27/06/2026
Who was Hussain?
इमाम हुसैन इब्न अली इस्लाम के इतिहास की सबसे सम्मानित हस्तियों में से एक हैं। वे अली इब्न अबी तालिब और फ़ातिमा बिन्त मुहम्मद के पुत्र तथा मुहम्मद के नवासे थे।
उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना कर्बला की लड़ाई है। वर्ष 680 ईस्वी (61 हिजरी) में उन्होंने यज़ीद प्रथम की बैअत (निष्ठा की शपथ) स्वीकार नहीं की, क्योंकि उनके अनुसार शासन न्याय और इस्लामी
सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। इसके बाद कर्बला में इमाम हुसैन और उनके बहुत कम साथियों का सामना यज़ीद की बड़ी सेना से हुआ। 10 मुहर्रम (जिसे आशूरा कहा जाता है) के दिन इमाम हुसैन और उनके अधिकांश साथी शहीद हो गए।
मुसलमानों के लिए उनका महत्व:
सुन्नी मुसलमान उन्हें पैग़म्बर के प्रिय नवासे और महान शहीद के रूप में सम्मान देते हैं।
शिया मुसलमान उन्हें तीसरे इमाम मानते हैं और उनके बलिदान को सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का सर्वोच्च उदाहरण मानते हैं।
इमाम हुसैन का संदेश आज भी सत्य, न्याय, धैर्य और अत्याचार के सामने न झुकने की प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है। इसलिए हर वर्ष मुहर्रम के महीने में दुनिया भर के करोड़ों मुसलमान उनकी शहादत को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते
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