08/05/2026
#सन्यासी_विद्रोह के साथ भारत की गुलामी के खिलाफ विद्रोह का पहला शंखनाद #बंगाल से आरंभ हुआ। नियति का खेल देखिए...समय चक्र घूम कर फिर #बंगाल की धरती पर आकर खड़ा हुआ है। एक नई यात्रा के लिए।
#जो_रहेगा_साथ_उसी_का_विकास का गगनभेदी नारा लेकर। कोई छुपाव नहीं! कोई संकोच नहीं! कोई आत्महीनता नहीं!
सत्ता संघर्ष में आज भी भारत का बहुसंख्य समाज #आत्महीनता के दलदल में फंसा हुआ है। बौद्धिक पराधीनता से आज भी स्वतन्त्र नहीं। चिंता छोड़िए अब...बंगाल का बौद्धिक एक बार फिर #भगवा हो चुका है। बंकिम बाबू के "आनन्दमठ" का भगवा धारण कर लिया है। छक्के छुड़ा देगा वामपंथी और मजहबी तालिमशुदा बुद्धिजीवियों की।
लेकिन याद रखिएगा, Suvendu Adhikari , Himanta Biswa Sarma और Yogi Adityanath...! ये सभी एक ही कोख से निकले हैं, इनको पाला-पोसा, जमीन तैयार की...एक व्यक्ति ने। जिसने ंधकार में रास्ता बनाया। जिसने हताशा के रसातल में जाकर प्राण फूंके। एक ही नाम Narendra Modi है वह।
निसन्देह अंतिम शक्ति तो #प्रभु_श्रीराम हैं। उनकी कृपा बिना ना नरेंद्र बनते हैं ना सुवेन्दु आते। स्तुति #व्यक्ति की नहीं, #राजा_राम की कीजिए। समवेत स्वर में।