23/05/2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा के वरिष्ठतम सदस्य श्री रघुराज प्रताप सिंह "राजा भईया" जी उत्तर प्रदेश की राजनीति में शब्दों की मर्यादा के शिखर पुरुष हैं।
उनके किसी भी बयान में आपको विद्वता व ज्ञान की झलक सदैव मिलेगी, उन्होंने सदैव मर्यादित भाषा, उच्च आदर्श और संतुलित विचारों के साथ अपनी बात रखी है। उनके शब्द कभी भी मर्यादा की सीमा का उल्लंघन नहीं करते।
जो लोग उनके वक्तव्य का वास्तविक अर्थ समझने की क्षमता नहीं रखते, उन्हें पहले अध्ययन करना चाहिए।
राजा भैया का आशय स्पष्ट है कि “जब तक सनातन जीवित रहेगा, तब तक भारत में संविधान भी सुरक्षित रहेगा।” अर्थात जब तक भारतवर्ष में सनातन सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय मूल्य जीवित रहेंगे, तब तक संविधान भी प्रभावी रूप से लागू होता रहेगा।
संविधान की धज्जी उड़ाने वाले कुछ उदाहरण निम्न हैं :-
(1) जब कश्मीर से लाखों लोगों को पलायन के लिए मजबूर किया गया, तब संविधान कहाँ था?
(2) जब पश्चिम बंगाल में दलित समाज सहित अनेक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, तब संविधान की शक्ति क्यों दिखाई नहीं दी?
(3) जब केरल में हिन्दू बहन - बेटियों का धर्मांतरण करके सीरिया व अफगानिस्तान भेजकर आतंकी संगठन ISIS में शामिल किया गया था, तब संविधान के कौन से अंश का पालन किया गया था?
(4) पुलवामा आतंकी हमले में धर्म पूँछकर नृशंस हत्या की गयी थी, तो संविधान कहाँ था?
(5) संभल दंगा, 1978 में जब हिंदुओं की नृशंस हत्या, लूट और बलात्कार करके भगाया गया, तो संविधान नहीं था?
उदाहरण बहुत हैं बस कुछ आप सबके संज्ञान हेतु लिखा है।
इसीलिए सभी सनातनियों से निवेदन है "बटोगे तो कटोगे" व "एक रहें नेक रहें" के नारे को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
जब तक भारत में सनातन को मानने वाले लोग बहुसंख्यक रहेंगे, तब तक संविधान सुरक्षित रहेगा, और इसके प्रत्यक्ष उदाहरण कांग्रेस शासन के दौरान जम्मू-कश्मीर, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में देखने को मिले हैं ।
और राजा भैया केवल विधानसभा सदस्य नहीं हैं, बल्कि सनातन संस्कृति और श्रेष्ठ परंपराओं के प्रतीक हैं।
जो लोग सीमाएँ लांघकर उनके लिए अनर्गल बातें कर रहे हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि:-
"शेर कभी कुत्तों का शिकार नहीं करता - किंतु शेर शिकार करना भी नहीं भूलता"