06/06/2026
🌿 *“अश्वत्थ वृक्ष (पीपल)… एक संकल्प… एक जीवन यात्रा”*🌿
*आज से चार वर्ष पूर्व, विष्णुप्रयाग की इस पावन धरती पर मैंने एक छोटा-सा अश्वत्थ पौधा रोपा था* । उस समय यह केवल एक आशा थी—प्रकृति के प्रति *मेरा एक छोटा-सा योगदान*।
आज जब इसे एक विकसित वृक्ष के रूप में देखता हूँ, तो इस वृक्ष मे मुझे भगवान की विभूति दिखती है और यह श्लोक याद आता है -
*अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः ( श्रीमद्भगतगीता 10.26)*
*मैं समस्त वृक्षों में अश्वत्थ (पीपल का वृक्ष) हूँ*॥
इस वृक्ष के साथ मैंने समय को बढ़ते हुए देखा है—
*हर नई पत्ती में एक नई शुरुआत,*
*हर शाखा में एक नया विस्तार,*
*और हर छाया में एक नई शांति*
यह वृक्ष हमें सिखाता है कि विकास धैर्य से होता है, सेवा निस्वार्थ होती है, और प्रकृति का साथ ही जीवन का सच्चा आधार है।
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर मैं सभी से निवेदन करता हूँ—
*एक वृक्ष अवश्य लगाएँ, क्योंकि वृक्ष केवल ऑक्सीजन नहीं देते, वे आने वाली पीढ़ियों की आयु, स्वास्थ्य और भविष्य को भी सुरक्षित करते हैं*
*हमारे द्वारा लगाया गया एक छोटा-सा पौधा,कल हमारे बच्चों के लिए छाया बनेगा,और उनके जीवन में शुद्ध वायु और सुखद वातावरण का कारण बनेगा*
*🌱 “आज का एक वृक्ष, आने वाली पीढ़ियों का जीवन है।” 🌱*
॥ जय बदरीविशाल ॥