22/01/2026
जिला स्तरीय युवा महोत्सव, किरगोली (कांकेर): माताओं की रेला पाटा में सजी संस्कृति और चेतना
जिला स्तरीय युवा महोत्सव, किरगोली (कांकेर) में यायाओं (माताओं) द्वारा प्रस्तुत रेला पाटा ने पूरे वातावरण को भावनात्मक, सांस्कृतिक और प्रेरणादायी ऊर्जा से भर दिया। यह प्रस्तुति केवल लोकनृत्य या परंपरागत गायन तक सीमित नहीं थी, बल्कि मातृशक्ति के अनुभव, संस्कार और सामाजिक संदेशों की सजीव अभिव्यक्ति थी, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के मन को छू लिया।
रेला पाटा के माध्यम से यायाओं ने युवाओं के लिए सामाजिक महत्व और जिम्मेदारी का गहरा संदेश दिया। सामूहिक स्वर, तालबद्ध कदम और अनुशासित प्रस्तुति ने यह दर्शाया कि समाज की नींव माताओं के संस्कारों से ही मजबूत होती है। उनकी वाणी और भाव-भंगिमाओं में सामाजिक एकता, आपसी सहयोग, अनुशासन और सम्मान का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया, जो आज के युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस सुंदर प्रस्तुति में हमारी समृद्ध आदिवासी संस्कृति की आत्मा झलकती दिखाई दी। पारंपरिक वेशभूषा, लोक-ताल और सामूहिक सहभागिता ने यह प्रमाणित किया कि संस्कृति पीढ़ियों को जोड़ने वाली अमूल्य धरोहर है। यायाओं की रेला पाटा ने यह भी सिखाया कि व्यवस्था और मर्यादा केवल नियम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने के सूत्र हैं।
किरगोली (कांकेर) में आयोजित यह जिला स्तरीय युवा महोत्सव माताओं की सहभागिता के कारण और भी विशेष बन गया। उनकी रेला पाटा प्रस्तुति ने युवाओं के मन में युवा चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक गौरव का बीज बोया। निःसंदेह, यह आयोजन यह संदेश देकर गया कि जब मातृशक्ति मार्गदर्शन करती है, तब युवा सही दिशा में आगे बढ़कर एक सशक्त, संस्कारित और संगठित समाज का निर्माण करते हैं।
सेवा जोहार!
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