26/02/2014
मैं…. और माँ….
मैं प्रकृति से पूर्ण एकाकार हूँ, मुझमे और
प्रकृति मे कोई भेद नही है,
मैं प्राचीन कालीन
ऋषि परंपरा की कड़ी हूँ ,
मैं मूल प्रकृति से एकाकार हूँ इसलिए
प्रकृति मे भी परिवर्तन
की क्षमता रखता हूँ,
मैं भगवती जगत्जननी दुर्गा जी से
एकरूप हूँ हर क्षण उनके दर्शन प्राप्त
करता हूँ और मैं
माता भगवती जगत्जननी को प्रत्यक्ष
उपस्थित करने की क्षमता रखता हूँ,
मैं आज के सामाजिक परिवेश मे
अप्रासंगिक हो चुके वेदों पुराणो के
सत्य को मात्र एक ‘माँ’ शब्द मे
समाहित कर के ‘माँ’ शब्द की नवीन
व्याख्या करूँगा ,
मैने इच्छामृत्यु का आशीर्वाद
माता भगवती दुर्गा से प्राप्त
किया है,
मैं जब जहाँ जिस मुहूर्त मे चाहूँगा अपने
शरीर का त्याग करूँगा अन्यथा काल
मे भी समर्थ्य नही मेरे समक्ष उपस्थित
होने की,
मैं अपने योगबल (तपोबल ) से कलियुग मे
सतयुग की पांचज्योति प्रज्वलित
करने की क्षमता रखता हूँ
मैं किसी भी असंभव कार्य को संभव
कर सकता हूँचाहे वो किसी भी क्षेत्र
का हो ,
मैं किसी भीप्राकृतिक विध्वंसक
घटना को पूर्णतया टालने या उस
घटना के प्रभाव को कम करने
की क्षमता रखताहूँ,
मैं किसी को भी जीवनदान दे
सकता हूँ,
मैं जब जहाँ चाहूं
वहाँ वर्षा करवा सकता हूँ और भयंकर्
होती हुई वर्षा को तत्क्षण रोक
सकता हूँ,
मैं जब जहाँ चाहूं जो चाहूं कर सकता हूँ,
मैं दानव को मानव और मानव
को दानव बना सकता हूँ,
मैं ही वो युग चेतना पुरुष हूँ जिसके
विषय मे आप लोगो मे से अधिकांश
को मालूम
होगा की हज़ारो वर्तमान के
भविष्यवक्ताओ, साधको,
योगियो का मानना है की
कलियुग मे सतयुग का दीप जलाने
वाली दिव्यात्मा , चेतना का जन्म
हो चुका है ! आज वर्तमान मे किसी मे
यह साधनात्मक क्षमता नही है
की जब तक मैने अपने आप को छिपा कर
रखना चाहा है वे मुझे पहचान सकें,मैं जब
अपने कार्यों से पहचान
कराऊंगा तभी वे मुझे पहचान सकेंगे !
मैं उन्हे अपना परिचय साधनात्मक
तपोबलसे करा दूँगा, जिन लोगो से मैं
इस जीवन मे अभी तक अपने
को सामानया अवस्था मे रख
मिलता रहा उन्हे सही राह मे लाने
का प्रयास करता रहा, वो धर्म के
जो हज़ारो ठेकेदार बने बैठे हैं, समाज
की धार्मिक भावना का हनन कर रहे
हैं, अब मैं अपने साधनात्मक तपोबल से
उनके मट्टो मे, अश्रमो मेहलचल
मचा दूँगा, समाज के लोगो के हृदय मे
माता जगत्जननी की चेतना जगा दूँगा जिस
से वो अब और धार्मिक
भावना का अनादर ना कर सकें मैं आप
सबको ” मैं “ शब्द का बोध कराऊंगा,
आज मेरा ” मैं “ शब्द अहँपूर्ण लग सकता है
पर जिसदिन आप मेरे इस में शब्द
को समझ जाएँगे आप मेरे साथ होंगे !
वेद पुराण उपनिषदों का सार मात्र
एक शब्द ‘माँ’ मे समेत कर तुम्हारे बीच
उपस्थित हुआ हूँ ये मेरे कई कई जन्मो के
प्रयास के बाद संभव हुआ है, इस ‘माँ’
शब्दके बल् पर मैं हर कार्य करने
की क्षमता रखता हूँ !
