ..........
युद्ध बनारस में लड़ा जाएगा ................ देखते
रहिये .....मज़ा आयेगा !