13/05/2018
शहीद वीरांगना बोली - दोनों बच्चों को सेना में ही भेजूंगी
देश की आन, बान और शान के लिए सैनिक पति के प्राणोत्सर्ग के आठ माह बाद जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली मां रूपी ने यह कहकर 'वीरांगना' शब्द को सचमुच सार्थक कर दिया कि 'मुझे बस, इनके बड़े होने का इंतजार है, दोनों को सेना में ही भेजूंगी।'
24 सितम्बर, 2017 को जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए ओसियां उपखंड के खुडियाला गांव निवासी गणपत कड़वासरा की वीरांगना ने शुक्रवार शाम जुड़वां पुत्र व पुत्री को जन्म दिया था। दूसरे ही दिन दोनों बच्चों को गोद में लिए और शहीद पति की तस्वीर थामे इस मां ने कहा- इनके (बच्चों के) बड़े होने का इंतजार है, बड़े होते ही सेना में भेजूंगी।
'नहीं भूल सकती, जब तिरंगे में लिपटे आए'
रूपी ने बताया कि 26 सितम्बर, 2017 के उस दिन को कभी नहीं भूल सकती, जब मेरे पति तिरंगे में लिपटकर आए। पति की शहादत से लेकर अब तक के आठ महिने यूं गुजरे, जैसे आठ वर्ष गुजरे हों। समय को गुजारने में मेरे लिए एक-एक पल भारी पड़ रहा था। लेकिन भगवान ने मेरी प्रार्थना सुनकर पति की निशानी के रूप में एक बेटा तो दिया ही, साथ में लक्ष्मी रूप में बेटी से भी गोद भर दी । पूरे परिवार में गत आठ महिनों से पसरा दु:ख का साया वीरांगना द्वारा जुड़वां बच्चों को जन्म देते ही खुशियों में बदल गया।
'मेरा गणपत छोटे रूप में आ गया'
शहीद गणपत की मां बीरोदेवी ने भर्राए गले से भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए कहा- 'मेरा गणपत छोटे रूप में वापस आ गया है।' गत आठ महीनों से मातम में घिरे शहीद गणपत के पूरे परिवार में शुक्रवार को अचानक एेसी खुशियां छा गई, मानो वाकई गणपत ही वापस आ गया। दूसरी तरफ गणपत के घनिष्ठ मित्र धनराज धतरवाल व शहीद गण्पत नवयुवक मंडल के सदस्य गणपत के परिवार की खुशियों में शामिल होकर अस्पताल में अपनी सेवा दे रहे हैं।
'बेटे के साथ बेटी से झोली भर दी
शहीद के पिता पूनाराम ने अपने घर पौत्र व पौत्री के जन्म लेने की खुशी में कहा कि देश ने मेरे बेटे को अपनी सेवा में लिया, प्रतिफल में भगवान ने मुझे उस बेटे के साथ बेटी भी देकर मेरी झोली भर दी। ज्ञात रहे कि शहीद के भाई पुखराज ने मुखाग्नि दी थी । उस अवसर पर सेना के अधिकारी ने पिता पूनाराम को तिरंगा सौंपकर कहा, कि आप पर पूरे देश को गर्व है... आपने अपने लाल को देशसेवा में अर्पित किया है।