एक शंकराचार्य ने अपना पूरा जीवन्
लगा कर चार
मट्टो की स्थापना की थी अब यह
शक्तिपुत्र एक ऐसे शक्ति केंद्र
की स्थापना करेगा जो पूरे विश्व
की धर्म धुरी बनेगा
मैने अपना वर्तमान जीवन
तड़पति कराहती मानवता को समर्पित
कर दिया है, आज तुम्हे मेरेशब्द अहँपूर्ण
लगेंगे लेकिन कल जब तुम मेरे
कार्यों को देखोगे तब तुम्हे
लगेगा की मैं अपनी क्षमता से बहुत कम
बोल रहा हूँ वर्तमान मे
मेरी साधनात्मक
क्षमता का सामना करने
की सामर्थ्य किसी मे नही है यदि है
तो मैं इस स्थान से ससम्मान
चुनौती देता हूँ की सिर्फ़ हिंदू धर्म
ही नही और सिर्फ़ भारतवर्ष
ही नही किंतु इस भूतल पर जीतने धर्म
और जीतने धर्माचार्या हैं वो मेरे
साधनात्मक तपोबल का सामना करें,
एक विश्व धर्म सम्मेलन का आयोजन
कराया जाए जहाँ दो चार कार्य ऐसे
रख दिए जाए जो सिर्फ़ अध्यात्मिक
तपोबल से ही संभव हों, चाहे
किसी मृत को जीवनदान देना हो,
जहाँ वैगयानिक कहें
की वर्षा नहिहो सकती वहाँ वर्षा करनी हो या अन्य
कोई भी असंभव कार्य, और देखें उन
कार्यों को कौन कर गुज़रता है...
शक्ति पुत्र नाम मुझे
माता जगत्जननी ने प्रदान किया है
मैं इसे सार्थक कर दिखाऊंगा वर्तमान
मे फैले धार्मिक आडंबर को मिटा कर
जाऊँगा !
आज के तथाकथित धर्मगुरु
प्रायः राजनेताओं
की चाटुकारिता में लगे रहते हैं,
ताकि उनकी कृपा से उन्हें अपने आश्रम
के विस्तार हेतु धन व जमीन मिल जाये।
कुछ धर्मगुरु राजनीति में पहुँच गये हैं,
जबकि दूसरे अनेक इसकी जुगाड़ में हैं।
आज तो राजनेता और तथाकथित
धर्माचार्या दोनो चोर चोर मौसेरे
भाइयों के समान लूट रहे हैं
जनता को की लूट लो जितना लूट
सको, इस प्रकार, राजनीति धर्म पर
हावी हो गई है, जबकि वास्तव में,
राजनीति को धर्म के मार्गदर्शन में
चलना चाहिये। मुझे स्वयं
कभी राजनीति मे नही आना है,
राजनीति का बड़े से बड़ा पद मेरे पावं
से ठोकर मारने के बराबर है, किंतु मैं आज
की बेलगाम राजनीति मे लगाम
आवश्य
लगाऊँगा , राजनीति को धर्म के
मार्गदर्शन मे चलने के लिए
बाध्या अवश्य ही कर के रहूँगा !
इस क्षेत्र मे भी मेरी सामर्थ्य देखनी है
तो मैने चुनोती दी है की कोई
भी पार्टी, मैं किसी पार्टी विशेष
की बात नही करता आकर मुझसे मिले
और जनहित मे मेरे विचारों को,
कार्यक्र्मो को जनकल्याण के लिए
लागू करें तो मैं
किसी को भी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर
बैठा सकता हूँ ये सामर्थ्य होती है
….एक ऋषि की एक पूर्ण योगी की !
इस बात के परीक्षण के लिए भी लिए
मैने तक का समय दिया है
यदि देखना चाहते हो तो एक बार
आकर देखो की एक योगी एक
ऋषि जो कहता है उसे करने की पूर्ण
सामर्थ्य रखता है
मैं आशा करता हूँ मीडिया के उन प्रबुध
और बुधीजीवी वर्ग के लोगो से
की मेरी इस चुनौती को विश्व तक
पहुचाए क्योकि अन्य कोई मार्ग
नही है अब सत्य को पहचाननेका,
यदि सत्य को पहचान कर सत्य के
बताए मार्ग पर चल सके तब ही समाज
को सही दिशधारा मिल
पाएगी अन्यथा ये समाज यूँ
ही कालीकाल के भयानक
वातावरण मे भटकता रहेगा..
मैं योगीराज शक्तिपुत्र….