मिथिला देशम् JOIN

मिथिला देशम्  JOIN किसान,रोजगार,शिक्षा,स्वास्थ्य और पलायन। मिथिलानीतिक पाँच सूत्री लक्ष्य।

स्वतंत्रता दिवसक अशेष शुभ कामना। जन-सेवा आ राष्ट्र सेवा दुनू अभेद अहि। जे जन सेवा नई बूझताह वो राष्ट्र सेवा नई बुझि सकई ...
15/08/2026

स्वतंत्रता दिवसक अशेष शुभ कामना। जन-सेवा आ राष्ट्र सेवा दुनू अभेद अहि। जे जन सेवा नई बूझताह वो राष्ट्र सेवा नई बुझि सकई छैथ। जय हिंद। वंदे मातरम्। जय जय मिथिला जय जय मैथिली।

गौरवान्वित मैथिल समाज आ मैथिल रंगमंच। अशेष मंगल कामना डॉक्टर महेंद्र मलंगिया सर के। सफल आ सम्माननीय आयोजन। मिथिलाक कलाका...
30/04/2026

गौरवान्वित मैथिल समाज आ मैथिल रंगमंच। अशेष मंगल कामना डॉक्टर महेंद्र मलंगिया सर के। सफल आ सम्माननीय आयोजन। मिथिलाक कलाकार के लेल प्रेरणाश्रोत। जय मैथिली। जय किशोरी जी।

श्रीसीताराम। जय जनक नंदिनी जानकी। घरे घरे जानकी महारानी के पूजा पाठ होमक चाही।जेना सब गोटे दुर्गा पूजा करई छी। तहीना अप्...
29/04/2026

श्रीसीताराम। जय जनक नंदिनी जानकी। घरे घरे जानकी महारानी के पूजा पाठ होमक चाही।जेना सब गोटे दुर्गा पूजा करई छी। तहीना अप्पन सीता जीक पूजा अर्चना होमक चाही।हुनके महिमा सगतरि छैन्ह। जे जेना बुझई छैथ तिनका तहिना फल भेटई छैन्ह। जय मैथिली मनजय जानकी। जय मिथिला। #मिथिलादेशम

जय बाबा वैद्यनाथ।
27/04/2026

जय बाबा वैद्यनाथ।

जय श्रीराम।
26/03/2026

जय श्रीराम।

अशेष मंगल कामना।  #मिथिलादेशम
19/03/2026

अशेष मंगल कामना। #मिथिलादेशम

04/03/2026
राजकीय सम्मान सं महारानी के संस्कार भेल की??
12/01/2026

राजकीय सम्मान सं महारानी के संस्कार भेल की??

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12/01/2026

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दरभंगा महराज कामेश्वर सिंह की पत्नी, मिथिला संस्कृति संरक्षक महारानी काम सुंदरी का निधन...See more

धर्म,प्रत्येक व्यक्ति अपने अपने अनुसार ही समझता आ रहा है। सही गलत की परिभाषा सब की अपनी व्यक्तिगत बन कर रह गई है। किंतु ...
05/12/2025

धर्म,प्रत्येक व्यक्ति अपने अपने अनुसार ही समझता आ रहा है। सही गलत की परिभाषा सब की अपनी व्यक्तिगत बन कर रह गई है। किंतु सत्य कुछ और है और धर्म कुछ और। सनातन ही सत्य है और सत्य ही सनातन। इसमें भी अनेक विचार आ सकते किंतु यथार्थ में यही होना चाहिए। धर्म के वास्तविक स्वरूप नहीं जानने के कारण पूजा कराना भी व्यवसाय हो गया। कीर्तन और अष्ट्याम भी व्यावसायिक रूप धारण कर लिया।संस्कार भी। कन्यादान और अनेकों त्यौहार भी व्यवसाय बन गए। व्यवसाय बनाने के लिए धर्म और सत्य की अपनी परिभाषा होना आवश्यक है। चिकित्सा और शिक्षा भी आज सफल व्यवसाय हो गए।तो सेवा और शिक्षा की भी परिभाषा अपनी ही होनी चाहिए। अन्यथा सफल व्यवसाय बन पायेगा। राजनीति भी देख लिया जाय। बांकी क्या रहा? इसीलिए शास्त्रों में वर्णित,हम कलियुग की परिभाषा को सत्य मानते हैं।जो लिखा गया वो देखा जा रहा है। काम करना है कि स्वयं से प्रारंभ करें कि हम अपने जीवन में ऊपर के किसी भी व्यवसाय को नहीं स्वीकारेंगे। कुछ और कर लेंगे। यही #मिथिलानीति यही #मिथिला #मैथिल माता #जानकी अप्पन #किशोरीजी अशोक वाटिका में आ #सिया जु के बौआ #हनुमानजी
लालभाई। प्रणाम।

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