ICAR- Central Soil Salinity Research Institute

ICAR- Central Soil Salinity Research Institute Institute dedicated to pursue interdisciplinary research on salinity/alkalinity management.

सीएसएसआरआई में गाजर घास पर जागरुकता अभियान का आयोजनकेन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2...
21/08/2026

सीएसएसआरआई में गाजर घास पर जागरुकता अभियान का आयोजन

केन्द्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा दिनांक 21 अगस्त 2026 को गाजर घास जागरुकता सप्ताह के अन्तर्गत जागरुकता अभियान आयोजित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डा. एस. के. सनवाल ने बताया की गाजर घास एक समस्याग्रस्त खरपतवार है जो खाली जमीन जैसे रेलवे लाइन के आस-पास, घरों के आस-पास ने उग जाती है और इसका प्रकोप दिनोंदिन बढता जा रहा है। गाजर घास एक तेजी से फैलने वाला आक्रामक खरपतवार है। मूल रूप से यह उष्णकटिबंधीय अमेरिका से आया माना जाता है, लेकिन भारत में यह बहुत व्यापक रूप से फैल चुका है। यह खाली पड़ी जमीन, रेलवे लाइनों के किनारे, सड़कों के किनारे, घरों के आसपास और खेतों की मेड़ों पर तेजी से उगता है। इसके बीज बहुत हल्के होते हैं और हवा, पानी, वाहनों तथा जानवरों के माध्यम से आसानी से दूर-दूर तक फैल जाते हैं। एक पौधा 25-50 हजार बीज पैदा करने की क्षमता रखता है, जिससे इसका प्रकोप साल-दर-साल बढ़ता जाता है। यह किसी भी प्रकार की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में आसानी से पनप सकता है। इसके सीधे संपर्क में आने से त्वचा पर एलर्जी, खुजली, चकत्ते और डेरमेटाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके परागकण हवा में फैलते हैं, जिनसे अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, छींक आना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। यह खरपतवार फसलों के साथ पोषक तत्वों, पानी, सूर्यप्रकाश और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करता है, जिससे फसल की उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। इसकी जड़ों से एक प्रकार का एलेलोपैथिक रसायन निकलता है, जो आसपास उगने वाली अन्य फसलों और पौधों की बढ़वार को रोकता है। यह पशु चारे के रूप में उपयोगी नहीं है बल्कि पशुओं के लिए भी विषैला हो सकता है, इसलिए चारागाहों में इसकी मौजूदगी पशुपालन के लिए भी नुकसानदायक है। इसके नियंत्रण के लिए समय पर उन्मूलन जरूरी है। फूल आने से पहले ही इसे जड़ से उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि यह बीज न बना सके और आगे न फैले। यांत्रिक विधि सबसे सुरक्षित तरीका है। इसके लिए दस्ताने और सुरक्षा उपकरण पहने जाएं, ताकि त्वचा सीधे संपर्क में न आए। उखाड़ी गई गाजर घास को व्यर्थ न फेंककर कंपोस्ट पिट में सूक्ष्म जैविक मिश्रण और मिट्टी के साथ परतों में भरकर उपयोगी जैविक खाद (कंपोस्ट) में बदला जा सकता है। यह कंपोस्ट भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होता है। संस्थान परिसर को गाजर घास मुक्त बनाने के उद्देश्य से कर्मचारियों ने स्वयं इसे उखाड़कर एकत्रित किया और प्रदर्शन के तौर पर कंपोस्ट पिट में भरकर खाद बनाने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि किसान भी इस विधि को देखकर अपने खेतों में अपना सकें।

मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति का ICAR-CSSRI करनाल में वैज्ञानिकों के साथ संवाद कार्यक्रमकरनाल। मध्य प्रदेश वि...
20/08/2026

मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति का ICAR-CSSRI करनाल में वैज्ञानिकों के साथ संवाद कार्यक्रम

करनाल। मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति के सदस्यों के साथ वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन ICAR-Central Soil Salinity Research Institute (CSSRI), करनाल में किया गया। कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्यों ने संस्थान की वैज्ञानिक गतिविधियों, अनुसंधान कार्यों तथा कृषि एवं मृदा सुधार के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा से श्री जितेंद्र पंडाया (विधानसभा सदस्य), श्री समीर पटेल (नोडल अधिकारी), श्री ठाकुरदास नागवंशी (सभापति एवं विधानसभा सदस्य), श्री शिवनारायण सिंह (विधानसभा सदस्य) तथा श्री महेंद्र रामसिंह यादव (विधानसभा सदस्य) ने भाग लिया।

