18/09/2025
जहाँ अँधेरा गहराता है, वहीं से उजाला निकलता है
एक छोटा-सा गाँव था – धूप गाँव।
गाँव के बच्चे रात होते ही पढ़ाई छोड़कर सो जाया करते थे। लालटेन की कमजोर रोशनी में उनकी आँखें थक जातीं और किताबों के अक्षर धुंधले पड़ जाते। सपनों पर भी जैसे अँधेरा छा जाता था।
उसी गाँव में एक छोटी-सी लड़की आरती रहती थी। वह पाँचवीं कक्षा में पढ़ती थी और उसका सपना था कि बड़ी होकर शिक्षिका (टीचर) बने। लेकिन जैसे ही शाम होती, अँधेरा उसे किताबों से दूर कर देता।
एक दिन स्कूल में नई अध्यापिका आईं – अनामिका मैम। उन्होंने देखा कि बच्चे अक्सर अधूरा होमवर्क लाते हैं। पूछने पर आरती ने सच-सच बताया –
“मैम, अँधेरे में पढ़ाई नहीं हो पाती…”
अगले ही हफ़्ते अनामिका मैम गाँव में सौर ऊर्जा वाले लैम्प लेकर आईं। उन्होंने गाँववालों को समझाया –
“ये लैम्प सूरज की रोशनी से चार्ज होते हैं और रात को बिना बिजली के उजाला देंगे।”
अब जब भी रात होती, अँधेरा बच्चों को रोक नहीं पाता। आर्टी की किताबें खुलतीं और उसके सपने जाग उठते। धीरे-धीरे गाँव के सभी बच्चे फिर से पढ़ने लगे।
सालों बाद जब आरती सचमुच शिक्षिका बनी, तो उसने अपने स्कूल की दीवार पर एक पंक्ति लिखवाई –
✨ “जहाँ अँधेरा गहराता है, वहीं से उजाला निकलता है।” ✨