11/12/2025
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में गरीबी, मज़दूरी और भरोसे का सबसे बड़ा शोषण तब होता है जब कोई संगठन “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” जैसे पवित्र नारे को ढाल बनाकर ठगी का साम्राज्य खड़ा कर ले।
पे टू सोशल फ़ाउंडेशन नाम की संस्था ने ठीक यही किया — और किया सुनियोजित तरीके से।
ठगी का तरीका – गरीबों को निशाना बनाया गया
इस संस्था के संचालक #प्रभु दयाल शर्मा, निवासी दौसा (राजस्थान) ने दावा किया था कि वे प्रदेश की हर बेटी को
जन्म के समय,पढ़ाई के दौरान,और शादी के समय
₹1,100 से लेकर ₹1,00,000 तक की आर्थिक सहायता देंगे।
इस सुनहरे झांसे में डालकर उनके प्रतिनिधियों ने गांव–गांव जाकर गरीब मज़दूर परिवारों से ₹550 रजिस्ट्रेशन शुल्क वसूला।
यदि कुल वसूली का अनुमान लगाया जाए तो राशि 400 करोड़ रुपये से अधिक पहुँचती है — जो एक सामान्य ठगी नहीं बल्कि राज्यस्तरीय आर्थिक अपराध है।
संस्था के तथाकथित “फील्ड ऑफिसर”, “लीडर” और “एजेंट” अपने आपको सरकारी अधिकारी जैसा बताकर लोगों को यह भ्रम देते थे कि:
इन्हें भारत सरकार NITI Aayog से पंजीकरण (Registration) मिला है,
यह सरकारी योजना है,
और बेटियों के विवाह में लाखों की सहायता निश्चित है।
ये सारे दावे झूठ थे—एक सोचा–समझा षड्यंत्र। गरीब परिवारों को किया गया शिकार
मज़दूरी करके गुज़ारा करने वाले, जिनके घरों में सालों से बेटियों की पढ़ाई और शादी का सपना बोझ बनकर पड़ा है,
उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर इस संस्था ने ठगी का जाल बिछाया।
लोगों ने अपने दिन भर की कमाई,
कभी बकरा बेचकर,कभी गहने गिरवी रखकर 550 रुपये जमा करवाए —
क्योंकि उन्हें अपनी बेटी के भविष्य की उम्मीद दिखाई गई थी।
लेकिन यह उम्मीद नहीं,संगठित लूट का कुचक्र था। यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, अपराध है
इस पूरे मामले पर को चाहिए कि:
1. EOW (आर्थिक अपराध शाखा) से जांच करवाए। संस्था के संचालक प्रभु दयाल शर्मा और उसके पूरे नेटवर्क पर
धारा 420 (धोखाधड़ी) 406 (विश्वासघात) 467–468 (फर्जीवाड़ा)
120B (षड्यंत्र)
और बड़े आर्थिक अपराधों की धारा में FIR दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी करे।
जिन एजेंटों ने गांव–गांव जाकर लोगों को धोखा दिया, उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो।
गरीब परिवारों से वसूली गए पैसे की रिकवरी कर पीड़ितों को वापस दिलवाई जाए।
राजस्थान सरकार से हमारी सीधी मांग की #बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” भावनात्मक नारा है। किसी भी संस्था को इस नारे का राजनीतिक या आर्थिक फायदा लेने का अधिकार नहीं।
इसलिए इस ठगी पर तुरंत हस्तक्षेप आवश्यक है —
ताकि
राजस्थान के गरीब परिवारों को न्याय मिले
और भविष्य में कोई भी संस्था इस तरह सामाजिक भावनाओं का दुरुपयोग न कर सके।
Rajasthan Police l Chandra Shekhar Aazad