14/03/2021
जैसे तथाकथित कट्टर धार्मिकों को आज तक धर्म ही नहीं समझ में आया, वैसे ही आधुनिक देशभक्तों को देशभक्ति का कोई ज्ञान नहीं। अधिकांश समझते हैं कि वन्देमातरम, जय हिन्द, जय भारत के नारे लगा देने से देशभक्त हो जाते हैं। कुछ समझते हैं कि राष्ट्रगान गा लेने से, प्रभात फेरी लगा लेने से देशभक्त हो गए। कुछ लोग समझते हैं विपक्षी पार्टियों को गरिया देने से देशभक्त हो जाते हैं। कुछ लोगों को लगता है पाकिस्तान ट्रैवल एजेन्सी के एजेंट बनकर विरोधियों को पाकिस्तान भेजने से देशभक्त हो जाते हैं।
ये देशभक्ति नहीं दिमागी दिवालियापन है। ये बिल्कुल वैसी ही खोखली देशभक्ति है जैसी अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाना, जय श्रीराम के नारे लगाना, गीता, कुरआन, बाइबल पढ़ना, पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत-उपवास, भजन कीर्तन करना और स्वयं को धार्मिक समझना।
देशभक्ति कहते हैं देश के प्रति निष्ठा को। जब भी देश का अहित हो रहा हो, देश बेचा जा रहा हो, देश लूटा जा रहा हो, देश के नागरिकों को फर्जी महामारी या पड़ोसी देशों का भय दिखाकर बंधक बनाया जा रहा हो, तो विरोध करना।
लुटेरों को सत्ता व देश से बाहर खदेड़ना, जनता को न्याय दिलाना देशभक्ति है। और यदि आप मौन समर्थन कर रहे हैं, बार बार बिकाऊ, देश बेचने वाले नेताओं को सत्ता सौंप रहे हैं, तो आप देशभक्त नहीं, देशद्रोही हैं। फिर भले आप वन्देमातरम के नारे लगाएं, या प्रभात फेरी निकालें या फिर राष्ट्रगान गाते फिरें गली मुहल्ले, आप देशद्रोही ही कहलाएंगे।
लगे हाथों धर्म भी समझ लीजिए।
पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत-उपवास, भजन-कीर्तन करने से, मंदिर-मस्जिद बनवाने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। धार्मिक होता है वह जो भूखे को रोटी खिलाए, प्यासे को पानी पिलाए, देशभक्तों का तन-मन-धन से सहयोग करे, देश को लुटने से बचाए, निर्बलों, असहायों का रक्षक व सहयोगी बने। फिर भले वह पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत, उपवास न करे, या नास्तिक ही क्यों न हो, वह धार्मिक ही कहलाएगा। वह धार्मिक इसलिए कहलाएगा, क्योंकि वह धार्मिक कार्य कर रहा है। और जो इन सबके विरुद्ध आचरण करे वह अधार्मिक कहलाएगा, भले वह कट्टर आस्तिक ही क्यों न हो, फिर वह पांचों व्यक्त नमाजी ही क्यों हो।