Shree Sita Ram Charitable Trust

Shree Sita Ram Charitable Trust सभी जरूरत मंदों की सेवा के लिए इस ट्रस?

29/06/2022

सभी साथियो को जय श्री सीता राम..............................

ट्रस्ट की वेबसाइट
26/05/2022

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 An amazing team of regulars and part-time volunteers are committed to helping others. We take our convictions and turn them into action. Think you would be a good fit? Get in touch for more information 

जय श्री सीताराम आप सब को,राम जन्म में एक अदभुत संयोग हुआ। राम जी को संपूर्ण विश्व में सम्मान मिला, इनकी मंदिर बनायी गई औ...
21/04/2022

जय श्री सीताराम आप सब को,
राम जन्म में एक अदभुत संयोग हुआ। राम जी को संपूर्ण विश्व में सम्मान मिला, इनकी मंदिर बनायी गई और भरत जी को राम जी के ठीक समान रूप मिला । वास्तव में जब मनु जी और सतरूपा जी के तप से प्रसन्न होकर भगवान जी आए और वरदान मागने को कहा, तब मनु जी ने बड़े संकोच में, सतरूपा जी से वरदान मांगने को कहा। जिस पर बहुत संकोच कर के सतरूपा जी ने भगवान हरि जी से कहा कि कोई आप जैसा पुत्र मुझे अगले जन्म में प्राप्त हो। तब भगवान हरि जी ने सतरूपा जी से कहा कि संपूर्ण सृष्टि में मेरे जैसा कोई है नहीं, तब मनु जी ने कहा की आप ही पुत्र रूप में मेरे घर जन्म ले लीजिये। क्यों की तपस्या दोनो की थी और दोनो को वरदान मिलना था। तब अगले जन्म व्‍यवस्‍था में दशरथ जी द्वारा आयोजित पुत्र यज्ञ के संपूर्ण होने पर जो पायस अग्नि देव जी ने कौशल्या जी को दिया तो पहले पायस का दो भाग किया गया जिससे राम जी और राम जी के ठीक समान भरत जी का रूप मिला। इसके बाद दो भागो का फिर से दो दो भाग किया गया, जिससे राम जी के भाग से लक्ष्मण जी और भरत जी के भाग से शत्रुघ्न जी का अवतार हुआ। वैसे तो चारो भाई धर्म ध्वज थे परंतु राम जी के साथ लक्ष्मण जी और भरत जी के साथ शत्रुघ्न जी हमेशा रहे। इतिहास गवाह है, आज व्यक्ति राज करता है संबन्धित राज्य में, तब भी जनता को सुख और समृद्धि नहीं मिलती परंतु अवध राज्य में 1 या 2 नहीं, पूरे 14 वर्ष तक राम जी की खड़ाउ ने राज किया और भरत जी, जो कि राम जी की प्रतिमूर्ति थे, भरत जी अपने प्रतिनिधि रूप, सेवक भाव में इतने सक्रिय थे कि लोग दुखी होंगे तो मैं राम जी आने के बाद उन्हे क्या मुंह दिखाऊगा और वे दिन रात जन सेवा में लगे रहे। यह है राम जी के समय की ऐतिहासिक घटना जो उसके पहले न कभी हुई थी और न भविष्य में कभी होगी। इसी अनुकरणीय घटना वृत्तांत के साथ, सब को एक बार फिर से जय श्री सीता राम ………

जय श्री सीता राम आप सभी को,जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब भगवान धर्मोत्थान के लिए जन्म लेते हैं। भगवान राम और माता सी...
20/04/2022

जय श्री सीता राम आप सभी को,
जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब भगवान धर्मोत्थान के लिए जन्म लेते हैं। भगवान राम और माता सीता जी का जन्म धर्म की स्थापना के लिए हुआ था। इतने महत्वपूर्ण कार्य में कोई संकट ना आए, इसलिए सभी देवी देवता विभिन्न रूपों में राम जी की सहायता के लिए जन्म लिए थे। ऐसे में, जिन शिव और शक्ति के बिना कोई कार्य संभव नहीं है, वो निर्विघ्न रूप से राम जी की सेवा में, एक रूप होकर, भगवान महाबली और बुद्धि की खान के रूप में, जन्म के साथ-साथ, भूलोक में निवास करने के लिए, राम जी और सीता जी के आशीर्वाद से हैं। पुण्य कार्य में बहुत बाधा आती है। जैसे लक्ष्मण जी पर शक्ति का प्रहार, तब हनुमान जी ने संकट काटा, दोनो भाईयों का नागपाश में बधने पर, हनुमान जी ने संकट काटा, अहिरावन बलि के लिए ले गया, तब हनुमान जी ने संकट काटा। इसी तरह हनुमान जी, जिस प्रकार धर्म स्थापना में संकट मोचक के रूप में रहे, उसी प्रकार धर्म के पुनरुत्थान के समय भी और हमारी आप की रक्षा के लिए भी, आज भी हैं। ये शिव और शक्ति के एकरूप हैं, इसीलिए इनकी शक्ति और बुद्धि की कोई सीमा नहीं है। राम जी और सीता जी के परम भक्त होकर हनुमान जी ने यह सिद्ध किया कि कोई कितना भी बलशाली या बुद्धिमान क्यू न हो, उसे सदैव धर्म की शरण में गुमान रहित होकर रहना चाहिए। इसी सात्विक विचार और अपेक्षा के साथ, एक बार फिर से, सब को जय श्री सीता राम …………………