ICAR-CSSRI, करनाल के निदेशक डॉ. सतीश सनवाल ने सभी समिति सदस्यों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने संस्थान की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कार्यों के बारे में समिति को विस्तार से अवगत कराया।

डॉ. सनवाल ने बताया कि ICAR-CSSRI मुख्य रूप से मृदा लवणता (Soil Salinity), क्षारीय एवं लवण प्रभावित भूमि तथा सिंचाई जल की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अनुसंधान कर रहा है। संस्थान द्वारा लवण प्रभावित एवं जलभराव वाली कृषि भूमि को पुनः उत्पादक बनाने के लिए विभिन्न तकनीकों और वैज्ञानिक उपायों पर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि संस्थान ने लवण प्रभावित मिट्टी एवं जल की परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं एवं धान की विभिन्न उन्नत किस्मों के विकास एवं प्रसार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन किस्मों का उद्देश्य प्रतिकूल मृदा एवं जल परिस्थितियों में किसानों की उत्पादकता और आय को बढ़ाना है।

वैज्ञानिक संवाद के दौरान समिति सदस्यों ने मृदा स्वास्थ्य, लवणता की समस्या, जलभराव, फसल उत्पादन तथा किसानों के लिए विकसित तकनीकों और किस्मों के संबंध में वैज्ञानिकों से जानकारी प्राप्त की। समिति सदस्यों ने कृषि क्षेत्र की जमीनी समस्याओं के समाधान में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संस्थान के कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम के माध्यम से मध्य प्रदेश विधानसभा की कृषि विकास समिति को मृदा लवणता एवं जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ICAR-CSSRI द्वारा विकसित वैज्ञानिक तकनीकों और फसल किस्मों की उपयोगिता से अवगत कराया गया।

ICAR-CSSRI, Karnal was honoured to host a high-level international delegation comprising:H.E. Mr. Sayed Muhammad Aadil A...
05/08/2026

ICAR-CSSRI, Karnal was honoured to host a high-level international delegation comprising:

H.E. Mr. Sayed Muhammad Aadil Ameer Meea, Hon'ble Minister, Ministry of Industrialization, SMEs and Cooperatives, Government of Mauritius
Mr. Raj Kishore Bunjun, Permanent Secretary, Ministry of Industrialization, SMEs and Cooperatives, Government of Mauritius
Mr. Mohammad Zahir Arshaad Hyda, Advisor, Ministry of Industrialization, SMEs and Cooperatives, Government of Mauritius
Dr. Khushnood Ali, Head, AARDO, New Delhi

During the visit, the distinguished delegates interacted with the scientists of ICAR-CSSRI and held insightful discussions on the institute's ongoing research initiatives, innovations, and technologies for the sustainable management of salt-affected soils. The deliberations also explored potential avenues for future collaboration, knowledge exchange, and strengthening international partnerships in the fields of sustainable agriculture, natural resource management, and capacity building.

The visit reaffirmed the shared commitment towards advancing agricultural research and fostering global cooperation for resilient and sustainable farming systems.

On the 98th Foundation Day of  , the staff of ICAR-CSSRI RRS, Lucknow participated in the celebration via video conferen...
16/07/2026

On the 98th Foundation Day of , the staff of ICAR-CSSRI RRS, Lucknow participated in the celebration via video conferencing & later carried out .

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीएआर–केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान क...
16/07/2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीएआर–केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र, हरदोई-II द्वारा स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस समारोह का सजीव प्रसारण देखा गया, जिसमें उपस्थित वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। लाइव प्रसारण के उपरांत पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज नौटियाल सहित डॉ. अंजलि साहू, डॉ. त्रिलोकी सिंह, डॉ. मोहित सिंह, थंगा अनुसया एवं केंद्र के अन्य वैज्ञानिक, कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने आईसीएआर की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए कृषि विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

परिषद की 98वीं स्थापना दिवस पर वृक्षारोपणकेंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 98...
16/07/2026

