23/09/2026
कांग्रेस सत्ता को अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है!
उनके अंतर्मन को आज भी ये स्वीकार नहीं कि राजशाही परिवार के बाहर भी कोई इस देश का प्रधानमंत्री हो सकता है।
70 साल तक सत्ता की मलाई खाई, तो लगता है देश इनकी जागीर है।
राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, पर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर लाल किले के कार्यक्रम में उन्हें विशेष सम्मानित नहीं किया गया तो नाराज़ हैं।
क्यों? क्योंकि इन्हें हमेशा से विशेषाधिकार मिला है। लाइन में खड़े होना, सामान्य नागरिक की तरह बैठना इनकी शान के खिलाफ है। वहाँ भी इन्हें राजकुमार वाली जगह चाहिए!
और यही सोच का फर्क है - भाजपा और कांग्रेस में।
भाजपा जब विपक्ष में थी, तो विपक्ष की तरह व्यवहार करती थी — मर्यादा में, राष्ट्रहित में।
प्रधानमंत्री एक बार बुलाते थे तो UNO में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने चली जाती थी। देश पर संकट आता था तो कहती थी - हम सरकार के साथ खड़े हैं।
क्योंकि भाजपा के लिए — राष्ट्र प्रथम है।
और कांग्रेस?
देश पर संकट आए तो उसे भी आपदा में अवसर समझती है। विदेश जाकर देश को बदनाम करो, सेना पर सवाल उठाओ, सरकार गिरे तो गिरे, बस कुर्सी मिल जाए।
एक पार्टी के लिए कुर्सी बड़ी है, देश छोटा।
दूसरी के लिए देश बड़ा है, कुर्सी छोटी।
यही है भाजपा और कांग्रेस की सोच में अंतर।
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