आज सीता-राम नाम की महिमा पर चर्चा करते हैं - स्वर और व्यंजन के अक्षरांक के आधार पर देखा जाए तो र का अक्षरांक 27, आ का अक...
19/04/2022

आज सीता-राम नाम की महिमा पर चर्चा करते हैं - स्वर और व्यंजन के अक्षरांक के आधार पर देखा जाए तो र का अक्षरांक 27, आ का अक्षरांक 2, म का अक्षरांक 25, स का अक्षरांक 32, ई का अक्षरांक 4 और त का अक्षरांक 16 है। इस प्रकार राम के अक्षरांक का योग 54 और सीता के अक्षरांक का योग 54 होता है। इससे यह प्रमाणित होता है कि राम-राम या सीता-राम या सीता-सीता के अक्षरांकों का योग (54+54=108) होगा। अत: किसी भी मंत्र के 108 बार जप करने पर जितना पुण्य हमे मिलता है, उतना ही पुण्य, मात्र राम-राम या सीता-राम या सीता-सीता का जप करने पर हमे मिलता है। अन्य किसी भी धर्म के, किसी भी ईष्ट के नाम के अक्षरांकों का योग न तो 54 है और न ही 108 है। इसीलिए राम-राम या सीता-राम को महामंत्र कहा गया है। अत: इससे यह भी प्रमाणित होता है कि जिनके बारे में आज हमारी वर्तमान पीढ़ी को सिखाया जाता है कि वे संत, महात्मा, भिक्षुक या जगतगुरु थे, वास्तव में वे प्राचीन वैज्ञानिक ही थे। विज्ञान का मतलब ही होता है विशिष्ट ज्ञान। दूसरी तरफ़ इससे यह भी प्रमाणित होता है कि राम और सीता एक समान हैं। इनके बीच में, लिंग भेद के अतिरिक्‍त, किसी भी प्रकार का कोई अंतर नहीं है, दोनो एक समान हैं। इसलिए सभी पुरुषो को सदैव मन में राम-राम का जप और सभी स्त्रियो को सदैव मन में सीता-सीता का जप करते रहना चाहिए। जिस भी घर, परिवार, ग्राम, शहर या देश के स्त्री-पुरुषो के आचार-विचार ऐसे हो जाए, उसे, सर्वोत्तम उन्नति से, कोई रोक नहीं सकता। इसी शुभ आशा और विश्वास के साथ सब साथियो को राम-राम, सीता-राम..........

18/04/2022

जय श्री सीता राम साथियो,

विज्ञान और धर्म परस्पर संबंधित सिद्धांत हैं। हमारे प्राचीन ऐतिहासिक व्यक्तित्व इसे अच्छी तरह जानते थे। जिनके बारे में आज...
17/04/2022

विज्ञान और धर्म परस्पर संबंधित सिद्धांत हैं। हमारे प्राचीन ऐतिहासिक व्यक्तित्व इसे अच्छी तरह जानते थे। जिनके बारे में आज हमारी पीढ़ी को सिखाया जाता है कि वे संत, महात्मा, जगतगुरु थे, वास्तव में वे प्राचीन वैज्ञानिक थे और प्राचीन भारत का विज्ञान आज की तुलना में बहुत आगे था। आज विज्ञान और धर्म के अंतर्संबंध को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। इस मामले में यह समझा जा सकता है कि विज्ञान अच्छा छात्र है लेकिन बुरा शिक्षक है। इसका मतलब है कि विज्ञान एक अच्छा हथियार है लेकिन हथियार का उपयोगकर्ता नहीं है। विज्ञान के दुरूपयोग के अनेक उदाहरण हैं, दूसरी ओर संसार में सभी प्रकार की उन्नति विज्ञान से ही संभव हुई है। जैसा कि मुझे लगता है कि हमें विज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग प्रकृति के साथ-साथ जीवों के कल्याण के लिए करना चाहिए, विनाश के लिए नहीं। प्राचीन भारत के हमारे महान व्यक्तित्व वैज्ञानिक सिद्धांतों के अच्छे उपयोग को जानते थे इसलिए शांति और प्रगति दोनों थी। दुर्भाग्य से आज हम पाश्चात्य संस्कृति के अनुयायी हैं और अपनी संस्कृति और धर्म को छोड़ने का दुष्परिणाम पा रहे हैं। इसलिए गहरी नींद से जागना बहुत जरूरी है, मतलब बुरे रास्ते से अच्छे रास्ते की ओर आना। दुनिया की नई पीढ़ी सर्वोच्च व्यक्तित्व के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बहुत आगे हो, यह हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है और हमें इसके लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। मुझे लगता है कि यह हमारी अगली पीढ़ी के प्रति मुख्य जिम्मेदारी है। शुभकामनाओं के साथ, जय श्री सीता राम साथियो..........................................

16/04/2022

सब साथियो को एक बार फिर से श्री हनुमान जी के जन्म दिवस की बधाई............

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