परिषद की 98वीं स्थापना दिवस पर वृक्षारोपण

केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 98वीं स्थापना दिवस पर संस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मिलकर फार्म प्रक्षेत्र में सफेदा प्रजाति के 100 पौधे लगाए। इस अवसर पर संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर सत्येंद्र कुमार ने सभी को संबोधित करते हुए कहा की वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम “एक पेड़ मां के नाम” कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। पेड़ न सिर्फ वातावरण को स्वच्छ बनाने में मदद करते हैं, बल्कि मृदाओं की उर्वरक क्षमता में बढ़ोतरी करते हैं तथा मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद करते हैं। परिषद की स्थापना दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम परिषद से भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि पिछले 97 वर्ष के इतिहास में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की जिसके कारण देश खाद्यान्न उत्पादन मेंआत्मनिर्भर बन सका। खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ साथ परिषद के वैज्ञानिकों ने दुग्ध उत्पादन, फल एवं सब्जी उत्पादन, मछली उत्पादन तथा अन्य कई क्षेत्रों में देश को विश्व स्तर परअग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर परसंस्थान के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नई दिल्ली से परिषद द्वारा आयोजित स्थापना दिवस कार्यक्रम में ऑनलाइन के माध्यम से जुड़कर भाग लिया तथा विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दिए गए अभिभाषण को सुनकरलाभ उठाया।

Tree plantation on the 98th foundation day of the Council

On the 98th Foundation Day of the Indian Council of Agricultural Research, the staff of Central Soil Salinity Research Institute, Karnal, together planted 100 Eucalyptus variety saplings in the farm field. Addressing the gathering on this occasion, the Acting Director of the Institute, Dr. Satyendra Kumar said that this tree plantation program is being organized under the program "Ek Ped Maa Ke Naam". Trees not only help in cleaning the environment, but also increase the fertility of the soil and help in preventing soil erosion. The tree plantation program on the occasion of the Foundation Day of the Council underlines the emotional connection with the Council.
He said that in the last 97 years of history, the Indian Council of Agricultural Research has achieved many important milestones for the country due to which the country could become self-reliant in food grain production. Along with achieving self-sufficiency in food grains, the scientists of the Council have played an important role in making the country a global leader in milk production, fruit and vegetable production, fish production and in many other areas. On this occasion, the staff of the Institute participated in the Foundation Day program organized by the Council from New Delhi by joining online and got benefited by listening to the speeches given by various dignitaries.

मृदा स्वास्थ्य एवं जल प्रबंधन पर कृषकों के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजनकेंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस...
07/07/2026

