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सीपीआईएम उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय में कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत को उनके स्मृति दिवस पर याद किया गया।
01/08/2026

सीपीआईएम उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय में कामरेड हरकिशन सिंह सुरजीत को उनके स्मृति दिवस पर याद किया गया।

01/08/2026

10 अगस्त, 2026 को आयोजित सत्याग्रह एवं जेल भरो आंदोलन को सीपीआईएम का समर्थन

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उ.प्र. राज्य सचिव मंडल ने किसानों-मजदूरों के विभिन्न जन संगठनों द्वारा 10 अगस्त, 2026 को आयोजित सत्याग्रह एवं जेल भरो आंदोलन के निर्णय का समर्थन किया है।

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू), अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा तथा संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने 10 अगस्त को पूरे देश में अपनी मांगों के समर्थन में उक्त आंदोलन आयोजित करने का निर्णय लिया है।

चार श्रम संहिताओं को वापस लेने, काम के घंटे आठ ही रखने, मुक्त व्यापार समझौतों (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) को निरस्त करने, न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह घोषित करने, जबरन भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने, जबरन विस्थापन की कार्रवाइयों को रोकने, यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, किसानों को उनकी फसल का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने, आदिवासियों को उनके जंगलों की जमीन से बेदखल न करने, वनाधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने, शिक्षा एवं रोजगार के अधिकार को मौलिक अधिकारों में शामिल करने, मनरेगा को उसकी पूर्व व्यवस्था के अनुसार बहाल करने तथा दलितों और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों को रोकने सहित अनेक मांगों को लेकर उपरोक्त संगठन 10 अगस्त को देशव्यापी आंदोलन करेंगे। इन संगठनों ने यह निर्णय 29 जुलाई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित एक राष्ट्रीय कन्वेंशन में लिया है।

उ.प्र. राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान की दिशा में चलाए जा रहे इस आंदोलन को देश के सभी अमनपसंद और लोकतंत्रप्रिय नागरिकों का समर्थन मिलना चाहिए। इसी भावना के साथ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी इस आंदोलन का समर्थन करने की घोषणा की है।
1-8-2026

 #कॉमरेड_हरकिशन_सिंह_सुरजीत_को_लाल_सलाम (23 मार्च 1916- 1 अगस्त 2008)कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत सीपीआई (एम) के दिग्गज नेत...
01/08/2026

#कॉमरेड_हरकिशन_सिंह_सुरजीत_को_लाल_सलाम
(23 मार्च 1916- 1 अगस्त 2008)

कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता थे, जो देश के कम्युनिस्ट आंदोलन और प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिज्ञ थे । 23 मार्च 1916 को जन्मे काम. सुरजीत का 1 अगस्त 2008 को निधन हो गया था।
स्मृति दिवस पर आदर के साथ क्रांतिकारी लाल सलाम |

जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने की कार्रवाई शिक्षा और संविधान के मूल्यों पर हमला हैभारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सव...
30/07/2026

जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने की कार्रवाई शिक्षा और संविधान के मूल्यों पर हमला है

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने आज अपनी बैठक के बाद जारी एक बयान में रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने की चल रही प्रक्रिया की कड़ी निंदा की है। बयान में कहा गया है कि किसी विश्वविद्यालय को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाना न केवल शिक्षा के अधिकार पर हमला है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के भी विरुद्ध है।

राज्य सचिव मंडल का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति अथवा संस्था के संबंध में कोई कानूनी विवाद है, तो उसका निपटारा कानून और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए, न कि बदले की भावना से। शिक्षा के एक महत्वपूर्ण संस्थान को निशाना बनाकर उसकी इमारतों को गिराने तथा उसकी शैक्षणिक गतिविधियों को बाधित करने का प्रयास हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यह कदम उच्च शिक्षा के विकास के बजाय उसे नष्ट करने की मानसिकता को दर्शाता है।

हालाँकि, मंडलायुक्त ने अगले आदेश तक जौहर विश्वविद्यालय के संबंध में किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार के अब तक के रवैये को देखते हुए आशंका बनी हुई है। जिस प्रकार भाजपा सरकार नफ़रत, सांप्रदायिक भेदभाव और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करती रही है, उससे किसी सकारात्मक, निष्पक्ष और शिक्षा के हित में निर्णय की अपेक्षा नहीं की जा सकती। सरकार को मंडलायुक्त के आदेश का सम्मान करते हुए जौहर विश्वविद्यालय के विरुद्ध किसी भी प्रकार की प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई से बाज़ आना चाहिए।

