Maa Narmada

Maa Narmada the Narmada is one of the five holy rivers of India

The source of the Narmada is a small bowl, known as the Narmada Kund, located at Amarkantak on the Amarkantak hill[8] (1,057 m (3,467.8 ft)), in the Anuppur District zone of the Shahdol of eastern Madhya Pradesh

05/06/2026

हर हर महादेव काशी विश्वनाथ 🙏💕

05/06/2026
विश्व पर्यावरण दिवस के मौक़े पर राहुल गांधी ने निकोबार पर अपनी डॉक्यूमेंटरी रिलीज़ की। इसमें राहुल गांधी ने इस बात पर ज़...
05/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस के मौक़े पर राहुल गांधी ने निकोबार पर अपनी डॉक्यूमेंटरी रिलीज़ की। इसमें राहुल गांधी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का रक्षा रणनीति से लेना देना नहीं है, लेकिन ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला ज़रुर है।
https://youtu.be/dpYuGZx_ogo?si=ijH6QvyTZkI02zS5

2011 से 2026 तक का सफ़र....टाइम मैग्ज़ीन का ये कवर 2011 का है। इसे ध्यान से देखिए। कवर में इंडिया वर्सेस चीन लिखा है, ची...
05/06/2026

2011 से 2026 तक का सफ़र....
टाइम मैग्ज़ीन का ये कवर 2011 का है। इसे ध्यान से देखिए।
कवर में इंडिया वर्सेस चीन लिखा है, चीन वर्सेस भारत नहीं।
भारत को एक हाथी के तौर पर दिखाया गया है, जो आकार में बड़ा है। ड्रेगन छोटा है।
सन् 2011 में दुनिया भारत को इसी रूप में देख रही थी। हालाँकि चीनी अर्थव्यवस्था तब भी हमसे चार गुना बड़ी थी। मगर दुनिया हमें डेमोक्रेटिक पॉवर हाऊस के रूप में देख रही थी और हमारे डेमोग्रेफिक डिविडेंड पर भी नज़र थी। वह मान रही थी कि भारत चूँकि लोकतांत्रिक देश है और उसके पास युवाओं की तादाद ज़्यादा रहेगी इसलिए वह बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा और चीन से भी आगे निकल सकता है।
यानी दुनिया उम्मीद के साथ भारत को देख रही थी। मैं ये नहीं कहता कि तब का भारत स्वर्ग था। तमाम ख़ामियाँ थीं, ग़ैर बराबरी बढ़ रही थी, किसान आत्महत्याएं कर रहे थे, करप्शन बढ़ रहा था और कार्पोरेट सत्ता पर हावी होने को बेक़रार था।
लेकिन तभी घोटालों के आरोपों की बाढ़ आ गई। अन्ना का आंदोलन हुआ। मीडिया बढ़-चढ़कर हमले करने लगा और पूरे संघ परिवार ने इसे एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा और भुनाने लगा।
फिर हुआ ये कि तरक्की का सिलसिला टूट गया। तीन-चार साल की अफ़रा-तफ़री और फिर एक ऐसे व्यक्ति और पार्टी का सत्ता पर कब्ज़ा हुआ जिसे न डेमोक्रेसी से मतलब था, न डेमोग्रेफिक डेविडेंड की समझ थी।
अर्थव्यवस्था का साथ खेल शुरू हो गया। नोटबंदी, जीएसटी, क्रोनी कैपिटलिज्म, राजनीतिक हिंसा और नफ़रत, संवैधानिक संस्थाओं का पतन, चुनाव चोरी।
आज हम आर्थिक सुनामी के कगार पर खड़े हैं। बरबादी साफ़ दिख रही है। पंद्रह साल में हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए हैं।

05/06/2026
05/06/2026

"विद्याविनीतो राजा हि प्रजानां विनये रतः ।
अनन्या पृथिवीं भुङ्क्ते सर्वभूतहिते रतः ॥"

अर्थात - "विद्या और विनय से युक्त राजा, जो प्रजा को भी अनुशासित एवं सदाचारी बनाता है तथा सबके हित में लगा रहता है, वह स्थिर और समृद्ध राज्य का अधिकारी बनता है ।"

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