18/08/2025
आर्य समाज के संस्थापक #महर्षि_दयानंद_सरस्वती जी के शिष्य #स्वामी_श्रद्धानंद जी ने 1916 में #इंद्रप्रस्थ_गुरुकुल की स्थापना की थी। राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु आदि स्वतंत्रता सेनानी यहां पर कई बार एकत्रित हुए और अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाई। नेताजी सुभाष चंद्र बोस 8 दिनों तक यहां भूमिगत रहे।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भी आर्य विचारधारा से प्रभावित सेनानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
*नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और आर्यसमाज लाहौर*
''सुना है आप देश से बाहर जाकर सेना बना रहे हैं?'' लाहौर आर्य समाज के एक सम्मेलन में महाशय कृष्ण जी ने सुभाष बाबू से पूछा, जो प्रताप अखबार के संस्थापक थे।
''जी।'' नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उत्तर दिया।
''आर्य समाज इसके लिए आपको दस हजार रुपए की थैली तत्काल भेंट करता है।''
''धन्यवाद।''
''धन्यवाद किस बात का नेताजी,'' महाशय कृष्ण जी जो उस समय गुरुकुल कांगड़ी के कुलपति के पद पर भी आसीन थे उन्होंने आगे कहा, ''जब भी आप आह्वान करेंगे, गुरुकुल कांगडी के सभी ब्रह्मचारी आपकी सेना में भर्ती होने के लिए पहुंचे जाएंगे।''
''आर्य समाज तो मेरी मां है, जिसने मुझे पैदा किया,'' सुभाष आगे बोले, ''और आजादी की जंग में जो भी भाग ले रहा है उसका किसी न किसी रूप में आर्य समाज से संबंध अवश्य है, भले ही वह किसी भी मत पंथ से संबंध रखता हो, परंतु दयानंद जी के स्वदेशी के आह्वान का उस पर प्रभाव है ही। क्योंकि स्वामी जी ने ही सबसे पहले कहा था कि स्वेदशी राज्य ही सर्वोपरि उत्तर होता है।''.........
घटना एवं चित्र के लिए देखें
पुस्तक : जीवन संघर्ष, प्रकाशक राजपाल एंड संस, लाहौर
*चित्र : आर्य समाज के सम्मेलन के दौरान नेताजी सुभाष, महाशय कृश्न एवं अन्य आर्य नेता।*
#आर्य_समाज अमर रहे।
गुरुकुल प्रणाली चलती रहे।
वेद की ज्योति जलती रहे।