23/08/2026
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
बिटिया ने पूछा कि पापा आरक्षण क्या होता है ?
मैंने कहा,शोषित गरीब वर्गों को सहारा देने वाली व्यवस्था जिसमें उन्हें सरकारी नौकरी में विशेष छूट दी जाती है ,
बेटी बोली,पापा गरीब तो आप भी थे ..दादा जी विकलांग थे ..दो बीघा ज़मीन थी ..आपने तो किसी का शोषण नहीं किया ..किसी दलित का अपमान नहीं किया,सबसे दोस्ती की ..सबके यहाँ का खाना खाया,,सबको घर पे खिलाया..ज़मीन नहीं क़ब्ज़ायी..किसी को मारा पीटा नहीं फिर आपने कैसे सर्वाइव कर लिया …
मैंने कहा मेहनत से ..क़ाबलियत से..लगन से ..प्रायवेट शिक्षक रहा ..प्रायवेट प्रिंसिपल बना और साथ में कविता कवि सम्मेलन करता रहा और घर चलता रहा …
बेटी बोली,तो पापा मुझे भी मिलेगा आरक्षण ..
मैंने कहा नहीं ..तुम्हें अपनी मेहनत और प्रतिभा से ही इस समाज में जीवित रहने का प्रयास करना होगा क्यों की तुम्हारा जन्म एक अभागे सवर्ण के यहाँ हुआ है ।।
😔