उत्तर प्रदेश पहले ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के अनेक क्षेत्रों में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना, उनमें बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। इसके विपरीत विश्वविद्यालयों को ध्वस्त करने की कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार शिक्षा के विकास के बजाय उसे कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल मांग करता है कि जौहर विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए, विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को निर्बाध रूप से संचालित होने दिया जाए तथा किसी भी विवाद का समाधान संविधान और कानून के अनुरूप किया जाए।

सीपीआई(एम) शिक्षा के अधिकार, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों की रक्षा के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेगी तथा इस शिक्षा-विरोधी और प्रतिशोधपूर्ण कार्रवाई का पुरजोर विरोध करेगी।
30-7-2026

29/07/2026

प्रकाशनार्थ

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उ.प्र. राज्य सचिव मंडल ने निम्नलिखित बयान जारी किया:

उ.प्र. की भाजपा सरकार ने प्रदेश के बीस लाख बुनकरों, जो 20 किलोवाट के पावरलूम चलाते हैं, के बिजली उपभोग शुल्क में कटौती पर विचार करने की घोषणा करते हुए कहा है कि इन बुनकरों से कनेक्शन का उसी फ्लैट दर से बिजली शुल्क लिया जाएगा, जिस दर से पाँच किलोवाट तक बिजली की खपत करने वाले बुनकरों से लिया जाता है।

सरकार ने अपनी पीठ स्वयं थपथपाने वाली कहावत को चरितार्थ किया है। सरकार का कहना है कि वह 20 किलोवाट बिजली की खपत करने वाले पावरलूम संचालकों (बुनकरों) के बिजली कनेक्शन की दर घटाकर उन्हें राहत देने पर विचार कर रही है। यह भविष्य की बात है कि सरकार यह काम करेगी या नहीं, अथवा यह भी एक चुनावी जुमला है। 2027 का चुनाव आने वाला है।

दरअसल, सरकार आम बुनकरों की वास्तविक मांग को अनदेखा कर रही है। बुनकरों की वास्तविक मांग ऐसे बुनकरों से संबंधित है, जो आधा किलोवाट से एक या दो किलोवाट के कनेक्शन पर लूम चलाते हैं। इनका फ्लैट रेट पहले ₹75 था, जिसे भाजपा सरकार ने बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्र में ₹300 तथा शहरी क्षेत्र में ₹400 कर दिया है। लंबे समय से छोटे-छोटे बुनकर यही मांग कर रहे हैं कि उनका फ्लैट रेट न बढ़ाकर यथावत रखा जाए।

प्रदेश का आम बुनकर गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उत्तर प्रदेश से दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन कर रहा है। सरकार ने उन गरीब बुनकरों को तो कोई राहत नहीं दी, बल्कि बड़े बुनकरों को राहत देने पर विचार कर रही है, जो 20 किलोवाट बिजली कनेक्शनधारक हैं।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने मांग की है कि छोटे-छोटे आम बुनकरों, जो एक या आधा किलोवाट के कनेक्शनधारक हैं, उनका पहले का ₹75 का फ्लैट रेट बहाल किया जाए। साथ ही, उनके उत्पाद, जिन्हें वे बड़े व्यवसायियों के हाथों कम कीमत पर बेच देते हैं, सरकार स्वयं खरीदकर उनके लिए बाज़ार विकसित करे, ताकि उन्हें न केवल भुखमरी से बचाया जा सके, बल्कि बुनकरी के उत्कृष्ट हुनर को भी संरक्षित किया जा सके। साथ ही, उनका पलायन भी रोका जा सके।

शोक संदेश-भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी वाराणसी जिला सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड शिवनाथ यादव का असामयिक निधन।  कामरेड...
26/07/2026

शोक संदेश-
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी वाराणसी जिला सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड शिवनाथ यादव का असामयिक निधन। कामरेड सीटू के जिलाध्यक्ष तथा उत्तर प्रदेश बैंक फेडरेशन के नेता थे।

