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समाजवाद ज़िंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद।

09/07/2026
सार्वजनिक बिजली वितरण के समानांतर निजी कम्पनी को लाइसेंस देने के विरोध में उतरी -सीपीआई(एम)केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार...
09/07/2026

सार्वजनिक बिजली वितरण के समानांतर निजी कम्पनी को लाइसेंस देने के विरोध में उतरी -सीपीआई(एम)

केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को मजबूत करने की बजाय निजीकरण के रास्ते को पुख्ता करने में लगी हुई है l
सीपीआई(एम) हरियाणा राज्य कमेटी सार्वजनिक बिजली क्षेत्र के निजीकरण करने का सख्त विरोध करती है और बिजली ऊर्जा जैसी आवश्यक सेवा को बेहतर बनाने की हिमायत करती है l
इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की हरियाणा के नूह व गुरुग्राम राजस्व जिलों के लिए वितरण लाइसेंस प्रदान करने हेतु याचिका एचईआरसी /याचिका संख्या 30 वर्ष 2026, को लेकर सीपीआई(एम) हरियाणा राज्य कमेटी की ओर से राज्य सचिव प्रेम चंद व राज्य कमेटी सदस्य वीरेन्द्र मलिक ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के समक्ष सख्त आपत्ति दर्ज करवाते हुए विभिन्न सुझावों को रखा है l राज्य सचिव कामरेड प्रेम चंद ने प्रेस के नाम विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि विद्युत ऊर्जा जैसी महत्वपूर्ण और वर्तमान समय में आवश्यक सेवा का निजीकरण किया जाना हमारे देश के संविधान की लोक कल्याणकारी अवधारणा तथा उपभोक्ताओं व सेवा प्रदाता कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है, क्योंकि निजी कंपनी का प्रमुख उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है। उससे लोक कल्याण की अपेक्षा नहीं की जा सकती। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की स्थापना उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। उन्होने कहा एचईआरसी से अपेक्षा की जाती है कि आयोग हितधारकों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए इस प्रक्रिया पर रोक लगाएगा।
याचिका में जिस क्षेत्र में समानांतर वितरण प्रणाली प्रस्तावित है उसमें सबसे ज्यादा राजस्व पैदा करने वाला इलाका शामिल है। इसमें भीमकाय उद्योगों समेत हजारों औद्योगिक इकाइयां, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निगमों के मुख्यालय तथा मध्यम व उच्च श्रेणी के रिहायशी इलाके शामिल हैं। इन सभी में विद्युत की मांग और खपत उच्चतम स्तर की है। इसे निजी कंपनी को देने का मतलब सार्वजनिक कंपनी, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, की आमदनी को व्यापक रूप में कम करना होगा l
यह स्पष्ट है कि निजी कंपनी अपने मुनाफे के लिए उपरोक्त दोनों राजस्व जिलों, नूंह व गुरुग्राम, में से अधिकतम राजस्व वसूली वाले इलाकों को ही चुनेगी अर्थात गुरुग्राम उनकी प्राथमिकता रहेगा तथा नूंह उपेक्षित रहेगा। याचिका कर्ता द्वारा लाभ प्रदान करने वाले उपभोक्ताओं को मनमर्जी से चुनने का खतरा निहित है। आयोग ने भी 26 मई के अपने अंतरिम आदेश व संबंधित कार्यवाही में याचिका कर्ता को इस बारे 5 वर्ष की विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा है ताकि उपभोक्ताओं अथवा विशेष क्षेत्र का मनमर्जी से चुनाव न किया जाए और प्रस्तावित आपूर्ति क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति तक सभी की समान व भेदभाव रहित पहुंच सुनिश्चित हो सके। ध्यान रहे की गुरुग्राम का इलाका ऐसा विशेष क्षेत्र है जो न सिर्फ अधिकतम राजस्व प्रदान करता है बल्कि यह कृषि क्षेत्र व घरेलू उपभोक्ताओं के एक हिस्से को क्रॉस सब्सिडी प्रदान करने में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को क्षमता प्रदान करता है। याचिका कर्ता द्वारा इस इलाके का चुनाव रणनीतिक रूप से किया गया है जो सार्वजनिक कंपनी, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, पर विपरीत प्रभाव डालेगा।
हरियाणा का अपना भी पुराना अनुभव है कि जब हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड के ढांचे को पांच कंपनियों में बदल गया तो प्रशासनिक खर्च कई गुना बढ़ गए। एक मुख्य कार्यालय की बजाय पांच मुख्य कार्यालय (कंपनी वार) बने। उसी अनुरूप उच्च अधिकारियों, प्रशासनिक ढांचों व, गाड़ियों आदि की बढ़ोतरी हुई। यह सारा अतिरिक्त वित्तीय खर्च अंततः उपभोक्ताओं तथा सरकार पर ही आया।
अब एक ही इलाके में दो समानांतर वितरण लाइसेंस जारी होने से दो समानांतर प्रशासनिक ढांचे खड़े होंगे। समानांतर बिजली सप्लाई होने से कर्मचारियों के लिए दुर्घटनाओं का खतरा व जोखिम बढ़ जाएगा क्योंकि एक ही इलाके में अलग-अलग जगह से बिजली सप्लाई हो रही होगी। अभी भी कई इलाकों में जहां दो जगह से कनेक्शन लिए गए हैं वहां ऐसी दुर्घटनाएं होती रही हैं। निजी कंपनी मुनाफे के लिए किसी व्यवसाय में आती है। उससे लोक कल्याण की अपेक्षा नहीं की जा सकती । आखिरकार वह लाभ देने वाले उपभोक्ताओं के चयन के साथ-साथ परिचालन लागत काम करने की मंशा से कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ाएगी व उनकी संख्या कम रखेगी, गैर प्रशिक्षित कर्मचारी भर्ती करेगी तथा आउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा आदि की नीतियां अपनाएगी। इन कदमों का विपरीत प्रभाव स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना/ छंटनी के रूप में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम/ हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के कर्मचारियों पर भी पड़ेगा। ऐसा हम पहले कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में देख चुके हैं।
अन्य राज्यों के अनुभव (विशेष कर उड़ीसा व दिल्ली) भी स्पष्ट तौर पर बताते हैं कि ऐसे निजीकरण के कदमों से कहीं पर भी घोषित उद्देश्य पूरे नहीं हुए हैं बल्कि उपभोक्ताओं व सार्वजनिक कंपनियों अथवा सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक भार ही आया है।
सीपीआई(एम) ने कहा है कि
इलैवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की वितरण लाइसेंस की याचिका रद्द की जाए।
और भविष्य में ऐसे मूलगामी परिवर्तन करने से पहले सभी हित धारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाए और इसके लिए यथोचित समय भी दिया जाए।
तथा बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार, यदि कोई किए जाने हैं तो, उनमें सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करना, कर्मचारियों की रोजगार सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों को निजी कंपनियों के मुनाफे की बजाय प्राथमिकता दी जाए।
माकपा ने अपील की है कि कोई भी निर्णय लेने से पहले हमारी इन आपत्तियों को रिकॉर्ड पर लेकर इन पर गंभीरता से विचार किया जाए।
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