13/08/2026
“लाइन हाजिर” को बर्खास्तगी/निलंबन जैसा वैधानिक दंड समझना सही नहीं है। आरक्षी और मुख्य आरक्षी के लिए वास्तविक statutory punishments U.P. Police Officers of the Subordinate Ranks (Punishment and Appeal) Rules, 1991 में हैं। ये नियम DySP से नीचे के पुलिस अधिकारियों पर लागू होते हैं।
UP Police में गलती के हिसाब से कार्रवाई की कानूनी स्थिति
स्थिति सामान्यतः क्या कार्रवाई हो सकती है कानूनी आधार
मामूली अनुशासनहीनता Orderly Room में कार्रवाई, छोटी सजा Rule 15
छोटी ड्यूटी गलती Censure, fine, increment रोकना आदि Rule 4
गंभीर misconduct विभागीय जांच, फिर major/minor penalty Rule 5, 14
जांच के दौरान कर्मचारी को अलग रखना जरूरी हो Suspension Rule 17
आपत्तिजनक/अनुशासनहीन सोशल मीडिया गतिविधि प्रारंभिक जांच, विभागीय कार्रवाई, परिस्थिति के अनुसार suspension/penalty Social Media Policy + Punishment Rules
ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही विभागीय जांच, गंभीर होने पर major penalty Rule 4, 14
सरकारी आदेश / सर्कुलर की गंभीर अवहेलना विभागीय कार्रवाई Rule 4
रिश्वत/भ्रष्टाचार विभागीय कार्रवाई + आपराधिक कार्यवाही; गंभीर स्थिति में dismissal/removal संभव Rule 4/8 + संबंधित आपराधिक कानून
हिरासत में आरोपी/बंदी को जानबूझकर भगाना Dismissal, जब तक लिखित कारण से कम दंड न दिया जाए Rule 8(4)(a)
हिरासत में व्यक्ति को लापरवाही से भागने देना Dismissal, subject to written reasons for lesser penalty Rule 8(4)(a)
Moral turpitude वाले अपराध में conviction Dismissal, जब तक लिखित कारण से अन्यथा निर्णय न हो Rule 8(4)(b)
48 घंटे से अधिक custody Deemed suspension Rule 17(2)(a)
conviction के बाद 48 घंटे से अधिक imprisonment Deemed suspension, यदि तत्काल dismissal/removal नहीं हुआ Rule 17(2)(b)
इनमें से dismissal/removal/rank reduction जैसी major penalties सामान्यतः proper departmental inquiry के बाद ही दी जाती हैं, तीन संवैधानिक अपवादों को छोड़कर।
1. “लाइन हाजिर” की असली कानूनी स्थिति
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है।
लाइन हाजिर = बर्खास्तगी नहीं।
लाइन हाजिर = suspension भी नहीं।
किसी पुलिसकर्मी को थाना, चौकी या वर्तमान field posting से हटाकर पुलिस लाइन से संबद्ध करना प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में किया जा सकता है। उसके बाद विभाग चाहे तो उसके विरुद्ध विभागीय जांच, suspension अथवा Rule 4 के तहत punishment की कार्यवाही कर सकता है।
इसलिए अखबार में “सिपाही लाइन हाजिर” पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि उसके खिलाफ विभागीय सजा हो चुकी है।
2. किन परिस्थितियों में तुरंत Suspension हो सकता है?
