04/08/2026
LIC का विनिअंशकरण (Disinvestment): देश और आम जनता के लिए एक गंभीर चेतावनी!
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) केवल एक वित्तीय संस्थान या कंपनी नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों के भरोसे, उनकी गाढ़ी कमाई और सामाजिक सुरक्षा की रीढ़ है। लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा लिए गए फैसले ने एक बार फिर देश की इस ऐतिहासिक संपत्ति के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
3 अगस्त 2026 को सरकार द्वारा LIC में 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए 2.5% हिस्सेदारी (4% ग्रीनशू विकल्प के साथ कुल 6.5% तक) बेचने की घोषणा की गई है। इससे पहले मई 2022 में भी IPO के माध्यम से 3.5% हिस्सेदारी घटाई जा चुकी है। SEBI के 10% न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का हवाला देकर इस निर्णय को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह फैसला केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि देश के सार्वजनिक क्षेत्र के पीछे हटने का एक बड़ा उदाहरण है।
देश और समाज पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव:
राजकोषीय घाटे को भरने के लिए 'देश की संपत्ति' की बिक्री: स्थायी राजस्व जुटाने, नया निवेश आकर्षित करने या रोजगार पैदा करने में नाकामी के बाद, सरकार अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) की भरपाई के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को बेच रही है। चालू वित्त वर्ष में ही सार्वजनिक क्षेत्र के 7 उपक्रमों से ₹21,000 करोड़ से अधिक की हिस्सेदारी बेची जा चुकी है। यह नीतियां देश की बुनियादी संपत्तियों को बेचने जैसा है।
पॉलिसीधारकों और आम जनता के हितों पर चोट: LIC ने हमेशा देश के दूर-दराज के इलाकों तक जीवन बीमा पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण की योजनाओं में आम जनता की बचत का निवेश करने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। इसमें सार्वजनिक स्वामित्व के कमजोर होने से भविष्य में आम जनता और पॉलिसीधारकों के दीर्घकालिक हित प्रभावित होंगे।
शेयर बाजार के हवाले राष्ट्र की धरोहर: LIC भारत के लोगों की संपत्ति है, न कि केवल शेयर बाजार का हिस्सा। धीरे-धीरे हो रहा यह निजीकरण देश के समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एक बड़ा झटका है।
इसी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, 'ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज एसोसिएशन' (AIIEA) ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और 5 अगस्त 2026 को देशव्यापी भोजन-अवकाश (Lunch-Hour) प्रदर्शन का आह्वान किया है।
समय आ गया है कि हम सभी सोचें!
सार्वजनिक क्षेत्र और LIC का सार्वजनिक चरित्र हमारे देश के विकास की नींव है। देश के इस महत्वपूर्ण स्तंभ को बचाने के लिए नीतिगत फैसलों पर विचार करना बेहद जरूरी है।