13/01/2023
GST रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाले आवेदक इन बातों/प्रोसेस को ध्यान में रखें :-
सबसे पहले यह देख लीजिए कि आवेदक के पैन कार्ड और आधार कार्ड के विवरण, जैसे कि नाम, जन्मतिथि, पिता/पति का नाम, लिंग आदि में कोई अंतर न हो। अधिकतर अंतर नाम के स्पेलिंग और जन्म तिथि में ही पाए जाते हैं।
फिर यह चेक कर लीजिए कि आधार के साथ मोबाईल नंबर जुङा हुआ है कि नहीं?
फिर यह देखिए कि आधार से जुङा हुआ मोबाईल नंबर, आवेदक के पास इस्तेमाल में चालू हालत में है कि नहीं?
अगर जुङा हुआ मोबाईल नंबर अब आवेदक के पास इस्तेमाल में नहीं है या आधार के साथ कोई मोबाईल नंबर ही जुङा हुआ नहीं है तो किसी बैंक/डाकघर/प्रज्ञाकेन्द्र/सुविधाकेन्द्र, जहाँ पर ये सुविधा उपलब्ध हो, वहाँ जाकर आवेदक को अपना इस्तेमाल होने वाला मोबाईल नंबर, अपने आधार से जोङवा लेना चाहिए।
बाद में, जीएसटी निबंधन आवेदन सबमिट करते समय, आधार से जुङे इसी मोबाईल नंबर पर ओटीपी आता है, जिसे आवेदन में इन्ट्री करना होता है। इससे आवेदन के आधार authentication का प्रोसेस पूरा हो जाता है।
अब जीएसटी निबंधन के लिए ऑनलाईन आवेदन करना आरंभ कर सकते हैं। आवेदन में सभी विवरण सही-सही भरा जाए।
आवेदन के क्रम में, आवेदक के आधार से जुङे मोबाईल नंबर पर ओटीपी आएगा, इसे ऑनलाईन आवेदन में इन्ट्री कर देना है। इससे आवेदन के आधार authentication का प्रोसेस पूरा हो जाता है।
ऑनलाईन आवेदन सबमिट करने पर यह सबसे पहले जीएसटी के सर्वर पर जाता है।
वहाँ पर कम्प्यूटर द्वारा ऑटोमैटिक आवश्यक कार्रवाई करते हुए इस ऑनलाईन आवेदन को, सेन्टर जुरीडिक्शन या स्टेट जुरीडिक्शन के किसी एक प्रोपर ऑफिसर के पास सीधे ऑनलाईन भेज दिया जाता है। कौन-सा आवेदन सेन्टर जुरीडिक्शन में जाएगा और कौन-सा स्टेट जुरीडिक्शन में- यह सब ऑटोमैटिक तरीके से जीएसटी सर्वर के साॅफ्टवेयर द्वारा तय किया जाता है। इसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं है। आवेदक भी यह तय नहीं कर सकते कि उनका आवेदन सेन्टर या स्टेट जुरीडिक्शन में से किनके ऑफिसर के पास जाएगा और न ही ऑफिसर यह तय कर सकते हैं।
AADHAAR के रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर पर आए ओटीपी से Authenticated, जीएसटी निबंधन आवेदन के सरकारी कार्यालय में प्रोपर ऑफिसर के पास प्रोसेसिंग के लिए 10 वर्किंग डे का अधिकतम समय-सीमा होता है।
परन्तु, AADHAAR authentication न होने पर, जीएसटी निबंधन आवेदन के प्रोसेसिंग की यही समय-सीमा बढ़कर 30 वर्किंग डे हो जाती है।
आवेदन के प्रोसेसिंग का मतलब है- आवेदन को पहली बार देखा जाना। अगर प्रोपर ऑफिसर को आवेदन और साथ में ऑनलाईन अपलोड किए हुए कागजात, पूरी तरह सही लगते हैं, तो वे प्रोसेसिंग कर आवेदन को एप्रूव करते हैं।
अगर प्रोपर ऑफिसर को आवेदन में या अपलोड किए हुए कागजात में कोई कमी लगती है तो उसी कमी को लिखित में दर्शाते हुए, आवेदन में क्वेरी कर उसे आवेदक को ऑनलाईन ही वापस कर देते हैं। इसे क्वेरी करना कहते हैं।
अप्रूवल हो या क्वेरी हो- ये दोनों में से कोई एक प्रोसेसिंग निर्णय, निर्धारित 10 वर्किंग डे की समय-सीमा में होना 100% तय है।
अगर किसी भी कारण से प्रोपर ऑफिसर निर्धारित समय सीमा में अपना निर्णय नहीं लेते हैं, तो उस रात समय सीमा पूरी बीतने पर ऑटोमैटिक तरीके से आवेदन ऑटो अप्रूव्ड हो जाता है और जीएसटी रजिस्ट्रेशन हो जाता है। मतलब साफ है कि निर्धारित समय सीमा से अधिक कोई भी आवेदन जस-का-तस/अनिर्णित नहीं रह पाता है।
