The Natures Alarm

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कल दिनांक 12/03/2026 को   #निःशुल्क  #नेत्र_शिविर स्थान   #श्रीमती_ज्योति_सर्वेश_वर्मा  #सभासद_ईदगाह_के_घर_के_पास पी के ...
11/03/2026

कल दिनांक 12/03/2026 को
#निःशुल्क #नेत्र_शिविर
स्थान #श्रीमती_ज्योति_सर्वेश_वर्मा #सभासद_ईदगाह_के_घर_के_पास पी के इंटर कॉलेज के पीछे लखीमपुर में
#सीतापुर_आँख_अस्पताल द्वारा निः शुल्क नेत्र शिविर का आयोजन
#संदीप_वर्मा_पूर्व_अध्यक्ष_छात्र_संघ
#सदस्य_जिला_पंचायत_खीरी द्वारा किया जा रहा है कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि #रामपाल_सिंह_यादव जिला अध्यक्ष समाजवादी पार्टी लखीमपुर द्वारा किया जाएगा व अतिथि के रूप में आकाश गुप्ता जिला उपाध्यक्ष सपा, अशोक वर्मा विधानसभा अध्यक्ष रियाजुला खान नगर अध्यक्ष सपा उपस्थिति रहेंगे।
आप सभी नगरवासियों से अनुरोध है जिनको आँखो की दिक्कत है वह अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी साथ में लेकर आए । निःशुल्क नेत्र शिविर का संयोजन
#यूथ_डेवलपमेंट_सोसाइटी लखीमपुर खीरी ने किया है

Happy New Year 2026
31/12/2025

Happy New Year 2026

जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, जब इंसान का नामो-निशान तक नहीं था, तब  #अरावली पर्वत खड़ा हुआ कहा जाता है, आज से लगभग 20...
22/12/2025

जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, जब इंसान का नामो-निशान तक नहीं था, तब #अरावली पर्वत खड़ा हुआ
कहा जाता है, आज से लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले, धरती की कोख फटी, और अरावली जन्मा।
यह कोई साधारण #पहाड़ नहीं था, यह धरती की ढाल था, राजस्थान का रक्षक था।
समय बदला, राजे आए, साम्राज्य मिटे, रेगिस्तान फैलने को आतुर हुआ
#रेगिस्तान फैलने को आतुर हुआ लेकिन अरावली चट्टान बनकर खड़ा रहा। इसने आँधियों को रोका, बाढ़ को थामा, ज़मीन के नीचे पानी को ज़िंदा रखा।
आज वही अरावली खामोश होकर सवाल पूछ रहा है।
अगर मेरी ऊँचाई 100 मीटर से कम है, तो क्या मेरी ज़रूरत भी कम हो गई?
आज कहा जा रहा है, छोटे पहाड़ काटे जा सकते हैं। लेकिन कोई ये नहीं पूछता कि ये छोटे पहाड़ ही हमें बचाते हैं।
ये पहाड़ न हों तो रेगिस्तान शहरों को निगल जाएगा, पानी सूख जाएगा, हवाएँ ज़हर बन जाएँगी।
अरावली कहता है, मैं ऊँचा नहीं, लेकिन अमर हूँ। मैं बूढ़ा हूँ, पर कमजोर नहीं।
जो पहाड़ करोड़ों सालों से खड़ा है, वो आज मशीनों से डर रहा है।
अगर आज हमने अरावली को खो दिया तो आने वाली #पीढ़ियाँ पूछेंगी तुम्हें बचाने वाला था, फिर तुमने उसे क्यों नहीं बचाया?
अगर आज हमने अरावली को खो दिया तो आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी तुम्हें बचाने वाला था, फिर तुमने उसे क्यों नहीं बचाया?
#अरावली #पर्वतमाला #रेगिस्तान #राजस्थानगौरव

यह तस्वीर हसदेव रेंज की हृदयविदारक सच्चाई को बयां करती है जहां कभी घने जंगल पक्षियों की चहचहाहट और हवाओं की सरसराहट से ज...
22/12/2025

यह तस्वीर हसदेव रेंज की हृदयविदारक सच्चाई को बयां करती है जहां कभी घने जंगल पक्षियों की चहचहाहट और हवाओं की सरसराहट से जीवंत थे, वहीं अब खनन की भेंट चढ़कर धरती मां उदास और निराश हो गई है।

कटे हुए पेड़ों की व्यथा मानो चीख रही है:
"हम सांस थे तुम्हारी, छांव थे तुम्हारी,
अब कोयले की भट्टी में जलकर राख हो गए।
हमारी जड़ें रो रही हैं, हमारी शाखें टूटकर गिर रही हैं,
इंसान की लालच ने हमें चुप करा दिया।"

2015 की हरियाली देखकर दिल भर आता है, और 2025 की यह बंजर जमीन आंखों में आंसू ले आती है।
प्रकृति की यह पुकार है – हमें जगाओ, बचाओ, नहीं तो हम सबकी सांसें रुक जाएंगी। 😔🌳

यह दृश्य सिर्फ जंगल का नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन, हाथियों के घर और हमारी धरती की आत्मा का नुकसान है। कितना दर्द है इस बदलाव में...

