09/06/2026
वीर वैरागी बंदा बलिदान दिवस
9 जून कविता डॉ प्रवीणभाई तोगड़िया
वीरता की वह अमर कहानी, भारत जिसका गान करे,
धर्म रक्षा के उस प्रहरी को, शत-शत हिंदुस्तान नमन करे।
संन्यासी जीवन त्याग दिया, जब धर्म पुकार कर आया था,
गुरु गोविंद सिंह के आशीष से, वीर बंदा रण में छाया था।
खालसा सेना के महान सेनानी, अन्याय से जो टकराए थे,
मुगलों के अत्याचारों के विरुद्ध, सिंह गर्जन बनकर आए थे।
जिस सरहिंद की दीवारों में, गुरु पुत्रों को जीवित चुना गया,
वही सरहिंद 1710 में, बंदा वीर द्वारा जीत लिया गया।
सोनीपत के निकट खंडा में, सैन्य मुख्यालय बनाया था,
धर्म और स्वाभिमान बचाने को, रणभेरी का स्वर गूंजाया था।
पहला स्वतंत्र सिख राज्य रचकर, इतिहास नया लिख डाला था,
अन्याय, अत्याचार और भय को, वीरता से ललकारा था।
दिल्ली में क्रूर अत्याचार हुए, पुत्र का बलिदान दिखलाया गया,
चार वर्ष के बेटे को मारकर भी, उनका साहस न झुक पाया।
यातनाओं की अग्नि में तपकर, अमर बलिदानी कहलाए वे,
धर्म नहीं छोड़ा, सत्य न छोड़ा, इतिहास के दीपक बन गए वे।
धर्म हेतु जो रण में उतरे, उन वीरों के वंशज महान हैं,
हरियाणा का वैरागी समाज, उनकी गौरवमयी पहचान है।
ऐसे वीर वैरागी बंदा को, कोटि-कोटि श्रद्धा अर्पण है,
उनके अद्भुत त्याग, तपस्या और बलिदान को शत-शत वंदन है।
वीर वैरागी बंदा अमर रहें!
धर्म, वीरता और बलिदान अमर रहें! 🙏🏻
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