26/06/2026
प्रिय किसान भाइयों एवं बहनों,
सादर नमस्कार।
हम पहले भी आपसे आग्रह कर चुके हैं कि आज खेती-किसानी लगातार कठिन होती जा रही है। किसान और खेतिहर मजदूर दोनों बढ़ती लागत और महंगाई के दोहरे दबाव में हैं। खेती में उपयोग होने वाली लगभग हर चीज़ महंगी हो चुकी है, लेकिन कृषि उपज के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है।
आज किसान जिन बढ़ती लागतों का सामना कर रहा है, उनमें प्रमुख हैं—
बीज की कीमतें
डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की लागत
कीटनाशक एवं खरपतवारनाशक दवाइयाँ
डीजल और पेट्रोल
बिजली एवं सिंचाई का खर्च
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और कृषि यंत्रों का किराया
मजदूरी
परिवहन और मंडी तक फसल पहुँचाने का खर्च
इन सबके बावजूद अधिकांश फसलों का लाभकारी मूल्य किसानों को नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप किसान कर्ज़ के बोझ तले दबता जा रहा है।
हम आपसे एक बात कहना चाहते हैं—आप सबसे पहले किसान हैं, उसके बाद किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक या कार्यकर्ता। किसानों के हित का प्रश्न किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज का प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि हम सभी किसान संगठित होकर अपनी आवाज़ लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से बुलंद करें। इसके लिए गाँव-गाँव बैठकों का आयोजन किया जाएगा, किसानों से सुझाव लिए जाएंगे, ज्ञापन दिए जाएंगे, और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन की अनुमति के साथ शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन तथा रैली जैसे लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि हमारी समस्याएँ सरकार और समाज तक प्रभावी ढंग से पहुँच सकें।
शीघ्र ही इस विषय पर विस्तृत रणनीति बनाकर आप सभी को सूचना दी जाएगी।
आइए, एकजुट हों, संगठित हों और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें।
"एकता ही किसान की सबसे बड़ी ताकत है।"
आपका साथी
विजय पटेल