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🙏 नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन आस्था का सम्मान एक होना चाहिए।हम पारसनाथ की पहाड़ी कहेंगे, आप मरांग बुरू बोलिए।आपका भी यह प...
02/09/2026

🙏 नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन आस्था का सम्मान एक होना चाहिए।

हम पारसनाथ की पहाड़ी कहेंगे, आप मरांग बुरू बोलिए।
आपका भी यह पवित्र पहाड़ है, हमारा भी—तो आइए, इसे मिलकर पवित्र और स्वच्छ रखें। ❤️

🚫 पहाड़ पर दारू और सिगरेट से बचें
🚯 जूठन, कचरा और गंदगी न फैलाएँ
📵 पहाड़ पर रील्स और दिखावे से बचें
🙏 वहाँ केवल भक्ति, पूजा और आराधना की भावना रखें।

विवाद नहीं, सम्मान चाहिए।
प्रकृति नहीं बिगाड़नी, आस्था नहीं ठेस पहुँचानी। 🇮🇳

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02/09/2026

तेलंगाना का प्रसिद्ध पद्मक्षी मंदिर एक जैन तीर्थस्थल था जिसे बाद में हिंदू तीर्थस्थल में परिवर्तित कर दिया गया, और अब हर साल लाखों हिंदू यहां दर्शन करने आते हैं।

सन् 1117 ईस्वी में एक शिलालेख में इस स्थल पर कदललय बसदी नामक जैन तीर्थस्थल के निर्माण का उल्लेख मिलता है। शिलालेख में मंत्री बेताना-पेरगड़ा की पत्नी मैलामा द्वारा बसदी को भूमि अनुदान दिए जाने का भी उल्लेख है।

ड्यूरिंग एंशियंट टाइम थे श्राइन हद स्ट्रांग जैन आईकॉनोग्राफी: लार्ज रिलीफ्स ऑफ थे 23आरडी तीर्थंकर पार्श्वनाथ, हिज एक्स (धरानेंद्र) एंड यक्षिणी (पद्मावती/पद्माक्षी) अपीयर इन थे गर्भगृह तिल नो.

काकतीय राजवंश ने अपने धार्मिक स्वरूप में परिवर्तन किया: आरंभिक शासक जैन धर्म के अनुयायी थे, लेकिन बाद में उन्होंने वीरशैव धर्म अपना लिया। ऐसा माना जाता है कि लगभग 1156 ईस्वी के बाद, काकतीय शासकों के शासनकाल में जैन तीर्थस्थल को देवी पद्माक्षी (जैन यक्षी पद्मावती का एक रूप) को समर्पित �

02/09/2026

भोगांव (मैनपुरी), उत्तर प्रदेश में जिन प्रतिमाएं प्राप्त !

19 अगस्त को मकान की नींव की खुदाई के दौरान दो प्राचीन जैन प्रतिमाएँ एवं एक पाषाण चरण पादुका प्राप्त हुईं।

बताया गया है कि एक प्रतिमा पर तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का लांछन अंकित है, जबकि दूसरी प्रतिमा का लांछन मिट चुका है। प्रतिमाओं के साथ प्राप्त चरण पादुका पर भगवान के पवित्र चरण उत्कीर्ण हैं।

विशेष संयोग यह भी रहा कि इसी दिन भगवान पार्श्वनाथ का निर्वाण कल्याणक (मोक्ष सप्तमी) पर्व था। जैन समाज ने श्रद्धापूर्वक इन प्राचीन धरोहरों को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में विराजमान कराया।

यह घटना भोगांव की प्राचीन जैन विरासत और ऐतिहासिक जड़ों की ओर एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

समाज से अपील : तीर्थक्षेत्र को टूरिस्ट प्लेस न बनाएं।
01/09/2026

समाज से अपील : तीर्थक्षेत्र को टूरिस्ट प्लेस न बनाएं।

कल 2 सितंबर चंदन षष्ठी व्रत के इस पावन अवसर पर, अपनी शक्ति अनुसार एक छोटा-सा संकल्प लेकर आत्मशुद्धि की ओर कदम बढ़ाएँ। अग...
01/09/2026

कल 2 सितंबर चंदन षष्ठी व्रत के इस पावन अवसर पर, अपनी शक्ति अनुसार एक छोटा-सा संकल्प लेकर आत्मशुद्धि की ओर कदम बढ़ाएँ। अगर आप भी इस पावन व्रत से जुड़ना चाहें, तो कमेंट में अपना नियम लिखकर इस संकल्प की यात्रा का हिस्सा बनें।

उत्तम समाधि मरणDigambar Jain परम पूज्य युगश्रेष्ठ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री १०८ सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षित एवं चतु...
01/09/2026

उत्तम समाधि मरण

Digambar Jain परम पूज्य युगश्रेष्ठ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री १०८ सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षित एवं चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री १०८ सुनीलसागर जी महाराज की पावन छत्रछाया में साधनारत मुनि श्री १०८ सुकुमालसागर जी महाराज ने कल उत्तम समाधि मरण को प्राप्त किया।

मुनि श्री 24 वर्षों से निरंतर संयम एवं साधना के पथ पर साधनारत रहे। 7 दिवसीय निर्जल उपवास करते हुए सल्लेखना समाधि की ओर निरंतर अग्रसर मुनि श्री ने आज 31 अगस्त 2026 को संध्याकाल 6:30 बजे, नेमीनगर जैन कॉलोनी, इंदौर में आचार्य श्री के मुखारविंद से नवकार मंत्र सुनते हुए शांत एवं पवित्र भावों के साथ उत्तम समाधि मरण को प्राप्त किया।

🙏 जैन धर्म की पावन सल्लेखना एवं समाधि साधना की महान परंपरा को नमन।

🪷 मुनि श्री की आत्मा उत्तरोत्तर उन्नति करते हुए मोक्षमार्ग में अग्रसर हो — ऐसी मंगल भावना

सौजन्य श्री 108 सुनील सागर युवा संघ भारत

31/08/2026

णमोकार मंत्र मोक्ष मार्ग का उद्गम।

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