कामरेड शिवनाथ यादव के निधन से पार्टी और मजदूर आंदोलन की गहरी क्षति हुई है। हम शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। और कामरेड शिवनाथ यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

कामरेड शिवनाथ यादव को लाल सलाम।

25/07/2026
दिनांक 25 जुलाई' 26 को लखनऊ एडवा राज्य कार्यालय में एडवा उप्र राज्य कमेटी द्वारा महिला आरक्षण व छात्रों  के सवाल पर  एक ...
25/07/2026

दिनांक 25 जुलाई' 26 को लखनऊ एडवा राज्य कार्यालय में एडवा उप्र राज्य कमेटी द्वारा महिला आरक्षण व छात्रों के सवाल पर एक परिसंवाद का आयोजन किया गया । परिसंवाद की मुख्य वक्ता एडवा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता वंदना राय ने की तथा अतिथियों का स्वागत एडवा प्रदेश सचिव सीमा कटियार ने किया। कार्यक्रम का‌ संचालन मधु गर्ग ने किया । विदित हो कि पहले से तय उद्यान भवन की बुकिंग प्रशासनिक कारणों से रद्द कर दी गई थी ।

कार्यक्रम के आरंभ में दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व नीट पेपर लीक के खिलाफ धरना दे रहे छात्रों के समर्थन व 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा की गई बर्बर हिंसा की घोर निन्दा करते हुए प्रस्ताव जोरदार नारों के साथ पारित किया।‌

एसएफआई की नेता दीपशिता धर ने छात्रों के सवाल पर बोलते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में 152 बार नीट सहित अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं और इसी वर्ष नीट परीक्षा कैंसिल होने पर 22 बच्चों ने आत्महत्या कर ली है जिसे लेकर छात्रों का आक्रोश अब रुकने वाला नहीं है।

परिसंवाद की मुख्य वक्ता सुभाषिनी अली ने वर्तमान सरकार की मनुवादी मानसिकता पर चोट करते हुए कहा कि यह मनुवादी सोच ही है जिसने महिलाओं के संवैधानिक अधिकार को "नारी शक्ति वंदन " का नाम दे दिया है जो महिलाओं की स्तुति का ढोंग करता है किन्तु उन्हें एक नागरिक का अधिकार देने को तैयार नहीं है।
सुभाषिनी अली ने महिला आरक्षण के साथ परिसीमन व जनगणना के मुद्दे को जोड़ने का सख़्त विरोध किया और कहा कि यह भाजपा की कुटिल चाल है जो उसके राजनैतिक एजेंडा को पूरा करने के लिए जोड़ी जा रही है । महिला आरक्षण एक स्वतंत्र मुद्दा है जिसे बिना किसी शर्त इसी मानसून सत्र में पारित होना चाहिए ।‌

परिचर्चा के अंत में छात्रों के सवालों पर एकजुटता तथा दिल्ली में छात्रों के साथ हुई बर्बर हिंसा के खिलाफ तथा महिला आरक्षण की मांग को लेकर मानव श्रंखला विधानसभा के सामने बनाई गई।

25/07/2026

प्रेस बयान

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने निम्नलिखित बयान जारी किया है:

BitChat को असंवैधानिक और तानाशाहीपूर्ण तरीके से ब्लॉक करने की निंदा

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का पोलित ब्यूरो, ओपन-सोर्स मैसेजिंग एप्लिकेशन BitChat को ब्लॉक करने के BJP सरकार के असंवैधानिक और तानाशाहीपूर्ण फैसले की कड़ी निंदा करता है। यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की आज़ादी और नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से संगठित होने और बातचीत करने के अधिकार पर सरकार के हमले में एक और खतरनाक बढ़ोतरी है।

खास तौर पर चिंता की बात यह है कि भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूचना या सार्वजनिक आदेश जारी नहीं किया गया था। देश को इस सेंसरशिप के बारे में जैक डॉर्सी की एक सार्वजनिक पोस्ट से पता चला, जिनकी टीम BitChat बनाती है। बिना पारदर्शिता या सार्वजनिक जवाबदेही के की गई ऐसी गुप्त सेंसरशिप, संवैधानिक लोकतंत्र के नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।

