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क्या भारतीय वैदिक पंचांग को समझा जा सकता है ?पंचाग जिसे पत्री, तिथिपत्र और जंत्री जैसे नामो से भी जाना जाता है। कोई व्यक...
15/09/2024

क्या भारतीय वैदिक पंचांग को समझा जा सकता है ?

पंचाग जिसे पत्री, तिथिपत्र और जंत्री जैसे नामो से भी जाना जाता है। कोई व्यक्ति चाहे वो जितना भी पढ़ा लिखा हो, परन्तु पंचाग की तिथियों को जानने के लिए वो अपने पंडित पुरोहित का ही सहारा लेता है। परन्तु क्या हम जानते हैं कि अगर पंचाग के बनने के क्रम को अच्छे से समझा जा सके तो इस विक्रम संबत को हम बड़ी आसानी से समझ सकते हैं तथा उपयोग में ला सकते हैं। पंचाग के अनुसार कौन से समय में शुभ कार्य किये जाते हैं और कौन सा समय सुबह कार्य के हिसाब से अच्छा नहीं होता इसे भी बड़ी आसानी से समझा जा सकता है। पंचांग ग्रेगोरियन कैलेंडर से 57 बर्ष आगे चलता है ऐसा क्यों है आइये समझते हैं https://anshhimachali.com/bhartiy-cailender-panchang-kya-hai/

*कैथोलिक चर्च और ऑर्थोडॉक्स चर्च कब और क्यों अलग हुए। कैथोलिक पोप इतने शक्तिशाली कैसे हुए* 1054 में पश्चिमी चर्च और पूर्...
16/08/2024

*कैथोलिक चर्च और ऑर्थोडॉक्स चर्च कब और क्यों अलग हुए। कैथोलिक पोप इतने शक्तिशाली कैसे हुए*

1054 में पश्चिमी चर्च और पूर्वी चर्चों में मतभेद पैदा हुए और वो एक दूसरे से अलग हो गए। इन मतभेदों के क्या कारण थे और ये कैसे पैदा हुए ये सब समझने के लिए हमें पोप कैसे शक्तिशाली हुए ये समझना पड़ेगा। पाकिस्तान बांग्लादेश विभाजन का मुख्य कारण ये था कि बांग्लादेश बांग्ला भाषी था और पाकिस्तान उर्दू भाषी था उसी प्रकार लैटिन और ग्रीस भाषा इन चर्चो के विभाजन का एक कारण था। इसके अलावा https://anshhimachali.com/the-great-schism-in-hindi/

मुस्लिम समाज की जातियाँ जिनके बारे में कभी बात नहीं होती जातिप्रथा भारतीय समाज की एक ऐसी सचाई है जिसे झुठलाया नहीं जा सक...
01/08/2024

मुस्लिम समाज की जातियाँ जिनके बारे में कभी बात नहीं होती

जातिप्रथा भारतीय समाज की एक ऐसी सचाई है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। जातिप्रथा को लेकर समय समय पर भारत में नवीन धर्मो की स्थापना होती रही है और समय समय पर संतो ने जन्म लेकर इसको सुधरने की कोशिश की है अभी भी इस दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं। पर उन समाजों का क्या जो बीमारी को बीमारी मानने को तैयार नहीं। बात करते हैं मुस्लिम समाज की..https://anshhimachali.com/musalmano-mein-bhi-jatiyan-hoti-hain/

पंजाब में दलित सिखों को होना पड़ता है शोषण का शिकार ! सिख धर्म की शुरुआत जातीय भेदभाव को ख़तम करने के लिए हुई थी। परन्तु द...
24/07/2024

पंजाब में दलित सिखों को होना पड़ता है शोषण का शिकार !

सिख धर्म की शुरुआत जातीय भेदभाव को ख़तम करने के लिए हुई थी। परन्तु दलित सिखों को सबसे ज्यादा भेदभाव का शिकार होना पड़ता है। इनके पास अपनी जमीन तक नहीं है और पूरी उम्र ये बंधुआ मजदूर के रूप में काट देते हैं। जातिय भेदभाव के कारण ही पंजाब में डेरों को इतनी कामयाबी मिली है और साथ में..https://anshhimachali.com/sikhon-mein-bhi-jatiyan-hoti-hain/

सत्यनिष्ठा और परम्पराओं से जन्मा एक देश : भारत जिस देश के लोगो के प्रेरणास्त्रोत भगवान् राम हों जिन्होंने अपने पिता के ब...
20/07/2024

सत्यनिष्ठा और परम्पराओं से जन्मा एक देश : भारत

जिस देश के लोगो के प्रेरणास्त्रोत भगवान् राम हों जिन्होंने अपने पिता के बचन के लिए राजकाज छोड़ बन जाना स्वीकार किया। भीष्म जिन्होंने पिता के खुशी के लिए आजीवन अविवाहित रहना स्वीकार किया। जहाँ एक बार के झूठ बोले जाने पर भगवान् ब्रह्मा की पूजा नहीं की जाती है। जहाँ पर एक मित्र कर्ण अपनी मित्रता निभाने के लिए ईश्वर से लड़ गया हो- उस देश के लोगों के बारे में और उनके चरित्र के बारे में समय समय पर आने वाले विदेशी यात्री अपनी पुस्तकों में क्या लिखते है. ....https://anshhimachali.com/videshiyon-ne-bhart-ki-imandari-ke-bare-mein/

भारत के कश्मीर का इतिहास काफी पुराना रहा है। समय समय पर यहाँ पर हिन्दू शासकों, बोद्धो और मुस्लिम का प्रभाब रहा। इसलिए इस...
14/07/2024

भारत के कश्मीर का इतिहास काफी पुराना रहा है। समय समय पर यहाँ पर हिन्दू शासकों, बोद्धो और मुस्लिम का प्रभाब रहा। इसलिए इस स्थान को लेकर सबकी अपनी अपनी कथाएं हैं। बस एक चीज़ जो कॉमन है वो है नाग। नागों की कथा इन सबकी कथाओं में शामिल है। परन्तु ऐतिहासिक तथ्य इसका पूरी तरह से खंडन करते हैं.... https://anshhimachali.com/kashmeer-ko-lekar-hindu-bodh-aur-muslim-manytaeyein/

14/07/2024

अगर कोई सती प्रथा( जिसमे महिलाओं को पति के मरणोपरांत साथ में जिन्दा जला दिया जाता था) रही होगी तो वो सम्पूर्ण भारत में नहीं थी और खासकर उत्तर भारत में नहीं थी।

भारतीय समाज में पुराना रिवाज है विधवा विवाह, बड़े भाई की पत्नी विधवा होने पर देवर के साथ शादी कर देते थे, यदि सभी छोटे भाई शादी शुदा है तो भी किसी एक के साथ शादी कर देते थे , पर छोटे भाई की मृत्यु होने पर नज़दीक के रिश्तेदार, चाचा,ताऊ,मामा ,बुआ का लड़का गोद लेकर उसकी शादी कर उसी घर में बसा लेते थे । यानि जो बहू विवाह करके लाई गई है, उसे ना विधवा होने देते थे ,ना घर से निकालते थे । यह रस्म राजस्थान में चूड़ा पहनाना, हरियाणा में पल्ले लगाना, और पंजाब में चादर डालना कहलाती थी ।

केवल बंगाल और महाराष्ट्र की कुप्रथाओं को सम्पूर्ण भारत की कुप्रथा नहीं कहा जा सकता।

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