एल्कोहलिकस ऍनानिमस ( ईश कृपा ग्रुप लखनऊ) ऐसे लोगों की संस्था है जो एक दुसरे से आपस में अपना अनुभव, शक्ति और आशा की सांझ करते हैं, ताकि वे अपनी शराब की सांझी समस्या का हल कर सकें और दूसरे शराबीयों को इस बिमारी से छुटकारा दिलाने में सहायता कर सकें।
इस संस्था का सदस्य बनने के लिये केवल शराब छोड़ने की इच्छा होना ही काफी है। इस की सदस्यता के लिये कोई चंदा या फीस नही देनी पड़ती। यह हमारे अपने योगदानों
के जरिए आत्मनिर्भर है। ए.ए. किसी वर्ग, धारना, धर्म, राजनीति या किसी और संस्था से नहीं जुड़ी हुई। हम किसी वाद विवाद में पड़ना भी नही चाहते। हम किसी उद्देश्य का न तो समर्थन करते है न विरोध। हमारा मुल उद्देश्य केवल शराब से दूर रहना और अन्य शराबियों की शराब छोड़ने में सहायता करना है।
एल्कोहलिक्स एनोनिमस में आने वाले हर सदस्य की पहचान हमेशा गुप्त रखी जाती है ताकि उसकी निजी भावनाओं को कोई ठेस न पहुंचे और अपने हर सदस्य की पहचान गुप्त रखना हमारी परम्पराओं की आध्यात्मिक जरूरत है जो हमें हमेशा याद दिलाता है कि असूल शख्सीयतों से उपर है।
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ए. ए . की बारह परम्पराएं
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1- हमारा सांझा कल्याण सबसे पहले आना चाहिए; व्यक्तिगत रोग मुक्ति ए.ए. की एकता पर निर्भर करती है।
2- हमारे ग्रुप के मामलों के लिए केवल एक ही सर्वोच्च अधिकारी है वह है दयालु ईश्वर जो हमारे ग्रुप की विवेक बुद्धि द्वारा प्रकट होता है। हमारे लीडर केवल विश्वसनीय सेवक है वह हुक्म नही चलाते।
3 - ए.ए. की सदस्यता के लिए केवल शराब छोड़ने की इच्छा होना ही काफी है।
4- हर ग्रुप को स्वंमशासी होना चाहिये सिवाय उन मामलों के जो दूसरे ग्रुप्स या समूचे ए.ए. को प्रभावित करते हो।
5- हर ग्रुप का केवल एक ही मूल उद्देश्य है अपना संदेश उस शराबी तक पहुंचांना जो अभी भी पीड़ित हैं।
6- ए.ए. के ग्रुप को अपना नाम, पैसा और समर्थन किसी भी संबन्धित या बाहरी संस्था को नहीं देना चाहिये ताकि पैसे, जायदाद या मान की समस्याएं हमे अपने प्रमुख उद्देश्य से गुमराह न कर हैं।
7- हर ग्रुप को बाहरी योगदान अस्वीकार करते हुए पुर्ण रूप से स्वयं निर्भर होना चाहिये।
8- ए. ए. हमेशा गैर पेशेवर रहना चाहिए परन्तु हमारे सेवा केन्द्र या विशेष कार्यकर्ता रख सकते हैं।
9- ए.ए. को कभी भी संगठित नहीं होना चाहिए, परंतु हम सेवा परिषद एवं समितियां बना सकते हैं, जो सीधे उन लोगों की उत्तरदायी होंगी जिनके लिए वे कार्य करेगी।
10- ए.ए. संस्था बाहरी मामलों में कोई राय नहीं रखती, इस लिए ए.ए. का नाम कभी भी जन विवाद में नहीं उठाया जाना चाहिए।
11- हमारी जन संपर्क नीति प्रोत्साहन की अपेक्षा आकर्षण पर आधारित है। हमें प्रेस, रेडियो, सिनेमा और टी.वी. के स्तर पर अपनी निजी पहचान छुपाए रखना आवश्यक है।
12- अपनी पहचान गुप्त रखना हमारी परम्पराओं की आध्यात्मिक जरूरत है जो हमें हमेशा याद दिलाता है कि असूल शख्सीयतों से उपर है।
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