02/06/2026
भारतीय भाषा पुस्तक योजना पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न
2 जून 2026 को भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित भारतीय भाषा पुस्तक योजना विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों ने सहभागिता कर भारतीय भाषाओं में ज्ञान-सृजन तथा पाठ्यक्रम-आधारित पुस्तक लेखन की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में विश्विद्यालय के माननीय कुलपति जी ने भारतीय भाषा पुस्तक योजना की सराहना करते हुए कहा कि भारत सरकार की यह पहल अत्यंत दूरदर्शी एवं समयानुकूल है, जो भविष्य में भारतीय भाषाओं के संवर्धन और ज्ञान-विस्तार के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विकसित भारत–2047, आत्मनिर्भर भारत तथा एक जनपद–एक उत्पाद जैसी योजनाएँ राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं, उसी प्रकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 भारतीय भाषाओं को शिक्षा, शोध और ज्ञान-विज्ञान के केंद्र में स्थापित करने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता की पाठ्यक्रम-आधारित पुस्तकों का लेखन समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों को अपनी भाषा में ज्ञानार्जन का अवसर प्राप्त होगा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय भाषाओं में विकसित अध्ययन-सामग्री समाज और राष्ट्र के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
माननीय कुलपति जी ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय भाषा समिति द्वारा बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ को उत्तर प्रदेश का नोडल केंद्र नामित किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय भारतीय भाषा पुस्तक योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा, जिससे यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत उपयोगी, सार्थक एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगी।
कार्यशाला में गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राधेश्याम दुबे, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी, पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर राजकुमार, डॉ. बलजीत श्रीवास्तव, कार्यशाला संयोजक प्रोफेसर शैलेश मिश्र तथा प्रोफेसर उदयन मिश्र सहित अनेक शिक्षाविदों एवं विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यशाला में भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण पाठ्यपुस्तकों के निर्माण, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।