03/04/2015
किसी मज़ार पर एक फकीर रहते थे।सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे। उन भक्तों में एक बंजारा भी था।वह बहुत गरीब था,फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता,फकीर की सेवा करता,औरफिर अपने काम पर जाता,उसका कपड़े का व्यवसाय था,कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक गलियों में फेरी लगाता,कपड़े बेचता।एक दिन उस फकीर को उसपर दया आ गई,उसने अपना गधा उसे भेंट कर दिया।अब तो बंजारे की आधी समस्याएं हल हो गईं।वह सारे कपड़े गधे पर लादता और जब थक जातातोखुद भी गधे पर बैठ जाता।यूं ही कुछ महीने बीत गए,,एक दिन गधे की मृत्यु हो गई।बंजारा बहुत दुखी हुआ,उसने उसे उचित स्थान पर दफनाया,उसकी कब्र बनाईऔरफूट-फूट कर रोने लगा।समीप से जा रहे किसी व्यक्ति नेजब यह दृश्य देखा,तो सोचाजरूर किसी संत की मज़ार होगी।तभी यहबंजारा यहां बैठकर अपना दुख रो रहा है।यह सोचकर उस व्यक्ति ने कब्र परमाथा टेका और अपनी मन्नत हेतु वहां प्रार्थना की कुछ पैसे चढ़ाकर वहां से चला गया।कुछ दिनों के उपरांत ही उसव्यक्ति की कामना पूर्ण हो गई। उसनेखुशी के मारे सारे गांव मेंडंका बजाया कि अमुक स्थान पर एक पूर्ण फकीर की मज़ार है।वहां जाकर जो अरदास करो वह पूर्ण होती है। मनचाही मुरादे बख्शी जाती हैं वहां।उस दिन से उस कब्र परभक्तों का तांता लगना शुरू हो गया।दूर-दराज से भक्त अपनी मुरादे बख्शाने वहां आने लगे।बंजारे की तो चांदी हो गई,बैठे-बैठे उसे कमाईका साधन मिल गया था।एक दिन वही फकीरजिन्होंने बंजारेको अपना गधा भेंट स्वरूपदिया था वहां से गुजर रहे थे। उन्हें देखते ही बंजारे ने उनके चरण पकड़ लिए और बोला-"आपके गधे नेतो मेरी जिंदगी बना दी। जब तक जीवित थातब तक मेरे रोजगार में मेरी मदद करता थाऔरमरने के बादमेरी जीविका का साधन बनगया है।"फकीर हंसते हुए बोले,"बच्चा!जिस मज़ारपर तू नित्य माथा टेकने आता था,वह मज़ार इस गधे की मां की थी।"बस यूही चल रहा है मेरा भारत महान । Incredible India