मृदा स्वास्थ्य एवं जल प्रबंधन पर कृषकों के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI), क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, लखनऊ एवं एच.सी.एल. फाउंडेशन के सयुंक्त तत्वाधान में पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन संसथान में किया गया। यह कृषक प्रशिक्षण हरदोई जनपद के किसानों के लिए "एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के इनपुट का उत्पादन एवं एकीकृत जल प्रबंधन" विषय पर आयोजित २९ जून से ३ जुलाई के दौरान किया गया। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मकसद इनपुट के डेवलपमेंट और प्रोडक्शन के बारे में प्रैक्टिकल अनुभव और जानकारी देना है। साथ ही, इसमें सोडिक और जल-जमाव वाले इलाकों में खेत पर पानी के मैनेजमेंट, जलवायु के हिसाब से खेती के तरीकों, मिट्टी की सेहत के मैनेजमेंट और टिकाऊ खेती की एडवांस्ड तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्घाटन २९ जून को उत्तर प्रदेश सरकार के सीनियर एडवाइज़र डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में, उन्होंने किसानों की क्षमता बढ़ाने और राज्य में खराब हो चुकी मिट्टी की उत्पादन क्षमता को बनाए रखने में योगदान देने के लिए आयोजकों की कड़ी मेहनत की तारीफ़ की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी पहल के अनुसार खाद का संतुलित इस्तेमाल किया जाना चाहिए और इसके साथ ही विकल्प के तौर पर उपलब्ध विभिन्न ऑर्गेनिक और बायो-इनपुट का भी इस्तेमाल करना चाहिए। गेस्ट ऑफ़ ऑनर के तौर पर मौजूद BBAU, लखनऊ के प्रोफ़ेसर नवीन कुमार अरोड़ा ने फ़ार्म लेवल पर बायोलॉजिकल इनपुट तैयार करने के फ़ायदों पर रोशनी डाली; इससे केमिकल का इस्तेमाल कम होता है और यह पर्यावरण, इंसानों और मिट्टी की सेहत के लिए सुरक्षित होता है। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, लखनऊ के हेड डॉ. ए.के. दुबे ने मेहमानों और किसानों का स्वागत किया और रिसर्च स्टेशन की गतिविधियों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि धान-गेहूं के अलावा, ज़्यादा कीमत वाली फलों की फ़सलों का उत्पादन आय बढ़ाने और संसाधनों के ज़्यादा इस्तेमाल से बचने में मदद कर सकता है। शुरुआत में, ट्रेनिंग प्रोग्राम के प्रधान वैज्ञानिक और कोर्स डायरेक्टर डॉ. संजय अरोड़ा ने प्रैक्टिकल अनुभव के साथ क्षमता निर्माण की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला और कहा कि यह ट्रेनिंग युवा किसानों को अनुभव और वैज्ञानिक जानकारी देगी और फ़ार्म स्तर पर एग्रो-इनपुट के लिए उद्यमिता कौशल विकसित करेगी। एचसीएल फाउंडेशन के सांडी प्रोजेक्ट के लीड डॉ. पंकज औदिच्य ने इस संयुक्त प्रयास के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया और क्षेत्र के किसानों की चुनौतियों और इस 5-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल विशेषज्ञों और ट्रेनिंग प्रोग्राम से उम्मीदों के बारे में संक्षेप में बताया। हरदोई से एचसीएल फ़ाउंडेशन के अधिकारियों और फ़ील्ड कर्मचारियों के साथ कुल 30 किसानों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र का समापन ट्रेनिंग के कोऑर्डिनेटर डॉ. अर्जुन सिंह के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
समापन समारोह ३ जुलाई को आयोजित किया गया जिस में मुख्य अतिथि डॉ संजीव कुमार, उप महा निदेशक उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद्, लखनऊ ने संसथान की इस तरह के कार्यक्रम किसान हित व प्रदेश में जागरूकता के लिए आयोजन के लिए संसथान की सरहाना की।प्रधान वैज्ञानिक डॉ सुनील कुमार झा ने आयोजन में सहयोग करते हुए मंच सञ्चालन किया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. रहमान, डॉ. अनूप कुमार दीक्षित कृषि विज्ञान केंद्र, सीतापुर के अध्यक्ष डॉ. दया श्रीवास्तव एवं एचसीएल के श्री तौफीक अहमद, अजाज आलम, राहुल एवं राकेश कुमार मौजुद रहे।

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interacti...
07/07/2026

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interaction meeting with ATAPI foundation on 30th June 2026, in Samoj village, Jambusar taluka of Bharuch district of Gujarat. About 55 farmers participated in this program. Women from self help group also participated in the programme. Farmers were informed about the purpose of this Abhiyan, about our institute and its mandate, workings, soil health management and soil testing, balance use of fertilizer, integrated nutrient management, crop rotation, natural farming, soil sampling and other aspect of sustainable farming. Person from ATAPI foundation provide knowledge of natural farming and kitchen garden to the women. Constraints and difficulties faced by the farmers were also discussed and suggested possible solutions.

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interacti...
07/07/2026

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interaction meeting with ATAPI foundation on 30th June 2026, in Nahar village, Jambusar taluka of Bharuch district of Gujarat. About 55 women farmers from Padhiyar self help group participated in this program. Farmers were informed about the purpose of this Abhiyan, about our institute and its mandate, workings, soil health management and soil testing, balance use of fertilizer, integrated nutrient management, crop rotation, natural farming, soil sampling and other aspect of sustainable farming. Person from ATAPI foundation provide knowledge of natural farming and kitchen garden to the women. Constraints and difficulties faced by the farmers were also discussed and suggested possible solutions.

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interacti...
07/07/2026

ICAR-Central Soil Salinity Research Institute, Regional Research Station, Bharuch organized a Scientist-Farmer Interaction meeting with collaboration in ATAPI foundation on 29th June 2026, in Bhodar village, Jambusar taluka of Bharuch district of Gujarat. About 67 farmers participated in this program. Farmers were informed about the purpose of this Abhiyan, about our institute and its mandate, workings, soil health management and soil testing, balance use of fertilizer, integrated nutrient management, crop rotation, natural farming, soil sampling and other aspect of sustainable farming. The person came from ATAPI foundation gave information about natural farming to the farmers. Constraints and difficulties faced by the farmers were also discussed and suggested possible solutions.

Address

Central Soil Salinity Research Institute, Kachhwa Road
Karnal
132001

Opening Hours

Monday 9:30am - 5pm
Tuesday 9:30am - 5pm
Wednesday 9:30am - 5pm
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