Rule 17 काफी स्पष्ट है।
यदि किसी पुलिसकर्मी के विरुद्ध departmental enquiry contemplated या pending है, तो appointing authority अथवा अधिकृत कम-से-कम SP स्तर का अधिकारी उसे inquiry पूरी होने तक suspend कर सकता है।
इसी तरह उसके विरुद्ध criminal investigation, inquiry या trial चल रहा हो और आरोप:
उसके पुलिस पद से जुड़ा हो,
उसकी ड्यूटी के निर्वहन में उसे embarrass कर सकता हो, या
moral turpitude से संबंधित हो,
तो भी suspension किया जा सकता है।
उदाहरण
रिश्वत लेते पकड़ा गया पुलिसकर्मी
criminal case + departmental proceedings
suspension संभव।
आरोपी से मिलीभगत कर उसे लाभ पहुंचाना
suspension + departmental inquiry।
गंभीर custodial misconduct
suspension अत्यंत स्वाभाविक disciplinary measure हो सकता है।
ड्यूटी के दौरान नशे में पाया जाना
facts के अनुसार suspension और departmental proceedings संभव।
पुलिस वर्दी में आपत्तिजनक social-media video
preliminary verification → departmental proceedings; मामले की गंभीरता के अनुसार suspension भी हो सकता है।
3. 48 घंटे वाला नियम बहुत महत्वपूर्ण है
Rule 17(2) के अनुसार यदि पुलिसकर्मी 48 घंटे से अधिक custody में रहता है, तो वह deemed suspension में माना जाता है।
इसी तरह conviction के बाद यदि उसे 48 घंटे से अधिक imprisonment की सजा होती है और उसे तत्काल dismiss/remove नहीं किया गया है, तो conviction की तारीख से deemed suspension का प्रावधान है।
यानी यहां “SP ने suspension किया या नहीं” वाला सवाल अलग हो जाता है। नियम स्वयं deemed suspension की स्थिति पैदा करता है।
4. किन मामलों में बर्खास्तगी तक मामला पहुंच सकता है?
यहां Rule 4 और Rule 8 को साथ पढ़ना चाहिए।
Rule 4 में तीन major penalties हैं:
1. Dismissal from service
2. Removal from service
3. Reduction in rank
और इनके अलावा minor penalties भी हैं, जैसे promotion रोकना, fine, increment रोकना, censure तथा सरकारी नुकसान की recovery।
सबसे कठोर दो statutory situations
A. Custody से आरोपी/बंदी को भगाना
Rule 8(4)(a) में विशेष प्रावधान है।
यदि कोई पुलिस अधिकारी जानबूझकर या लापरवाही से police custody अथवा judicial custody में रखे व्यक्ति को escape करने देता है, तो नियम के अनुसार punishment dismissal होगा।
competent punishing authority लिखित कारण दर्ज करके lesser punishment दे सकती है।
B. Moral Turpitude वाले अपराध में conviction
Rule 8(4)(b) और भी महत्वपूर्ण है।
यदि पुलिस अधिकारी को court ऐसे offence में convict करता है जिसमें moral turpitude शामिल है, तो नियम के अनुसार उसे dismiss किया जाएगा, जब तक punishing authority लिखित कारण दर्ज करके अन्यथा निर्णय न ले।
इसलिए “FIR हो गई = बर्खास्तगी” कहना गलत है।
लेकिन court conviction + moral turpitude = Rule 8(4)(b) के कारण dismissal का बहुत मजबूत statutory consequence है।
5. कौन-कौन से कृत्य गंभीर विभागीय misconduct बन सकते हैं?
यह सूची व्यवहारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है:
भ्रष्टाचार और ईमानदारी से संबंधित
1. रिश्वत लेना।
2. रिश्वत मांगना।
3. आरोपी से अवैध आर्थिक लाभ लेना।
4. जब्त माल/रकम में हेराफेरी।
5. सरकारी धन का दुरुपयोग।
6. केस में आर्थिक लाभ के लिए पक्षपात।
7. अपराधी से मिलीभगत।
इनमें criminal prosecution के साथ departmental action भी हो सकता है।
ड्यूटी से संबंधित
8. गंभीर कर्तव्यच्युति।
9. जानबूझकर सरकारी आदेश न मानना।
10. वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश की गंभीर अवहेलना।
11. महत्वपूर्ण ड्यूटी से जानबूझकर अनुपस्थित रहना।
12. संवेदनशील सूचना लीक करना।
13. केस डायरी/सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर हेरफेर।
14. जानबूझकर गलत रिपोर्ट तैयार करना।
15. आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाना।
16. जांच को जानबूझकर प्रभावित करना।
हिरासत और आरोपी से संबंधित
17. आरोपी/बंदी को custody से भागने देना।
18. आरोपी को जानबूझकर अनुचित सुविधा देना।
19. custodial misconduct।
20. हिरासत में व्यक्ति के साथ गंभीर गैरकानूनी व्यवहार।
21. पुलिस रिकॉर्ड में custody संबंधी गलत जानकारी देना।
Custody से escape वाला मामला Rule 8(4)(a) में विशेष रूप से कठोर है।
आचरण और अनुशासन
22. ड्यूटी के दौरान नशे में होना।
23. ड्यूटी के दौरान गंभीर अनुशासनहीनता।
24. वर्दी और पुलिस पद का अनुचित उपयोग।
25. ऐसा सार्वजनिक आचरण जिससे पुलिस विभाग की गंभीर बदनामी हो।
26. सोशल मीडिया पर बावर्दी अशोभनीय/अनुशासनहीन सामग्री डालना।
27. पुलिस की गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया पर डालना।
28. सरकारी ड्यूटी के समय व्यक्तिगत social media activity में लिप्त रहना।
यह आखिरी श्रेणी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि DGP Circular No. 05/2023 में UP Police ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिसकर्मियों द्वारा बावर्दी अशोभनीय वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर upload करने से विभाग की छवि धूमिल हुई है, और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई किए जाने का उल्लेख भी किया गया है।
6. छोटे misconduct में क्या होता है?