क्वेरी होने पर आवेदन, आवेदक के पास वापस चला जाता है। अब इनके पास क्वेरी का जवाब/कंप्लायंस करने के लिए 7 वर्किंग डे का समय-सीमा होता है। इस बीच ही, आवेदक को अपना जवाब ऑनलाईन दे देना होता है।
क्वेरी का ऑनलाईन जवाब दे देने पर, ऑनलाईन आवेदन फिर से उन्हीं प्रोपर ऑफिसर के पास ऑर्डर के लिए आ जाता है। इसपर ऑर्डर करने के लिए प्रोपर ऑफिसर के पास 7 वर्किंग डे का समय-सीमा निर्धारित है। अगर किसी कारणवश प्रोपर ऑफिसर इस बीच ऑर्डर नहीं करते हैं तो निर्धारित समय-सीमा पूरी बीतने पर उस रात आवेदन ऑटोमैटिक तरीके से ऑटो अप्रूव्ड हो जाता है।
अगर निर्धारित समय-सीमा में आवेदक क्वेरी का कोई जवाब नहीं देते हैं तो समय-सीमा पूरी बीतने पर आवेदन, बिना जवाब के ही उसी प्रोपर ऑफिसर के पास ऑटोमैटिक वापस हो जाता है।
बिना जवाब के वापस लौटे आवेदन को बाध्य होकर रिजेक्ट किया जाता है।
जबकि क्वेरी के जवाब के साथ वापस आए ऑनलाईन आवेदन की प्रोपर ऑफिसर फिर से जाँच करते हैं। जवाब सही पाए जाने पर आवेदन को अप्रूव्ड करते हैं।
पर जवाब सही नहीं पाए जाने पर रिजेक्ट करते हैं। रिजेक्ट करते समय इसका कारण भी लिखते हैं।
रिजेक्ट होने पर, फिर से सही-सही नया आवेदन किया जा सकता है।
ध्यान देने वाली बात है कि पहली बार जब ऑनलाईन आवेदन प्रोसेसिंग होता है, तब वह अप्रूव्ड हो सकता है या उसमें क्वेरी हो सकती है। पर पहली बार में प्रोसेसिंग के समय यह रिजेक्ट नहीं होता है।
ठीक इसी तरह, क्वेरी के बाद जब आवेदन दुबारा प्रोपर ऑफिसर के पास आता है तो तब यह अप्रूव्ड हो सकता है या रिजेक्ट हो सकता है। पर कभी भी दुबारा इसमें क्वेरी नहीं हो सकती है।
आवेदक द्वारा बिना आधार authentication के सबमिट किए गए ऑनलाईन आवेदन की प्रोसेसिंग की समय-सीमा 10 वर्किंग डे के बजाए, 30 वर्किंग डे होती है। साथ ही, इन मामलों में प्रोपर ऑफिसर किन्हीं दुसरे समकक्ष या जूनियर ऑफिसर को फिल्ड विजिट के लिए नामित करते हैं। तब ये दुसरे ऑफिसर, आवेदन में दिए गए पते पर जाँच के लिए जाते हैं। जाने से पहले, वे आवेदक को जाँच के तारीख और समय की ऑनलाईन सूचना देते हैं, ताकि तय समय पर आवेदक वहाँ मौजूद रहें। जाँच के बाद वे अपनी रिपोर्ट ऑनलाईन तरीके से उसी प्रोपर ऑफिसर को देते हैं। तब इसके बाद प्रोपर ऑफिसर आगे की कार्रवाई उसी तरह करते हैं, जैसे बाकी आवेदनों का होता है। इस फील्ड विजिट और रिपोर्टिंग को पूरा करने के लिए प्रोसेसिंग की समय-सीमा 10 के बजाए 30 वर्किंग डे की दी जाती है।
जिन आवेदनों में आधार authentication किया रहता है, उनमें प्रोपर ऑफिसर फील्ड विजिट का निर्णय ले सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन दे देने के बाद भी, प्रोपर ऑफिसर फील्ड विजिट का निर्णय ले सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन के बाद, ऑनलाईन आवेदन में बताए गए पते पर व्यवसाय संचालित नहीं पाया गया तो ऐसे में उसे non existing पाकर उसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाता है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस समय आधारित है, मतलब इसके हर स्टेप के लिए एक अधिकतम समय-सीमा तय की हुई है। उस निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक कोई भी आवेदन पेंडिंग नहीं रहता है।
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के इस प्रोसेस की पूरी जानकारी न होने पर किसी-किसी आवेदक को लग सकता है कि उनका आवेदन पेंडिंग पङा हुआ है। जबकि हकीकत यह है कि कोई भी आवेदन निर्धारित समय-सीमा से अधिक पेंडिंग रह ही नहीं सकता है।