Rajneesh verma

Rajneesh verma 【Socio-political Activist】
अध्यक्ष~||नवनिर्माण युवा ब?

{ है सूरमा वही इस जग मेँ जो अपनी राह बनाता है कोई पदचिन्होँ पर चलता है, कोई पदचिन्ह बनाता है }

~] NYB ADHYAKSH [~
Rajneesh verma

02/04/2026

जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा देकर सोए हुए समाज को जगाने वाले ,वोट हमारा राज तुम्हारा नही चलेगा ,...
08/10/2024

जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा देकर सोए हुए समाज को जगाने वाले ,वोट हमारा राज तुम्हारा नही चलेगा ,नही चलेगा के नारे से शोषित समाज में राजनीतिक चेतना पैदा कर शासक बनाने वाले बहुजन नायक मान्यवर साहब कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें शत-शत नमन एवम् विनम्र आदरांजलि!
💐🙏

नवनिर्माण युवा ब्रिगेड

09/04/2024
रणदीप हुड्डा अच्छा एक्टर है...लेकिन अंधभक्तों के लपेटे में फंस गयासोचा होगा कि 5-10 करोड़ अंध भक्त भी अगर फ़िल्म देखने पह...
09/04/2024

रणदीप हुड्डा अच्छा एक्टर है...
लेकिन अंधभक्तों के लपेटे में फंस गया
सोचा होगा कि 5-10 करोड़ अंध भक्त भी अगर फ़िल्म देखने पहुँच जाएंगे तो 200-400 करोड़ की कमाई हो जाएगा
पर उसे समझना चाहिए था कि जिनकी जिंदगी 5 किलो राशन पर कट रही है वो 400-500 रु मूवी के लिए कहाँ से लाएंगे😁😁😁

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर समरसता भोज एवं नव वर्ष में समता ,समानता ,बंधुत्वता के संदेश हेतु आयोजित मिलन समारोह में आ...
11/01/2024

राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर समरसता भोज एवं नव वर्ष में समता ,समानता ,बंधुत्वता के संदेश हेतु आयोजित मिलन समारोह में आप सादर आमंत्रित हैं 🙏🏻

11/03/2023

बिचौलिओ ने धर्म की आंड़ में जिन चीजों को सबसे ज्यादा पिछड़ों दलितों से छिपाया... वे सब भाजपा के आने से खुल गए ।

( अब धार्मिक बिचौलिए सत्ता बचाएं या धंधा ?? )

सादर आमंत्रित हैं 🙏
08/12/2021

सादर आमंत्रित हैं 🙏

जैसे तथाकथित कट्टर धार्मिकों को आज तक धर्म ही नहीं समझ में आया, वैसे ही आधुनिक देशभक्तों को देशभक्ति का कोई ज्ञान नहीं। ...
14/03/2021

जैसे तथाकथित कट्टर धार्मिकों को आज तक धर्म ही नहीं समझ में आया, वैसे ही आधुनिक देशभक्तों को देशभक्ति का कोई ज्ञान नहीं। अधिकांश समझते हैं कि वन्देमातरम, जय हिन्द, जय भारत के नारे लगा देने से देशभक्त हो जाते हैं। कुछ समझते हैं कि राष्ट्रगान गा लेने से, प्रभात फेरी लगा लेने से देशभक्त हो गए। कुछ लोग समझते हैं विपक्षी पार्टियों को गरिया देने से देशभक्त हो जाते हैं। कुछ लोगों को लगता है पाकिस्तान ट्रैवल एजेन्सी के एजेंट बनकर विरोधियों को पाकिस्तान भेजने से देशभक्त हो जाते हैं।

ये देशभक्ति नहीं दिमागी दिवालियापन है। ये बिल्कुल वैसी ही खोखली देशभक्ति है जैसी अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाना, जय श्रीराम के नारे लगाना, गीता, कुरआन, बाइबल पढ़ना, पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत-उपवास, भजन कीर्तन करना और स्वयं को धार्मिक समझना।

देशभक्ति कहते हैं देश के प्रति निष्ठा को। जब भी देश का अहित हो रहा हो, देश बेचा जा रहा हो, देश लूटा जा रहा हो, देश के नागरिकों को फर्जी महामारी या पड़ोसी देशों का भय दिखाकर बंधक बनाया जा रहा हो, तो विरोध करना।

लुटेरों को सत्ता व देश से बाहर खदेड़ना, जनता को न्याय दिलाना देशभक्ति है। और यदि आप मौन समर्थन कर रहे हैं, बार बार बिकाऊ, देश बेचने वाले नेताओं को सत्ता सौंप रहे हैं, तो आप देशभक्त नहीं, देशद्रोही हैं। फिर भले आप वन्देमातरम के नारे लगाएं, या प्रभात फेरी निकालें या फिर राष्ट्रगान गाते फिरें गली मुहल्ले, आप देशद्रोही ही कहलाएंगे।

लगे हाथों धर्म भी समझ लीजिए।

पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत-उपवास, भजन-कीर्तन करने से, मंदिर-मस्जिद बनवाने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। धार्मिक होता है वह जो भूखे को रोटी खिलाए, प्यासे को पानी पिलाए, देशभक्तों का तन-मन-धन से सहयोग करे, देश को लुटने से बचाए, निर्बलों, असहायों का रक्षक व सहयोगी बने। फिर भले वह पूजा-पाठ, रोजा, नमाज, व्रत, उपवास न करे, या नास्तिक ही क्यों न हो, वह धार्मिक ही कहलाएगा। वह धार्मिक इसलिए कहलाएगा, क्योंकि वह धार्मिक कार्य कर रहा है। और जो इन सबके विरुद्ध आचरण करे वह अधार्मिक कहलाएगा, भले वह कट्टर आस्तिक ही क्यों न हो, फिर वह पांचों व्यक्त नमाजी ही क्यों हो।

कोरोना' के नाम पर जिन्होंने पूरे देश को बंधक बना रखा है, करोड़ों से रोजगार छीन लिया, जन-जीवन ठप्प कर दिया, वे कह रहे हैं ...
07/12/2020

कोरोना' के नाम पर जिन्होंने पूरे देश को बंधक बना रखा है, करोड़ों से रोजगार छीन लिया, जन-जीवन ठप्प कर दिया, वे कह रहे हैं कि किसानों ने दिल्ली को बंधक बना रखा है ।

जो आए दिन संसद ठप्प करते थे, देशबंद करते थे महंगाई और एफडीआई को डायन बताकर, वे आज कह रहे हैं कि किसानों ने जनजीवन ठप्प कर दिया है, लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है ।

ओशो ने सही कहा था, "अपराधी और राजनीतिज्ञ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । जब तक सत्ता नहीं मिलती, हड़तालें और बंद करवाते हैं और सत्ता मिलते ही हड़तालों, विरोधों को उपद्रव बताते हैं, विदेशी षड्यंत्र बताते हैं ।"

हमने भी देखा है कि जिनके लिए कभी महंगाई और एफडीआई डायन थी, उनके लिए आज विकास की मौसी है । और आश्चर्य तो मुझे इस बात का है कि ऐसे बेशर्मों और दोगलों के भी समर्थक होते हैं, जयकारा लगाने वाले होते हैं ।

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