09/11/2025
कथा वसूली चांसलर की-18
कुलपति-त क्षति भूषण दास जब कुलपति बन कर आए थे तो शुरुआत में एकदम मासूम ऐकडेमिशियन टाइप फिल देते थे, पूरे विश्वविद्यालय को ये विश्वास दिला दिए कि मैं भले कॉमर्स डिपार्टमेंट का हूं लेकिन ज्ञान हर विषय का है, क्या इंजीनियरिंग, क्या साइंस, क्या आर्ट्स, क्या सोशल साइंस, क्या लेंग्वेजेज और क्या रिसर्च एंड डेवलपमेंट,
सेक्रेड गेम में नवाजुद्दीन सिद्धकी के 'अहम ब्रह्माश्मि' वाले डायलॉग को एकदम चरितार्थ कर दिए।
इनफैक्ट सभी वेदों के ज्ञाता भी, गीता, रामायण और महाभारत ऐसा कंठस्थ की पूछिए मत।
जैसे ही ज्ञान विश्वविद्यालय के बंजर जमीन और एडमिन के दिवालों में प्लांट हुआ, वैसे ही क्षति भूषण दास जी ने अपने फड़कती भुजाओं के मुट्ठियों से अपने कुलपति से कुलपति-त में बदलने का रौद्र रूप धारण कर लिया और फिर चतुराई का कलम चलाना शुरू कर दिया और अपनी उड़िया लॉबी को अपने पुष्पक विमान में बैठाकर, विश्वविद्यालय के फर्जी पदाधिकारियों के बल पर बिहार, झारखण्ड और यूपी वाले कर्मचारियों को आपस में लड़ाना शुरू कर दिया।
कर्मचारी भी ऐसे की जो-जो फर्जी थे तो कार्यवाही के डर के मारे एकदम वीसी ऑफिस के सामने 90 डिग्री पर झुककर कुलपति-त साहब तुस्सी ग्रेट हो, तोहफा कबूल करो" का नारा देकर आशीर्वाद ले लिए।
और क्या फिर शुरू हुआ लुट-पाट का नंगा नाच।
लेकिन बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती और बड़े बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है न कि बुरे कर्म का किया धरा एक न एक दिन किसी न किसी रूप में सामने आता ही है, तो कुलपति-त क्षति भूषण दास अपने ऐकडेमिक जीवन में भी काफी रंगीन विचार लेकर काम किए हैं बहुत से साफ सुथरे और अच्छे ऐकडेमिक लोगो को परेशान किए हैं और फंसाए हैं,
उसी में से एक उड़िया प्रो भुवन सी महापात्रा हैं जो इनकी बेटा, बेटी, दामाद के फर्जी नियुक्ति, को लेकर हर जगह अपने मेल आईडी से कंप्लेन किए हैं, लेकिन कुलपति-त क्षति भूषण दास के फर्जी सिपहसालारों में से एक एजुकेशन विभाग के हैवी टाइप के प्रोफेसर है तपन कुमार बसंतीया बहुत हैवी इतना हैवी की जैसे राजनीति में पप्पू यादव हैवी सांसद हैं, ये भाई साहब क्या किए की मेल पढ़े और भागे भागे अपने मालिक कुलपति-त क्षति भूषण दास के पास पहुंचे की मालिक ऐसे कैसे आपको कोई बोल सकता है, बोलिए तो मैं उसे जवाब दूं, मालिक तो यही चाहता था बस दबाव देकर मेल का रिप्लाई करा दिया, जिस हिसाब से बसंतीया ने मेल का रिप्लाई दिया उसे पहली बार में ही पढ़कर कोई भी ये समझ जाएगा की ये आदमी को पढ़ने-लिखने का कोई दूर-दूर तक का लेना देना नहीं है, इससे बेहतर मेल ड्राफ्ट तो क्लास 10 का बच्चा भी कर लेगा, जिस हिसाब से लालू यादव अपने भाषणों में बोलता है उस हिसाब से इसने रिप्लाई दिया,
बसंतीया का फोकस सिर्फ एक प्वाइंट पर था कि राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा तो कौन बनेगा, यानी फर्जी ही क्यों न हो कुलपति-त क्षति है भूषण दास की बेटी और दामाद न बनेगा तो फिर कौन बनेगा।
(अच्छा बसंतीया भी एक नंबर का कुकर्मी है, साउथ बिहार में जब एसोसिएट था तो इसने एक छात्रा को मेंटली और फिजिकल हरास किया था, जिसके कारण से उस स्टूडेंट ने सुसाईड अटेम्प्ट किया था, अच्छा इतने पर भी इसके कुकर्म की हरकतें नहीं सुधरी यहां जब क्षति भूषण दास ने इसके कुकर्मों को मेडल देकर इसे प्रोफेसर नियुक्त किया तो यहां भी एजुकेशन विभाग की एक प्रोफेसर ने इस पर मेंटल हरास का केस किया लेकिन क्षति भूषण दास ने अपने कुर्सी का दुरुपयोग करके इस मामले को दबा दिया तो बसंतीया के इस टाइप के काले कारनामे हैं)
और फिर उधर से प्रो साहब इनको रगड़ दिए कि मैंने आर टी आई से
मूल और संशोधित पात्रता की कॉपी, शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू अंक, चयन समिति की बैठक का रिकॉर्ड और सभी उम्मीदवारों की योग्यता जी पुष्टि,
के प्वाइंट पर जवाब मांगा है।
मतलब एकेडमिक महाभारत के युद्ध के मैदान में इस बार पांडव और कौरव सब उड़िया ही हैं, जैसे जैसे सर्दी चढ़ेगी ये ऐकडेमिक युद्ध और रोचक होता जाएगा खैर कुलपति-त क्षति भूषण दास जी को सर्दी की बर्फ बारी बहुत ही रोमांचित करती है और इस बार पूरा परिवार के साथ सरकारी खर्च पर साउथ कोरिया जाएंगे और किम जोंग के साथ स्नो-बॉल खेलेंगे।