खबरों के अनुसार, गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा जारी आदेश में GitHub को कुछ ही घंटों के भीतर BitChat रिपॉजिटरी तक पहुंच बंद करने का निर्देश दिया गया था और साथ ही प्लेटफॉर्म को दंडात्मक कार्रवाई की धमकी भी दी गई थी। सरकार को किसी खास गैर-कानूनी कंटेंट से आपत्ति नहीं है, बल्कि उसे ऐसे कम्युनिकेशन टूल के अस्तित्व से ही दिक्कत है जो लोगों को इंटरनेट शटडाउन के दौरान भी जुड़े रहने की सुविधा देता है। इससे इस कदम के पीछे का असली मकसद उजागर होता है: जब भी सरकार इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फैसला करे, तो नागरिकों से बातचीत करने की क्षमता छीन लेना।

इस कार्रवाई को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। यह उन हजारों छात्रों और युवाओं के दमन के बीच हो रहा है जो जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा में गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही और प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस इलाके में बार-बार इंटरनेट सेवाएं बंद की गई हैं, मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं, बैरिकेड लगाए गए हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को पुलिस दमन का सामना करना पड़ा है। बातचीत को दबाने की यह कोशिश लोकतांत्रिक असहमति को कुचलने के मकसद से उठाए गए इन्हीं तानाशाहीपूर्ण कदमों का सिलसिला है।

सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि बोलने और इंटरनेट तक पहुंच पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को कानूनी वैधता, ज़रूरत और आनुपातिकता (proportionality) की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। बिना पारदर्शिता या उचित प्रक्रिया के, ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर को ब्लॉक करने के लिए अस्पष्ट कार्यकारी आदेशों का सहारा लेना इन संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है और कानून के शासन को और कमजोर करता है।

पोलित ब्यूरो मांग करता है कि BitChat को ब्लॉक करने का आदेश तुरंत वापस लिया जाए, जहां भी बिना किसी ठोस कारण के इंटरनेट सेवा बंद की गई है उसे बिना किसी रोक-टोक के बहाल किया जाए, सेंसरशिप और इंटरनेट बंद करने के ऐसे सभी आदेश सार्वजनिक किए जाएं, और शांतिपूर्ण विरोध का अपना लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल कर रहे छात्रों और युवाओं के व्यवस्थित दमन को रोका जाए।

CPI(M) उन छात्रों, युवाओं और सभी लोकतांत्रिक ताकतों के साथ मजबूती से खड़ी है जो इन तानाशाही कदमों का विरोध कर रहे हैं। शांतिपूर्ण विरोध, स्वतंत्र बातचीत और संगठन बनाने का अधिकार संविधान द्वारा दिए गए बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार हैं। किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं है कि वह गोपनीयता, सेंसरशिप और जबरदस्ती के जरिए इन अधिकारों को खत्म करे।

25/07/2026

प्रेस बयान

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने यह बयान जारी किया है:

बधाई

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का पोलित ब्यूरो देश के उन छात्रों और युवाओं को बधाई देता है जिन्होंने पेपर लीक के मामले में जवाबदेही तय करने के लिए संघर्ष किया; इन पेपर लीक की वजह से 22 छात्रों ने दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से आत्महत्या कर ली थी।

यह जीत देश के छात्रों और युवाओं के पक्के इरादे और उनके त्याग के बिना संभव नहीं होती, जिन्हें समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला। उन्होंने केंद्र सरकार के निर्देशों पर प्रशासन द्वारा इस्तेमाल किए गए लाठीचार्ज और दमनकारी कदमों के बावजूद हार नहीं मानी। युवाओं द्वारा दिखाई गई हिम्मत और दृढ़ संकल्प भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत है।

हालांकि हम केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का स्वागत करते हैं, लेकिन इसके बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भी भंग किया जाना चाहिए, जो बार-बार होने वाले पेपर लीक के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। CPI(M) परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण की अपनी मांग को फिर से दोहराना चाहती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020, जिसके मूल में व्यावसायीकरण, केंद्रीकरण और सांप्रदायिकीकरण है, उसे भी रद्द किया जाना चाहिए। जब तक ये कदम नहीं उठाए जाते, पेपर लीक और अधिकारों से वंचित किए जाने का यह सिलसिला जारी रहेगा। हमें उम्मीद है कि छात्र और युवा आंदोलन इन मांगों को लेकर अभियान चलाएंगे और संघर्ष करेंगे, क्योंकि इनका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।

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