AISF Madhubani

AISF  Madhubani All India Students Federation (AISF) District Council Madhubani Bihar The All India Students Federation (AISF) was the first student union in India level.

It was founded by students on 12 August 1936 with the banner Freedom Peace Progress, with the guidance of Nehru. At that time, it worked for the independence of India. The organization now works for the betterment of students. It believes in peace, progress and scientific socialism. The AISF has state committees in several states in India.

आज मधुबनी में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया ...
20/02/2026

आज मधुबनी में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन किया गया।
जनता को भयमुक्त माहौल और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हमारी मुख्य मांग है।
जन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं! ✊

07/10/2025

मधुबनी के लाल झंडा की आवाज़ बनिए! 🔥
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समानता, न्याय और जनता के अधिकार की लड़ाई में साथ दें।
🔴 लाल सलाम!

25/09/2025
.............कम्युनिस्ट आंदोलन के बढ़ते कदम...............**********************************************                ...
12/06/2025

.............कम्युनिस्ट आंदोलन के बढ़ते कदम...............
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
बिस्फी अंचल परिषद्
का
25 वां अंचल सम्मेलन
15.06.2025(रविवार) मध्य विद्यालय अजनौली बिस्फी मधुबनी.

09/04/2025

नेता घाट घाट पर अपना नारा और विचारधारा बदलते है। जो कल तक लाले लाल थे अब धीरे धीरे हिंदुत्व का रंग ला रहे..
वहीं हाल है कन्हैया भैया जी का....ये सब देख कर लगता...
लाल सलाम और जय भीम से मनुवाद पर आए तो तब जय श्री राम वाले भगवा गमछी लेना ही बचा है
Kanhaiya Kumar Kanhaiya Kumar

17/03/2025

#पलायन_रोको_नौकरी_दो_यात्रा

कन्हैया कुमार: संघर्ष के नाम पर अवसरवादिता का खेलछात्र आंदोलन की आड़ में निजी राजनीतिबिहार के छात्रों ने BPSC 70वीं पीटी...
16/03/2025

कन्हैया कुमार: संघर्ष के नाम पर अवसरवादिता का खेल

छात्र आंदोलन की आड़ में निजी राजनीति

बिहार के छात्रों ने BPSC 70वीं पीटी परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन खड़ा किया। 31 जनवरी 2025 को पटना कॉलेज में आयोजित छात्र संसद में छात्र युवा संघर्ष मोर्चा ने इस अन्याय के खिलाफ 5 मार्च को विधानसभा मार्च निकालने का निर्णय लिया। लेकिन जल्द ही इस आंदोलन को राजनीतिक स्वार्थों की भेंट चढ़ा दिया गया।

आंदोलन की तारीख बदली, पर असली वजह छुपाई गई

27 फरवरी को अचानक एक ज़ूम मीटिंग बुलाई गई, जिसमें विधानसभा मार्च की तारीख 5 मार्च से बदलकर 10 मार्च कर दी गई। इस बदलाव के पीछे छात्र हित नहीं, बल्कि कन्हैया कुमार का पटना आगमन था। NSUI पहले से ही कन्हैया कुमार के आगमन की योजना बना चुकी थी, लेकिन यह बात आंदोलनकारी छात्रों से छुपाई गई। 10 मार्च की तारीख इसलिए तय की गई ताकि कन्हैया कुमार के लिए माहौल तैयार किया जा सके।

आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश
10 मार्च को कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठनों ने ऐसा माहौल बनाया कि छात्र आंदोलन का नेतृत्व कन्हैया कुमार कर रहे हैं।
1. छात्र संसद के सामूहिक निर्णय को दरकिनार कर दिया गया।
2. संघर्ष कर रहे संगठनों का योगदान भुला दिया गया।
3. कन्हैया कुमार की ब्रांडिंग के लिए आंदोलन का इस्तेमाल किया गया।

विधानसभा मार्च और कन्हैया कुमार की गैरमौजूदगी

10 मार्च को कारगिल चौक, गांधी मैदान से विधानसभा मार्च निकलना था। छात्रों को आश्वासन दिया गया कि कन्हैया कुमार खुद मार्च में शामिल होंगे। लेकिन छात्र घंटों इंतजार करते रहे और अंततः दोपहर 2 बजे बिना कन्हैया के मार्च निकला।

मार्च जब रामगुलाम चौक पहुंचा, तो NSUI और युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता जेपी गोलंबर पर लगे बैरिकेड तोड़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और AISF से जुड़े पांच छात्र गिरफ्तार कर लिए गए।

गिरफ्तार हुए छात्रों में AISF की एक छात्रा भी शामिल थी, जिनकी रिहाई शाम 8 बजे हुई।

गिरफ्तार छात्रों के लिए कोई संवेदना नहीं!

जिस आंदोलन को कन्हैया कुमार के नेतृत्व में बताया जा रहा था, उसकी गिरफ्तारी झेलने वाले छात्रों की कोई सुध तक नहीं ली गई।

1. कन्हैया कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन एक शब्द भी गिरफ्तार छात्रों के पक्ष में नहीं बोला।
2. NSUI के नेताओं ने थाने तक जाना जरूरी नहीं समझा
3. जो संगठन उनके लिए पहले लड़ते थे, वे आज ठगे हुए महसूस कर रहे हैं।

छात्र आंदोलन के नाम पर सियासी ड्रामा

अगर यह वास्तविक आंदोलन होता, तो सभी संगठनों की बराबर भागीदारी होती। लेकिन यहाँ आंदोलन को कन्हैया कुमार की छवि चमकाने का साधन बना दिया गया।

1. गिरफ्तारी हुई तो सिर्फ AISF के छात्र कार्यकर्ताओं की, NSUI के एक भी कार्यकर्ता को कुछ नहीं हुआ।
2. गिरफ्तार छात्रों के लिए कांग्रेस-NSUI ने कोई विरोध तक नहीं किया।
3. अगर आंदोलन सत्ता के खिलाफ था, तो कन्हैया कुमार ने सत्ता पर सवाल क्यों नहीं उठाए?

क्या यही पलायन रोकने का प्रयास है?
आज कन्हैया कुमार ‘पलायन रुको, रोजगार दो’ यात्रा निकाल रहे हैं, लेकिन जब छात्रों का हक छिना जा रहा था, तब वे कहां थे?
1. क्या कन्हैया कुमार का संघर्ष सिर्फ व्यक्तिगत राजनीति तक सीमित है?
2. जो अपने साथ खड़े लोगों की अनदेखी कर दे, वह बिहार के छात्रों का हित कैसे करेगा?
3. छात्रों को ऐसे अवसरवादी नेताओं से सतर्क रहना होगा

बिहार में छात्र आंदोलन न्याय के लिए होता है, न कि किसी की राजनीति चमकाने के लिए। जो नेता संघर्ष के नाम पर निजी फायदे की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें पहचानना जरूरी है। छात्रों को ऐसे स्वार्थी नेताओं से बचना होगा, जो आंदोलन की पीठ पर चढ़कर सत्ता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं।

बिहार के छात्र संघर्षशील हैं, वे किसी अवसरवादी खेल का हिस्सा नहीं बनेंगे!

#पलायन_रोको_नौकरी_दो_यात्रा

20 मार्च को जिला समाहरणालय मधुबनी पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के संयुक्त आह्वा...
02/03/2025

20 मार्च को जिला समाहरणालय मधुबनी पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के संयुक्त आह्वान पर बदलो बिहार ,बदलो सरकार के साथ आगे संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी , मधुबनी ।

22/09/2024

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Bata Chowk
Madhubani
847211

Website

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