फोटो- छत्तीसगढ़ डायरीज

आज मैंने अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर   अभियान से जुड़ने का संकल्प लिया है।यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस नई और चिंताजनक...
19/12/2025

आज मैंने अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर अभियान से जुड़ने का संकल्प लिया है।
यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि उस नई और चिंताजनक परिभाषा के विरुद्ध शांत लेकिन दृढ़ विरोध है, जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को ‘अरावली’ मानने से इंकार किया जा रहा है।

मैं आप सभी से अपील करती हूँ कि अपनी DP बदलकर इस जन-अभियान का हिस्सा बनें और प्रकृति के पक्ष में अपनी आवाज़ बुलंद करें।

अरावली के संरक्षण से जुड़े ये बदलाव उत्तर भारत के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं। यह फैसला केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व के लिए भी खतरा है, क्योंकि—

1️⃣ मरुस्थल और लू के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा कवच

अरावली कोई साधारण पर्वतमाला नहीं, बल्कि कुदरत द्वारा बनाई गई एक मज़बूत ‘ग्रीन वॉल’ है।यह थार रेगिस्तान की रेत और तपती हवाओं को दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी यूपी की ओर बढ़ने से रोकती है।
यदि छोटी-छोटी पहाड़ियों को खनन के लिए खोल दिया गया, तो रेगिस्तान हमारे शहरों के दरवाज़े तक पहुँच जाएगा और लू का प्रकोप कई गुना बढ़ जाएगा।

2️⃣ प्रदूषण के खिलाफ ढाल

अरावली और इसके जंगल NCR व आसपास के क्षेत्रों के ‘फेफड़े’ हैं।ये धूल भरी आंधियों को रोकते हैं और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
आज अरावली की मौजूदगी के बावजूद हालात इतने गंभीर हैं, तो इसके बिना स्थिति कितनी भयावह होगी—इसकी कल्पना भी सिहरन पैदा करती है।

3️⃣ भूजल और जैव विविधता की जीवनरेखा

अरावली उत्तर भारत का एक प्रमुख भूजल रिचार्ज ज़ोन है।इसकी चट्टानें वर्षा जल को भूमि के भीतर समाहित कर जलस्तर बनाए रखती हैं।
यदि ये पहाड़ियाँ नष्ट हुईं, तो आने वाली पीढ़ियाँ पीने के पानी के भीषण संकट से जूझेंगी, वन्यजीव विलुप्ति के कगार पर पहुँचेंगे और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाएगा।

🔬 वैज्ञानिक सच्चाई यह है कि अरावली एक निरंतर पर्वत श्रृंखला है।इसकी छोटी पहाड़ियाँ भी उतनी ही आवश्यक हैं जितनी ऊँची चोटियाँ।
दीवार में एक भी ईंट कम हुई, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था ढह जाती है।

📢 हमारी विनम्र अपील:
हम केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट से आग्रह करते हैं कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस परिभाषा पर पुनर्विचार करें।
अरावली को ऊँचाई या मापदंडों से नहीं, बल्कि उसके पर्यावरणीय योगदान और पारिस्थितिक प्रभाव से आँका जाए।

👉 आज DP बदलें, अरावली बचाएँ।
क्योंकि अरावली बचेगी, तभी हमारा भविष्य बचेगा।


ना-उम्मीदी कुफ्र है,ज़िंदगी कहीं से भी शुरू हो सकती है.!
27/08/2025

ना-उम्मीदी कुफ्र है,
ज़िंदगी कहीं से भी शुरू हो सकती है.!

पृथ्वी की धुरी झुकी: वजह बना भूजल का अत्यधिक दोहन! एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि पृथ्वी के भीतर से अत्यध...
14/06/2025

पृथ्वी की धुरी झुकी: वजह बना भूजल का अत्यधिक दोहन!

एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि पृथ्वी के भीतर से अत्यधिक भूजल (Groundwater) निकालने के कारण पृथ्वी की घूमने की धुरी में लगभग 80 सेंटीमीटर (31.5 इंच) का झुकाव आ गया है यानी जिस कल्पित रेखा पर पृथ्वी घूमती है वो अब धीरे-धीरे खिसक रही है।

अध्ययन में क्या कहा गया?
* यह स्टडी दिसंबर 2024 में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Geophysical Research Letters में प्रकाशित हुई थी।
* इसमें 1993 से 2010 के बीच के सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया गया।
* अनुमान लगाया गया कि मानव ने इस अवधि में लगभग 2150 गीगाटन भूजल को जमीन के नीचे से बाहर निकाला ये इतना पानी है कि जिससे करीब 6 मिलीमीटर वैश्विक समुद्र स्तर बढ़ा!

यह कैसे काम करता है?
* भूजल निकालना = भार का पुनर्वितरण: जब बड़ी मात्रा में पानी जमीन से बाहर निकाला जाता है, वह फिर समुद्रों में पहुँच जाता है। इससे पृथ्वी पर भार का संतुलन बिगड़ता है।
* पृथ्वी की परिक्रमा-अक्ष (rotational axis) चेंज होती है: जब पृथ्वी का द्रव्यमान एक हिस्से से हटकर दूसरे हिस्से में चला जाता है तो घूर्णन अक्ष थोड़ी-थोड़ी सी बदलती रहती है ठीक उसी तरह जैसे वॉशिंग मशीन असंतुलित हो जाती है।
* पोल वॉबलिंग (Pole Wobble): यह घटना उसी का परिणाम है जिसे “polar wander” या “Earth’s wobble” कहा जाता है।

इसके परिणाम क्या हो सकते हैं?
* जलवायु और मौसम पैटर्न पर असर: घूर्णन अक्ष में परिवर्तन से जलवायु की पट्टियों में हल्की लेकिन स्थायी शिफ्ट हो सकती है।
* GPS और सैटेलाइट सिस्टम पर प्रभाव: जो सटीक निर्देशांक पृथ्वी की धुरी से जुड़े होते हैं,वे थोड़े बदल सकते हैं,जिससे नेविगेशन सिस्टम को समय-समय पर कैलिब्रेट करना पड़ेगा।
* पृथ्वी की स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रश्न: यह साबित करता है कि मानव गतिविधियाँ भी ग्रह के भौतिक संतुलन को बदल सकती हैं।

क्या यह पहली बार हो रहा है?
1990 के दशक से पृथ्वी की धुरी में बदलाव रिकॉर्ड किए जा रहे हैं,लेकिन यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने "भूजल दोहन" को इस बदलाव की मुख्य वजह के रूप में पहचाना है।

भविष्य की दिशा क्या होनी चाहिए?
सस्टेनेबल वॉटर मैनेजमेंट:
* अत्यधिक बोरवेल दोहन को रोकना
* वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) को बढ़ाना
* भूजल रिचार्ज ज़ोन बनाना

ग्लोबल निगरानी:
* GRACE जैसे सैटेलाइट मिशन से भूजल और द्रव्यमान परिवर्तन की ट्रैकिंग बढ़ानी चाहिए।

नीतिगत परिवर्तन:
* सरकारों को भूजल दोहन पर नियंत्रण के लिए कानून सख्त करने होंगे।

निष्कर्ष
इस अध्ययन से ये बात साफ़ होती है कि इंसानी गतिविधियाँ केवल पर्यावरण ही नहीं,बल्कि पूरे ग्रह की संरचना और संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। अगर अब भी हम नहीं चेते,तो हमें पृथ्वी पर रहने के लिए खुद उसकी बुनियादी भौगोलिक स्थिरता को खतरे में डालना पड़ सकता है।

हैदराबाद बाद में 400 एकड़ कट रहे 🌲🌳  #जंगल का  #राजा🦁  #इंसानों से मांग रहा अपनी  #प्रजाओं की  #जिंदगी की  #भीख 🥺🙏🙏
07/04/2025

हैदराबाद बाद में 400 एकड़ कट रहे 🌲🌳 #जंगल का #राजा🦁 #इंसानों से मांग रहा अपनी #प्रजाओं की #जिंदगी की #भीख 🥺🙏🙏

09/03/2025

Save Nature
Save world

02/03/2025

#लखीमपुर_खीरी
चंदनचौकी में गिरे ओले, मौसम हुआ ठंडा, फसलों को भी नुकसान होने की संभावना।

28/01/2025

The Nature

05/11/2024

The nature's Lover


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