24/08/2026
सोचें, समझें और विचार करें!
कमाल है मित्रों! दस प्रतिशत जनरल, नब्बे प्रतिशत हिस्सा खा रहे हैं और नब्बे प्रतिशत लोग दस प्रतिशत भी नहीं पा रहे हैं; फिर भी 'आरक्षण हटाओ' आंदोलन चलने लगा! यदि मुझे ज़िम्मेदारी मिल जाए, तो जनसंख्या अनुपात में हिस्सेदारी लागू कर दूँ, फिर देखो कैसे आरक्षण का विरोध करते हैं! मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ कि आरक्षण हटाओ अभियान में जुटे लोग ही आरक्षण मांगते दिखाई देंगे, और हम इन्हें जातिगत जनगणना कराकर सौ प्रतिशत आरक्षण देंगे।
आओ आरक्षित वर्ग के लोगों! सर्वाधिक वोट रखने वाले अतिपिछड़े को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनाओ, जनसंख्या अनुपात में हिस्सेदारी पाओ, भेदभाव मिटाओ और वोट बेचकर अपना हिस्सा खाने वाले अपने ही नेताओं को सबक सिखाओ।
'मनुवादी' बताकर ज़हर घोलने और फिर उन्हीं मनुवादियों के टुकड़ों पर पलने वाले अपनों से सावधान रहो। आपके दुश्मन वो नहीं हैं जिन्हें बताया जाता है, असली दुश्मन वो हैं जो महापुरुषों को आदर्श मानने का नाटक कर उनकी जयंती मनाते हैं और फिर एक-दो टिकट का जुगाड़ कर एक सेल्समैन की तरह किसी का भी प्रोडक्ट बेचने लगते हैं।
वर्तमान में मुझे बताओ, क्या खुद को बहुजन मिशन का नायक बताने वाले दो-चार टिकटों के लिए बड़ी पार्टियों के पैरों में नहीं पड़े हैं? जबकि यदि ये अपना ईगो (अहंकार) त्यागकर एक प्लेटफ़ॉर्म पर आकर सरकार बनाने की ठान लें, तो नब्बे प्रतिशत को धोखा देते आ रहे दलों और नेताओं की ज़मानत ज़ब्त कराकर पूर्ण बहुमत की सरकार बना डालें। लेकिन जाँच का ख़तरा इन्हें आगे नहीं बढ़ने देता; ईश्वर इनकी मदद करे।
— विनेश ठाकुर 'कर्पूरी'
राष्ट्रीय अध्यक्ष, जन सेवा दल एवं संपादक, विधान केसरी, लखनऊ