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Thank you Janmaitri Magazine हे प्रिय! बस थोड़ा पढ़ लेना!जब पलकें बोझिल हो जायें अश्रु न जब धीरज रख पायें मौन मुखर होकर ...
17/05/2026

Thank you Janmaitri Magazine

हे प्रिय! बस थोड़ा पढ़ लेना!

जब पलकें बोझिल हो जायें
अश्रु न जब धीरज रख पायें
मौन मुखर होकर जब बोले
शब्द सभी अवकाश मनायें
मुझे स्मरण तब कर लेना
साथ जिएंगे हम उस पल को।
हे प्रिय! बस थोड़ा पढ़ लेना
मेरे इस अंतस्तल को ॥1॥

प्रेम के अनुबंध पर मैं गीत लिखना चाहता हूँ...
09/05/2026

प्रेम के अनुबंध पर मैं गीत लिखना चाहता हूँ...

ग़ज़ल'उदय' वो कैद कर ले या मुझे दीवाना कर डाले।मैं उन नज़रों के जादू और टोने से नहीं डरता।
03/05/2026

ग़ज़ल
'उदय' वो कैद कर ले या मुझे दीवाना कर डाले।
मैं उन नज़रों के जादू और टोने से नहीं डरता।

30/04/2026
28/04/2026

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