12/07/2025
शीर्षक
"एक छोटा सा कमरा"
एक छोटे से ....
कमरे में...
मेरी जान बसती थी
वहीं ...
कोने में...
एक श्रृंगार दानी....
जिसके सामने मैं रोज सजती थी
दुल्हन बनकर...
मै पहली बार...
आई थी ...
उस कमरे में
उसकी हर एक चीज को ....
मै बहुत करीने से रखती थी
उसी कमरे में...
मै प्रेम करना सीख पाई थी
वही कमरा ....
जो मेरा था किंतु....
मै पराई थी
उसी कमरे में..
बेटी से बहु बनकर बहुत कुछ सीखा था
वो कमरा....
जिसमें रोकर मै, कई बार हंसती थी
वो कमरा.....
जो मेरी प्रार्थना का वास होता था
जहां हर क्षण मुझे
श्री कृष्ण का आभास होता था
उसी कमरे में...
जीवन के कठिन अनुभव को सीखा था
उसी कमरे में ....खुशियां थी,
उसी कमरे में.... मस्ती थी....
एक छोटे से कमरे में......
मेरी...
जान बसती थी...
'कमल'