01/01/2024
अपील अपील अपील
दोस्तो आप सभी को मालूम है कि हसदेव अरण्य जंगल के 50,000 पेड़ो को अडानी के कोयला खदान के लिए अभी हाल ही में काट दिए गए।
हसदेव अरण्य तीन राज्यों के जंगलों को जोड़ता है। एक छोर मध्य प्रदेश के कान्हा जंगल से जुड़ी हुई तो दूसरा छोर झारखंड के पलामू तक फैला हुआ है। छत्तीसगढ़ में यह जंगल कोरबा, सरगुज़ा और सूरजपुर जिलों में फैला है। इसी क्षेत्र में हसदेव नदी भी बहती है। हसदेव जंगल इस नदी के कैचमेंट एरिया में है। हसदेव नदी पर बना मिनी माता बांगो बांध से बिलासपुर, जांजगीर-चाम्पा और कोरबा के खेतों और लोगों को पानी मिलता है। इस जंगल मे हाथी समेत 25 वन्य प्राणियों का रहवास और उनके आवागमन का क्षेत्र है। करीब 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर में फैला यह जंगल अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां गोंड, लोहार और ओरांव , पहाड़ी कोरवा जैसी आदिवासी जातियों के 10 हजार लोगों का घर है। 82 तरह के पक्षी, दुर्लभ प्रजाति की तितलियां और 167 प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं जिनका अस्तित्व के खतरें में है।
परसा ईस्ट केते बासेन खदान के लिए कुल 1136 हेक्टेयर जंगल काटा जाना है जिसमे से 137 हेक्टेयर के पेड़ काटे जा चुका है। इसके साथ ही परसा कोल ब्लॉक के 1267 हेक्टेयर यानी लगभग 9 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इससे वन्य जीवों और वनस्पति के साथ हसदेव नदी का केचमेंट भी प्रभावित होगा ।
अडानी और उनके शुभचिंतकों को इससे कोई फर्क नही पड़ता ?????????
"हसदेव अरण्य" का विनाश रोकना ही होगा!!!
आइए दिनांक 02/01/2023 दिन मंगलवार सुबह 11:30 बजे कलेक्टर कार्यालय के सामने मानव शृंखला बना कर हसदेव बचाने हम सभी कंधे से कंधा मिला कर हसदेव के नाश को रोकने का संदेश जिम्मेदारों तक पहुंचाएं।
जय हिंद।
#हसदेव_जंगल_बचाओ