हर मामले में सीधे charge-sheet और dismissal नहीं होता।
Rule 15 के तहत petty breach of discipline और trifling misconduct के मामलों में, Head Constable तक के पुलिसकर्मी के विरुद्ध orderly room में summary proceedings की जा सकती है। उसे आरोप/कृत्य बताया जाता है और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।
इसलिए उदाहरण के लिए:
छोटी अनुशासनात्मक गलती → Orderly Room → छोटी punishment
जबकि:
गंभीर misconduct → Departmental Inquiry → Major Penalty तक मामला जा सकता है।
7. Head Constable और Constable के लिए कौन-कौन सी सजा उपलब्ध है?
Rule 4 के अनुसार सामान्य penalties के अलावा Head Constable और Constable को अतिरिक्त रूप से:
confinement to quarters/quarter guard,
punishment drill,
extra guard duty,
deprivation of good conduct pay
दी जा सकती हैं। Constable को कुछ परिस्थितियों में fatigue duty भी दी जा सकती है।
यानी पुलिसकर्मी के लिए disciplinary punishment की व्यवस्था काफी विस्तृत है।
8. एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर
इसे याद रखिए:
लाइन हाजिर → प्रशासनिक कार्रवाई
Suspension → सेवा से अस्थायी निलंबन, Rule 17
Minor penalty → Rule 4(b)
Major penalty → Rule 4(a)
Dismissal → सेवा से बर्खास्तगी
Removal → सेवा से हटाना, लेकिन dismissal से अलग service-consequence
Conviction for moral turpitude → Rule 8(4)(b) में dismissal का विशेष प्रावधान
Custody escape → Rule 8(4)(a) में dismissal का विशेष प्रावधान
और dismissal/removal/reduction सामान्यतः proper inquiry के बाद ही होते हैं।
आपके गौरी शंकर वाले मामले में
इसका सीधा मतलब यह है कि यदि गौरी शंकर का शराब सेवन वाला Facebook पर अपलोड करना तथा सर्कुलर 05 2023 का उल्लंघन करना उक्त कृत्य की विभागीय जांच कराकर, U.P. Police Social Media Policy-2023 तथा लागू सेवा/आचरण नियमों के उल्लंघन के आधार पर U.P. Police Officers of the Subordinate Ranks (Punishment and Appeal) Rules, 1991 के अंतर्गत उपयुक्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करवाने का मुख्य आधार है यहां पहले misconduct स्थापित होगा और फिर Rule 4 के तहत उपयुक्त दंड विभाग के द्वारा दिया जाएगा और विभाग ऐसी शिकायतों को नजर अंदाज नहीं करता है.
[UP Police की आधिकारिक Rules & Regulations सूची](https://www.uppolice.gov.in/article/en/rules-regulation?utm_source=chatgpt.com)
[UP Police Officers of the Subordinate Ranks (Punishment and Appeal) Rules, 1991](https://upload.indiacode.nic.in/showfile?actid=AC_UP_88_469_00007_00007_1594810376993&filename=rules1991english.pdf&type=rule&utm_source=chatgpt.com)
[UP Police Social Media Policy-2023, DGP Circular No. 05/2023](https://uppolice.gov.in/site/writereaddata/siteContent/2023020917573151915%20cir.pdf?utm_source=chatgpt.com)
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